चंदौली में प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्री पर शिकंजा: जहरीले धुएं की शिकायत पर प्रदूषण विभाग ने की सख्त कार्रवाई
पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर की एक औद्योगिक इकाई से निकलने वाले जहरीले काले धुएं ने स्थानीय लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। आईजीआरएस पर शिकायत के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने फैक्ट्री का औचक निरीक्षण कर बड़ी खामियां पकड़ी हैं।
मुगलसराय फैक्ट्री से जहरीला धुआं
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई
खराब मिले डस्ट कलेक्टर उपकरण
पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी पर नोटिस
आईजीआरएस शिकायत पर हुआ एक्शन
चंदौली जिले में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, वाराणसी ने मुगलसराय तहसील क्षेत्र की एक बड़ी औद्योगिक इकाई के खिलाफ पर्यावरण मानकों के उल्लंघन के आरोप में कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। क्षेत्र में लगातार फैल रहे वायु प्रदूषण और जहरीले धुएं की जनशिकायत के बाद यह कदम उठाया गया है।
आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत से खुला मामला
यह पूरी कार्रवाई स्थानीय निवासी विकास शर्मा द्वारा आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल पर दर्ज कराई गई शिकायत के बाद अमल में लाई गई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि मेसर्स कुमार औद्योगिक विकास प्रा. लि. नामक इकाई से लगातार काला और जहरीला धुआं निकल रहा है। इस धुएं के कारण आसपास के रिहायशी इलाकों में रहने वाले नागरिकों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है और पूरे क्षेत्र का पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो रहा है।
निरीक्षण में उजागर हुईं तकनीकी खामियां
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एक विशेषज्ञ टीम ने औद्योगिक इकाई का स्थलीय निरीक्षण किया। जांच के दौरान पाया गया कि फैक्ट्री के भीतर भाप उत्पादन के लिए 8 टन प्रति घंटा और 3 टन प्रति घंटा क्षमता के दो बड़े बॉयलर संचालित किए जा रहे थे। इन बॉयलरों में ईंधन के रूप में बायो-ब्रिकेट्स का इस्तेमाल किया जा रहा था, लेकिन उत्सर्जन को नियंत्रित करने वाली प्रणाली पूरी तरह फेल पाई गई।
प्रदूषण नियंत्रण उपकरण मिले खराब
निरीक्षण टीम ने पाया कि फैक्ट्री से निकलने वाली गैसों (Flu Gases) को साफ करने के लिए लगाए गए 'साइक्लोन डस्ट कलेक्टर' और चिमनी की व्यवस्था मानकों के अनुरूप नहीं थी। प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों की कार्यप्रणाली असंतोषजनक पाए जाने पर विभाग ने इसे नियमों का गंभीर उल्लंघन माना है। इसके बाद विभाग ने तत्काल प्रभाव से औद्योगिक इकाई को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।
विभागीय अधिकारियों का कड़ा रुख
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी रोहित सिंह ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि उद्योग को पहले जल एवं वायु अधिनियम के तहत सशर्त संचालन की अनुमति दी गई थी। निरीक्षण में इन शर्तों का उल्लंघन पाया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। स्थानीय निवासियों ने अब मांग की है कि फैक्ट्री से निकलने वाले धुएं पर स्थायी रोक लगाने के लिए विभाग को नियमित निगरानी सुनिश्चित करनी चाहिए।
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