DDU जंक्शन पर गूंजी किलकारी: प्रसव पीड़ा से तड़प रही महिला के लिए मसीहा बनीं डॉक्टर यशी और आरपीएफ टीम
प्रसव पीड़ा के दौरान त्वरित डॉक्टरी सहायता
आरपीएफ 'मेरी सहेली' टीम की सक्रियता
प्लेटफॉर्म पर गूंजी नन्हे बच्चे की किलकारी
डॉक्टर यशी त्रिपाठी बनीं परिवार का सहारा
चंदौली जनपद के पंडित दीनदयाल उपाध्याय (डीडीयू) जंक्शन पर मानवता और कर्तव्यनिष्ठा की एक अद्भुत मिसाल देखने को मिली। यात्रा के दौरान एक महिला यात्री की अचानक तबीयत बिगड़ने और प्रसव पीड़ा होने पर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की ‘मेरी सहेली’ टीम और रेलवे अस्पताल की डॉक्टर यशी त्रिपाठी ने देवदूत बनकर उसकी मदद की। इनकी संयुक्त तत्परता के कारण न केवल एक नई जिंदगी सुरक्षित दुनिया में आई, बल्कि जंक्शन पर मौजूद यात्री भी इस मानवीय संवेदना को देखकर भावविभोर हो गए।
आरपीएफ ‘मेरी सहेली’ टीम की सतर्कता से मिली मदद
मिली जानकारी के अनुसार, बिहार के पटना (नेतौल) निवासी मुकेश बिंद अपनी पत्नी मानमती बिंद के साथ ट्रेन संख्या 15744 डाउन (साहिबगंज-पटना) से यात्रा कर रहे थे। सफर के दौरान मानमती को अचानक तीव्र प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। दर्द से तड़पती महिला की स्थिति देखकर मुकेश डीडीयू जंक्शन पर उतर गए। प्लेटफॉर्म पर महिला की चीख-पुकार सुनकर वहां गश्त कर रही आरपीएफ की ‘मेरी सहेली’ टीम तत्काल सक्रिय हुई। टीम की महिला कर्मियों ने स्थिति की नाजुकता को भांपते हुए फौरन रेलवे अस्पताल की महिला रोग विशेषज्ञ डॉक्टर यशी त्रिपाठी को सूचित किया।
डॉक्टर यशी त्रिपाठी की कुशलता
सूचना मिलते ही डॉक्टर यशी त्रिपाठी बिना एक पल गंवाए मौके पर पहुंचीं। चिकित्सा संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने प्लेटफॉर्म पर ही सुरक्षित घेरा बनवाकर महिला का उपचार शुरू किया। डॉक्टर यशी की कुशलता और आरपीएफ टीम के सहयोग से मानमती ने एक स्वस्थ पुत्र को जन्म दिया। पुत्र रत्न की प्राप्ति के बाद मुकेश बिंद ने नम आंखों से डॉक्टर और रेलवे पुलिस को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि यदि समय पर रेलवे की यह टीम मदद के लिए नहीं आती, तो उनकी पत्नी और बच्चे की जान को खतरा हो सकता था।
यह पहली बार नहीं है जब डॉक्टर यशी त्रिपाठी ने इस तरह की तत्परता दिखाई हो; बीते कुछ दिनों में उन्होंने अपनी ड्यूटी के दौरान ऐसे ही दो अन्य परिवारों को खुशियां प्रदान की हैं। वर्तमान में जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। यह घटना साबित करती है कि भारतीय रेलवे न केवल यात्रियों के सफर को सुगम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, बल्कि आपातकालीन स्थितियों में जीवन रक्षक के रूप में भी अग्रणी भूमिका निभा रही है।
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