फर्जी परमिट पर कोयले की कालाबाजारी पर FIR, आर.एस. ट्रांसपोर्ट चन्धासी की भूमिका संदिग्ध
वन विभाग की कार्रवाई से अवैध कोयला तस्करी का भंडाफोड़
फर्जी अभिवहन पास के साथ दो शातिर हुए हैं गिरफ्तार
मुगलसराय कोतवाली में दर्ज हुआ है फर्जीवाड़े का मुकदमा
रामनगर–कटरिया मार्ग स्थित लंका मैदान के पास कार्रवाई
चंदौली जिले के मुगलसराय कोतवाली क्षेत्र में वन विभाग की टीम ने फर्जी अभिवहन पास के जरिए कोयला तस्करी का भंडाफोड़ करते हुए दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई सोमवार 17 नवंबर 2025 को लगभग दोपहर 3 बजे रामनगर–कटरिया मार्ग स्थित लंका मैदान पर की गई थी।
वन विभाग की टीम में वन दरोगा पवन कुमार सिंह, प्रदीप कुमार और दीपेन्द्र सिंह यादव शामिल थे। चेकिंग के दौरान RJ09 GB 7056 नंबर का एक ट्रक रोक कर उसमें लदे भारी मात्रा में कोयले की जांच की गई। चालक शिवचन्द जाट, निवासी भीलवाड़ा (राजस्थान) ने अभिवहन पास दिखाया, लेकिन जांच में पाया गया कि यह पास रेंज कार्यालय द्वारा जारी नहीं किया गया था और पूरी तरह फर्जी व कूटरचित था।
पूछताछ में चालक ने खुलासा किया कि फर्जी पास उसे राहुल नामक व्यक्ति द्वारा आर.एस. ट्रांसपोर्ट के माध्यम से उपलब्ध कराया गया था। वन विभाग ने मौके पर चालक शिवचन्द जाट और खलासी देवी लाल को गिरफ्तार कर ट्रक व कोयले के साथ डिवीजन कार्यालय परिसर में खड़ा किया। बाद में दोनों को रेंज कार्यालय मुगलसराय लाया गया।
फर्जी कागजातों के इस घोटाले से प्रदेश सरकार को भारी राजस्व हानि होने की आशंका जताई गई है। मामले में वन विभाग ने अभियुक्तों के खिलाफ भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 41, 42, 52 तथा उत्तर प्रदेश इमारती लकड़ी एवं अन्य वन उपज अभिवहन नियमावली 1978 की धारा 3 व 28 के तहत एच-2 केस दर्ज किया।
वन विभाग ने फर्जी पास तैयार करने में आर.एस. ट्रांसपोर्ट चन्धासी की संदिग्ध भूमिका की ओर इशारा किया है। विभाग ने कोतवाली मुगलसराय पुलिस से अनुरोध किया है कि दोनों गिरफ्तार अभियुक्तों को अपनी हिरासत में लेकर अन्य शामिल व्यक्तियों की गिरफ्तारी कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
इस संबंध में मुगलसराय कोतवाली में भारतीय दंड संहिता की धारा 218(4), 319(2), 338, 336(3) और 340(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। वन विभाग ने कहा कि इस प्रकार की अवैध कोयला तस्करी रोकने के लिए नियमित चेकिंग और सख्त कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि वन संपदा और राज्य का राजस्व संरक्षित रह सके।
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