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कोडीन सिरप घोटाले में चंदौली की 3 फर्मों पर बड़ा खुलासा, रांची के सप्लायर तक पहुंची है जांच

चंदौली में कोडीनयुक्त कफ सिरप के अवैध कारोबार का बड़ा नेटवर्क उजागर हुआ है। FSDA की जांच में रांची की सप्लायर मेसर्स-शैली ट्रेडर्स से चंदौली की तीन फर्मों को भारी मात्रा में सिरप की सप्लाई का खुलासा हुआ है। फर्मों के क्रय-विक्रय पर रोक लगा दी गई है और मुगलसराय कोतवाली में FIR दर्ज की गई है।
 

 चंदौली कोडीन सिरप घोटाला एफएसडीए


 रांची की शैली ट्रेडर्स से अवैध सप्लाई


 नशे की दवाओं के कारोबार पर कड़ी कार्रवाई


एफएसडीए की विशेष जांच में अवैध कारोबार का भंडाफोड़

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) द्वारा की गई एक विशेष जांच में कोडीनयुक्त कफ सिरप के अवैध कारोबार का एक बड़ा नेटवर्क उजागर हुआ है। जांच में यह सामने आया है कि रांची स्थित मेसर्स-शैली ट्रेडर्स से भारी मात्रा में New Phensedyl Cough Syrup की सप्लाई चंदौली जिले की तीन फर्मों को की गई थी। औषधि निरीक्षक बृजेश कुमार मौर्य द्वारा 15 से 18 नवंबर 2025 के बीच इन तीनों फर्मों का निरीक्षण किया गया, जिसमें गंभीर अनियमितताएँ सामने आईं।

 मौके पर बंद मिली फर्म: स्टॉक और अभिलेख गायब
जांच के दौरान निम्नलिखित तीनों फर्मों पर कड़ी कार्रवाई हुई है, जिसमें ये कंपनियां शामिल हैं....

  • मेसर्स-समृद्धि इंटरप्राइजेज
  • मेसर्स-च्वाईस डिस्ट्रीब्यूटर्स
  • मेसर्स-एसपी फार्मा

निरीक्षण के समय ये तीनों फर्म मौके पर बंद पाए गए। किसी भी स्थान पर कोडीनयुक्त सिरप का स्टॉक मौजूद नहीं था, जबकि मुख्यालय से प्राप्त अभिलेख दर्शाते हैं कि इन फर्मों ने रांची की शैली ट्रेडर्स से भारी मात्रा में New Phensedyl कोडीन सिरप खरीदा था।

 Codeine Scam, FSDA Raid, Drug Trafficking
कांसेप्ट फोटो

इससे भी गंभीर बात यह है कि विभागीय पोर्टल पर उपलब्ध मोबाइल नंबर बंद पाए गए, और फर्म संचालकों से संपर्क संभव नहीं हो सका। भवन स्वामियों ने बताया कि दुकानों को मेडिकल खोलने के नाम पर किराए पर लिया गया था, परंतु कभी खोला ही नहीं गया और कई महीनों से किराया भी नहीं दिया गया है।

लाइसेंस का दुरुपयोग और नारकोटिक श्रेणी का उल्लंघन
एफएसडीए रिपोर्ट के अनुसार, कोडीन एक नारकोटिक श्रेणी की औषधि है। इसका क्रय-विक्रय केवल लाइसेंसधारी फर्म ही चिकित्सकीय पर्चे के आधार पर कर सकती हैं।  इन फर्मों ने अपने लाइसेंस का दुरुपयोग कर कोडीनयुक्त सिरप को गैर-चिकित्सकीय एवं नशे के रूप में प्रयोगार्थ बेचने का गंभीर संदेह उत्पन्न किया है।  निरीक्षण के दौरान किसी ने भी खरीद-फरोख्त के अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए। यह स्पष्ट संकेत है कि औषधियों का स्टॉक सुरक्षित रखने के बजाय उन्हें अवैध रूप से बाजार में खपाया गया है।

 एफआईआर दर्ज: चार लोगों पर लगे गंभीर आरोप
जांच में यह भी सामने आया कि फर्मों ने सक्षम प्राधिकारी की मांग पर दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख भी प्रस्तुत नहीं किए, जो भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के अंतर्गत अपराध है।

  • ये हैं आरोपी: शैली ट्रेडर्स, रांची के प्रोपराइटर भोला प्रसाद, तथा चंदौली की तीनों फर्मों की प्रोपराइटर्स—अंजलि कसेरा, आलोक प्रजापति और सबा परवीन—पर कूटरचित बिलों के माध्यम से कोडीनयुक्त सिरप की आपूर्ति और अवैध बिक्री का आरोप है।
  • इन पर होगी कानूनी कार्रवाई: औषधि निरीक्षक ने थानाध्यक्ष मुगलसराय को विस्तृत जांच रिपोर्ट भेजते हुए चारों जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की।
  • मुकदमा दर्ज करने के बाद एक्शन : इस संदर्भ में मुगलसराय कोतवाली में BNS की धारा 206(a), 271, 276, 218(4) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।

साथ ही, तीनों फर्मों के क्रय-विक्रय पर औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की धारा 22(1)(d) के तहत तत्काल रोक लगा दी गई है। एफएसडीए की इस कार्रवाई से अवैध दवा कारोबारियों में हड़कंप मचा है, और यह संदेश जाता है कि चंदौली में नशे की दवाओं के अवैध व्यापार पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

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