साजिशकर्ता जेल में लेकिन हत्यारे आजाद; आखिर कब तक चंदौली पुलिस की गिरफ्त से दूर रहेंगे बेखौफ शूटर?
चंदौली के दवा व्यवसायी रोहिताश पाल की हत्या के 50 दिन बीतने के बाद भी मुख्य शूटर पुलिस की पहुंच से बाहर हैं। 9 स्पेशल टीमें और एसटीएफ की सक्रियता के बावजूद न्याय के लिए तरस रहे परिवार की उम्मीदें अब टूटने लगी हैं।
रोहिताश पाल हत्याकांड के शूटर फरार
नौ स्पेशल टीमों की विफलता पर सवाल
मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार बेकार
चंदौली में अनसुलझे हत्याकांडों की लंबी फेहरिस्त
300 सीसीटीवी फुटेज के बाद भी नाकाम पुलिस
चंदौली जिले में प्रमुख दवा व्यवसायी रोहिताश पाल की निर्मम हत्या को एक माह 20 दिन से अधिक का समय बीत चुका है। इस घटना ने न केवल व्यापारी जगत को हिला कर रख दिया था, बल्कि कानून व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए थे। पुलिस अधीक्षक आदित्य लांघे ने घटना के तुरंत बाद नौ विशेष टीमों का गठन किया था, जिनमें जनपद के सबसे अनुभवी और काबिल पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया था। विडंबना यह है कि इन तमाम प्रयासों और दावों के बावजूद, मुख्य शूटर आज भी पुलिस की गिरफ्त से कोसों दूर हैं।
साजिशकर्ता सलाखों के पीछे, मगर असल कातिल अब भी बेखौफ
हत्याकांड के बाद उपजे भारी जन-आक्रोश को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए साजिश रचने के आरोप में तीन स्थानीय व्यापारियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इस कार्रवाई से एक बार तो लगा कि न्याय की प्रक्रिया पटरी पर है, लेकिन समय बीतने के साथ जनता का संदेह गहराता गया। स्थानीय नागरिकों का सवाल सीधा है कि यदि साजिश का पर्दाफाश हो चुका है, तो वे शूटर कौन हैं जिन्होंने ट्रिगर दबाया और वे अब तक कानून की नजरों से कैसे ओझल हैं? क्या पुलिस की टीमें सिर्फ फाइलों में ही सक्रिय हैं?
सीसीटीवी की लंबी जांच और एसटीएफ की नाकामी
जांच के दौरान पुलिस ने जनपद और आसपास के जिलों के करीब 300 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। कई स्थानों पर शूटरों की धुंधली और स्पष्ट तस्वीरें भी सामने आईं, लेकिन हर बार वे पुलिस को चकमा देने में कामयाब रहे। उत्तर प्रदेश की सबसे तेजतर्रार इकाई मानी जाने वाली स्पेशल टास्क फोर्स (STF) भी इस मामले में अब तक कोई ठोस सुराग नहीं लगा पाई है। करीब 20 दिन पहले मृतक का परिवार स्थानीय विधायक के नेतृत्व में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मिला था, जहाँ उन्हें न्याय का भरोसा मिला था, पर जमीन पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
पुराने अनसुलझे मामलों की याद दिला रहा यह हत्याकांड
रोहिताश पाल हत्याकांड का लंबा खिंचना चंदौली पुलिस के पुराने ट्रैक रिकॉर्ड की याद दिलाता है। जिले में यह पहला मामला नहीं है जहाँ शूटरों ने पुलिस को बौना साबित किया हो। 10 अगस्त 2024 को चंदासी क्षेत्र में हुई बाइक मिस्त्री ओमप्रकाश गुप्ता की हत्या का रहस्य आज भी अनसुलझा है। इसके अलावा मोहम्मदपुर, अलीनगर और नौगढ़ के कई चर्चित मामले आज भी ठंडे बस्ते में हैं। डीडीयू नगर के सीओ अरुण कुमार सिंह का कहना है कि पुलिस टीमें पूरी शिद्दत से काम कर रही हैं और जल्द ही सफलता मिलने की उम्मीद है, लेकिन पीड़ित परिवार के लिए यह आश्वासन अब बेमानी लगने लगा है।
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