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कफ सिरप सिंडिकेट पर बड़ी कार्रवाई: चंदौली की 5 और वाराणसी की 1 फर्म का लाइसेंस रद्द

कफ सिरप की अवैध खरीद-बिक्री और जालसाजी के मामले में औषधि विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। चंदौली और वाराणसी की 6 बड़ी फर्मों के लाइसेंस निरस्त कर दिए गए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र के दवा कारोबारियों में हड़कंप मच गया है।

 
 

कोडीन युक्त कफ सिरप जालसाजी का खुलासा

चंदौली की 5 प्रमुख फर्मों के लाइसेंस निरस्त

वाराणसी की श्री कपीश इंटरप्राइजेज पर कार्रवाई

झारखंड और यूपी के कई जिलों में फैला नेटवर्क

जल्द ही अन्य संदिग्ध फर्मों को मिलेगा नोटिस

 चंदौली और वाराणसी जिलों में कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध खरीद-बिक्री और रिकॉर्ड में हेराफेरी करने वाले सिंडिकेट के खिलाफ प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। कफ सिरप मामले में गंभीर अनियमितताएं पाए जाने के बाद सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा और औषधि (FSDA) पीसी रस्तोगी ने चंदौली की पांच और वाराणसी की एक प्रमुख फर्म का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है।

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इन फर्मों पर गिरी गाज
सहायक आयुक्त पीसी रस्तोगी द्वारा जारी आदेश के अनुसार, वाराणसी स्थित श्री कपीश इंटरप्राइजेज का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है। वहीं, चंदौली जनपद में बड़ी कार्रवाई करते हुए समृद्धि इंटरप्राइजेज, शिवम फार्मा, एसपी फार्मा, सिंह मेडिकोज और च्वायस डिस्ट्रीब्यूटर के लाइसेंस भी रद्द कर दिए गए हैं। विभाग की इस सख्त कार्रवाई से स्थानीय दवा मंडी और कारोबारियों में भारी हड़कंप देखा जा रहा है।

कई राज्यों और जिलों तक फैला है जालसाजी का खेल
जांच में यह तथ्य सामने आया है कि कफ सिरप की खरीद-बिक्री का यह अवैध खेल केवल एक जिले तक सीमित नहीं था। इसका नेटवर्क वाराणसी और चंदौली से होते हुए मिर्जापुर, जौनपुर, गोरखपुर और पड़ोसी राज्य झारखंड के रांची तक फैला हुआ है। कोडीन युक्त सिरप का इस्तेमाल अक्सर नशे के लिए किया जाता है, जिसे देखते हुए विभाग इसकी स्टॉक रिपोर्ट और बिक्री के कागजों की बारीकी से जांच कर रहा है। जैसे-जैसे साक्ष्य सामने आ रहे हैं, विभाग न केवल लाइसेंस रद्द कर रहा है, बल्कि संबंधित संचालकों पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है।

अभी और फर्मों पर होगी कार्रवाई
सहायक आयुक्त पीसी रस्तोगी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यह तो महज शुरुआत है। उन्होंने बताया कि चंदौली और आसपास के क्षेत्रों में अभी भी कई ऐसी फर्में हैं जिनका रिकॉर्ड संदिग्ध पाया गया है। विभाग जल्द ही कुछ और फर्मों को कारण बताओ नोटिस जारी करने जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग और औषधि प्रशासन किसी भी सूरत में जीवन रक्षक दवाओं के नाम पर नशे के अवैध कारोबार को बर्दाश्त नहीं करेगा।

इस कार्रवाई के बाद से अन्य दवा विक्रेताओं को भी हिदायत दी गई है कि वे अपने स्टॉक और बिक्री के आंकड़ों को पारदर्शी रखें, अन्यथा गंभीर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

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