The Journalist Association: डॉ. विनय कुमार वर्मा पुनः बने राष्ट्रीय संयोजक, संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पदाधिकारियों का जताया आभार
द जर्नलिस्ट एसोसिएशन द्वारा डॉ. विनय कुमार वर्मा को पुनः राष्ट्रीय संयोजक मनोनीत किया गया, डॉ. वर्मा ने राष्ट्रीय अध्यक्ष व सभी पदाधिकारियों का आभार जताते हुए पत्रकार हितों के लिए काम करने का संकल्प लिया।
डॉ. विनय वर्मा राष्ट्रीय संयोजक बने
जर्नलिस्ट एसोसिएशन में पुनः मनोनयन
पत्रकारों के सम्मान की प्राथमिकता
राष्ट्रीय अध्यक्ष का जताया आभार
संगठन को नई ऊंचाई पर ले जाएंगे
द जर्नलिस्ट एसोसिएशन (TJA) द्वारा मुझे पुनः राष्ट्रीय संयोजक के महत्वपूर्ण दायित्व पर मनोनीत किए जाने पर संगठन के आदरणीय राष्ट्रीय अध्यक्ष जी एवं समस्त पदाधिकारियों के प्रति मैं हृदय की गहराइयों से आभार एवं कृतज्ञता व्यक्त करता हूँ।
विशेष रूप से आदरणीय राष्ट्रीय अध्यक्ष जी का हृदय से धन्यवाद, जिन्होंने एक बार फिर मुझ पर विश्वास जताते हुए इस महत्वपूर्ण दायित्व के योग्य समझा। संगठन ने जो भरोसा मुझ पर दिखाया है, उसे मैं पूरी निष्ठा के साथ निभाने का प्रयास करूंगा।

पद सम्मान ही नहीं जिम्मेदारी भी
मैं भलीभाँति जानता हूँ कि पद केवल सम्मान नहीं, बल्कि जिम्मेदारियों, अपेक्षाओं और विश्वास की एक बड़ी कसौटी भी है। संगठन में पद मिलने का मतलब है कि आपकी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। आपको सबको साथ लेकर चलना होता है और संगठन के हित में काम करना होता है।
पिछले कार्यकाल में कुछ संकल्प ऐसे रह गए, जिन्हें चाहकर भी पूर्ण नहीं कर सका। कई कारणों से कुछ काम अधूरे रह गए थे। मेरी पूरी कोशिश होगी कि इस नए कार्यकाल में उन अधूरे संकल्पों को साकार कर सकूँ और संगठन को नई ऊर्जा, नई दिशा तथा नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में अपना सार्थक योगदान दे सकूँ।
पत्रकारों के सम्मान और सुरक्षा प्राथमिकता
पत्रकारों के सम्मान, सुरक्षा, अधिकारों और उनके हितों की रक्षा के लिए पूरी निष्ठा, समर्पण एवं मनोयोग से कार्य करना ही मेरी प्राथमिकता होगी। आज के समय में पत्रकार कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। कई जगह पत्रकारों पर हमले हो रहे हैं, उनके अधिकारों का हनन हो रहा है। ऐसे में संगठन का दायित्व बनता है कि वह अपने साथियों के साथ खड़ा रहे।
मैं चाहता हूँ कि द जर्नलिस्ट एसोसिएशन देशभर के पत्रकारों की आवाज बने और हर जिले, हर तहसील तक संगठन की पहुंच हो। छोटे और बड़े सभी पत्रकारों को संगठन में बराबर सम्मान मिले।
एकजुटता ही संगठन की ताकत
मेरा विश्वास है कि संगठन की वास्तविक शक्ति पदों में नहीं, बल्कि उसके सदस्यों के आपसी विश्वास, एकजुटता और सामूहिक प्रयासों में निहित होती है। जब तक हम सब एक साथ नहीं रहेंगे, संगठन मजबूत नहीं होगा। इसलिए मेरी कोशिश रहेगी कि सभी साथियों को साथ लेकर चलूं।
यह पुनर्मनोनयन मेरे लिए केवल सम्मान नहीं, बल्कि आत्ममंथन, आत्मसुधार और पहले से बेहतर कार्य करने का एक नया अवसर है। मैं अपने पिछले कार्यों की समीक्षा करूंगा और जहां कमी रही, उसे सुधारने का प्रयास करूंगा.
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