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एक साल बाद भी शुरू नहीं हुआ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण, जमीन अधिग्रहण में अड़चन

निर्माण में देरी के कारण नगर पालिका क्षेत्र और रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन क्रमशः 22 एमएलडी और 23 एमएलडी सीवेज बिना किसी शोधन के सीधे गंगा में गिर रहा है।
 

नगर पालिका और रेलवे का सीवेज अब भी सीधे गंगा में

जमीन अधिग्रहण बना निर्माण में सबसे बड़ी बाधा

262.78 करोड़ की परियोजना फाइलों में सिमटी

चंदौली जिले के पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर से सटे रौना गांव में प्रस्तावित जिले के पहले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण एक साल बीतने के बाद भी शुरू नहीं हो सका है। सात वर्षों की लंबी प्रक्रिया के बाद वर्ष 2023 में इस परियोजना को मंजूरी तो मिल गई थी, लेकिन जमीन अधिग्रहण और टेंडर प्रक्रिया में अड़चनों के चलते अभी तक निर्माण कार्य आरंभ नहीं हुआ है।

गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई वाराणसी के परियोजना प्रबंधक आशीष कुमार के अनुसार, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अब लगभग पूरी हो चुकी है। शेष मात्र 0.49 हेक्टेयर भूमि की खरीद का कार्य शेष है, जबकि 1.60 हेक्टेयर जमीन पहले ही अधिग्रहित की जा चुकी है। टेंडर प्रक्रिया के लिए नोटिस जारी कर दिया गया है और 4 अगस्त को टेंडर खोले जाएंगे।

एनएमसीजी से 262.78 करोड़ की मिली मंजूरी

नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) ने कुल 262.78 करोड़ रुपये की लागत से 45 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी के निर्माण को मंजूरी दी है। प्रारंभ में यह क्षमता 37 एमएलडी प्रस्तावित थी, लेकिन नगर क्षेत्र और रेलवे द्वारा गंगा में गिराए जा रहे सीवेज की मात्रा में बढ़ोतरी को देखते हुए इसे 45 एमएलडी कर दिया गया।

2018 में शुरू हुई थी जमीन की तलाश

इस परियोजना की शुरुआत वर्ष 2018 में हुई थी, जब गंगा में गिरते सीवेज पर नियंत्रण की जरूरत महसूस की गई। वर्ष 2019 में रौना गांव में उपयुक्त भूमि की पहचान हुई, और 2023 में जाकर भूमि अधिग्रहण का रास्ता साफ हुआ।

गंगा में अब भी गिर रहा अपशिष्ट जल

निर्माण में देरी के कारण नगर पालिका क्षेत्र और रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन क्रमशः 22 एमएलडी और 23 एमएलडी सीवेज बिना किसी शोधन के सीधे गंगा में गिर रहा है। इससे न केवल नदी का प्रदूषण बढ़ रहा है, बल्कि यह स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा बनता जा रहा है।

टेंडर प्रक्रिया में सात कंपनियों की भागीदारी

एसटीपी के निर्माण हेतु निकली निविदा में अब तक सात कंपनियों ने भाग लिया है। अधिकारियों का कहना है कि अधिशासी अधिकारी की नियुक्ति होते ही प्रक्रिया और तेज होगी और आगामी छह माह में टेंडर प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। उसके बाद दो वर्षों के भीतर निर्माण कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है।

परियोजना प्रबंधक का दावा

आशीष कुमार, परियोजना प्रबंधक, गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने कहा गंगा को प्रदूषण से मुक्त करना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है। भूमि अधिग्रहण लगभग पूरी हो चुकी है। टेंडर प्रक्रिया अंतिम चरण में है। बहुत जल्द निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा, जिसका लाभ आने वाले वर्षों में पूरे नगर क्षेत्र को मिलेगा।

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