परिवहन विभाग की पाठशाला: 18 से कम उम्र में न चलाएं वाहन, प्रभाकर दुबे ने छात्रों को दिलाई सुरक्षा की शपथ
राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के छठे दिन चंदौली में परिवहन विभाग ने बच्चों को सुरक्षित ड्राइविंग के प्रति जागरूक किया। प्रभाकर दुबे ने बताया कि कैसे एक लापरवाही पूरे परिवार को मानसिक दर्द दे सकती है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
सड़क सुरक्षा माह के छठे दिन जागरूकता कार्यक्रम
दुर्घटनाओं का परिवार पर पड़ता है गहरा मानसिक असर
18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को वाहन न चलाने की सलाह
विद्यार्थियों और कर्मचारियों ने ली यातायात नियमों की शपथ
हेलमेट और सीट बेल्ट के अनिवार्य प्रयोग पर जोर
चंदौली जिले में 'राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह' के छठे दिन जनपद के परिवहन विभाग द्वारा नई पीढ़ी को जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। मंगलवार को एक निजी विद्यालय में आयोजित विशेष जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को यातायात के कड़े नियमों और सुरक्षित सफर के महत्व से अवगत कराया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किशोरों और युवाओं को सड़क पर होने वाली संभावित दुर्घटनाओं और उनके दूरगामी परिणामों के प्रति सचेत करना था।

परिवार पर पड़ता है दुर्घटना का गहरा प्रभाव
परिवहन विभाग के प्रधान सहायक प्रभाकर दुबे ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एक अत्यंत मार्मिक और विचारणीय बिंदु रखा। उन्होंने कहा कि "सड़क पर होने वाली एक छोटी सी चूक या दुर्घटना सिर्फ एक व्यक्ति को शारीरिक चोट नहीं पहुँचाती, बल्कि उसके माता-पिता और पूरे परिवार के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा आघात करती है।" उन्होंने बच्चों को समझाते हुए कहा कि वाहन चलाते समय आपकी सतर्कता ही आपके अपनों के चेहरे पर मुस्कान बनाए रख सकती है।

नियंत्रित रफ्तार और हेलमेट की अनिवार्यता
प्रभाकर दुबे ने बच्चों से सीधा संवाद करते हुए अपील की कि वे कभी भी 'ओवरस्पीडिंग' का शिकार न हों। उन्होंने कहा कि धीमी गति ही सुरक्षा की सबसे बड़ी गारंटी है। अक्सर देखा जाता है कि किशोर पुलिस को देखकर भागने के चक्कर में वाहन की गति बढ़ा देते हैं, जो जानलेवा साबित होता है। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि जब तक आयु 18 वर्ष पूर्ण न हो जाए और वैध लाइसेंस न मिल जाए, तब तक वाहन के हैंडल को हाथ न लगाएं। इसके साथ ही, उन्होंने दोपहिया वाहन चालकों के लिए BIS मानक वाले हेलमेट की अनिवार्यता पर जोर दिया।
सुरक्षा की शपथ और जिम्मेदारियां
कार्यक्रम के अंतिम चरण में विद्यालय के विद्यार्थियों और कर्मचारियों को सामूहिक रूप से यातायात नियमों के पालन की शपथ दिलाई गई। सभी ने संकल्प लिया कि वे:
- हमेशा लेन ड्राइविंग का पालन करेंगे।
- गलत दिशा (Wrong Side) में वाहन नहीं चलाएंगे।
- वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग नहीं करेंगे।
- सड़क दुर्घटना में घायलों की मदद के लिए सदैव तत्पर रहेंगे।
इसके साथ ही चारपहिया वाहन चालकों को सीट बेल्ट लगाने और नशे की हालत में ड्राइविंग से पूरी तरह बचने की सलाह दी गई।
कार्यक्रम में उपस्थिति
इस जागरूकता अभियान के दौरान जितेंद्र सरोज, सौरभ सिंह, निशांत कुमार सिंह और अमित कुमार सहित विद्यालय के शिक्षक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। परिवहन विभाग का यह अभियान पूरे माह जारी रहेगा ताकि जनपद में सड़क हादसों की दर को न्यूनतम स्तर पर लाया जा सके।
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