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बौद्ध विहार अधिग्रहण विवाद: 113वें दिन भी जारी रहा अनिश्चितकालीन धरना, झुकने को तैयार नहीं प्रदर्शनकारी

चंदौली के मिल्कीपुर ताहिरपुर में बौद्ध धर्मस्थल अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन 113वें दिन भी जारी रहा। प्रो. ओ.पी. मौर्य के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए बौद्ध विहार को बचाने हेतु आर-पार की जंग का ऐलान किया है।

 
 

113वें दिन में प्रवेश कर गया धरना

अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) के खिलाफ प्रदर्शन

प्रो. ओ.पी. मौर्य के नेतृत्व में आंदोलन

ऐतिहासिक बौद्ध धर्मस्थल बचाने की गुहार

अधिग्रहण के विरोध में ग्रामीणों की एकजुटता

चंदौली जनपद के नियामताबाद तहसील अंतर्गत रामनगर क्षेत्र के मिल्कीपुर ताहिरपुर गांव में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) द्वारा किए जा रहे कथित जबरन भूमि और बौद्ध धर्मस्थल के अधिग्रहण के विरोध में स्थानीय जनता का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार, 18 जनवरी 2026 को यह अनिश्चितकालीन धरना अपने 113वें दिन में प्रवेश कर गया।

दोहरी नीति का लगाया आरोप: प्रो. ओ.पी. मौर्य
धरने का नेतृत्व कर रहे बीएचयू के नेत्र सर्जन प्रो. ओ.पी. मौर्य ने सभा को संबोधित करते हुए केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "एक तरफ सरकार देश के विभिन्न हिस्सों में धर्मस्थलों के सौंदर्यीकरण और पुनरुद्धार के नाम पर करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर तथागत बुद्ध की देशनाओं पर आस्था रखने वाले करोड़ों लोगों के श्रद्धा केंद्र 'बौद्ध विहार' को उजाड़ने की तैयारी की जा रही है। यह दोहरा मापदंड किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है।"

कुर्बानी देने को तैयार हैं ग्रामीण
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि यह बौद्ध विहार उनके लिए केवल एक ढांचा नहीं, बल्कि उनकी ऐतिहासिक पहचान और आस्था का प्रतीक है। आंदोलनकारियों ने हुंकार भरते हुए कहा कि वे किसी भी स्थिति में अधिग्रहण नहीं होने देंगे। धरने पर बैठे वक्ताओं ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को अनसुना किया गया, तो वे अपनी जान की कुर्बानी देने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

इन प्रमुख चेहरों ने बढ़ाया आंदोलन का हौसला
113वें दिन के धरने में क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक और युवा कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे। प्रमुख रूप से विद्याधर मौर्य, वीरेंद्र मौर्य, अखिलेश सिंह, संजय कुमार मौर्य, संतराम मौर्य और मस्तराम मौर्य ने भाग लिया। साथ ही श्याम सुंदर यादव, आशीष कुमार, विकास नरसिंह मौर्य, संदीप कुमार, शैलेंद्र कुमार, सुरेश कुमार मौर्य, एडवोकेट विनय, चंद्र प्रकाश मौर्य, रामसूरत और सिमरन कुशवाहा सहित सैकड़ों की संख्या में पुरुषों और महिलाओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

आगे की रणनीति
आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक प्रशासन या जलमार्ग प्राधिकरण अधिग्रहण का प्रस्ताव वापस नहीं लेता, तब तक यह धरना स्थल उनकी कर्मभूमि बना रहेगा। ग्रामीणों ने अब इस आंदोलन को तहसील स्तर से बढ़ाकर जिला मुख्यालय और शासन तक ले जाने की रणनीति तैयार की है।

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