मुगलसराय में नहीं चलेगा बुलडोजर, कार्रवाई पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की रोक, पीड़ित दुकानदारों को मिली बड़ी राहत
चंदौली जिले के मुगलसराय नगर में सड़क चौड़ीकरण के तहत होने वाले ध्वस्तीकरण पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। कोर्ट ने प्रशासन से रिकॉर्ड मांगते हुए चंदौली के डीएम को कड़ी चेतावनी दी है। पूरी खबर पढ़ें।
पीडीडीयू नगर ध्वस्तीकरण पर हाई कोर्ट की रोक
अगली सुनवाई तक नहीं चलेगा कोई बुलडोजर
रिकॉर्ड पेश न करने पर डीएम होंगे तलब
कोर्ट ने सुनवाई के लिए दी 25 मई की तारीख
सड़क चौड़ीकरण से जुड़ा है पूरा मामला
चंदौली जिले के अंतर्गत आने वाले पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर (मुगलसराय) में प्रस्तावित ध्वस्तीकरण की प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर प्रभावित दुकानदारों और स्थानीय व्यापारियों को इलाहाबाद हाई कोर्ट से बहुत बड़ी राहत मिली है। माननीय उच्च न्यायालय ने मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट निर्देश जारी किया है कि अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ताओं के खिलाफ किसी भी प्रकार की कोई भी ध्वस्तीकरण (Demolition) की कार्रवाई अमल में नहीं लाई जाएगी।
"विजय कुमार एवं 21 अन्य" की याचिका पर हुई कोर्ट में सुनवाई
यह महत्वपूर्ण आदेश इलाहाबाद हाई कोर्ट में दायर की गई याचिका “विजय कुमार एवं 21 अन्य बनाम उत्तर प्रदेश सरकार एवं अन्य” की सुनवाई के दौरान आया। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने इस पर विचार किया। खंडपीठ ने राज्य सरकार के अधिवक्ता को कड़े लहजे में निर्देशित किया है कि वे इस पूरे प्रकरण में स्थानीय प्रशासन से आवश्यक दिशा-निर्देश और सभी संबंधित रिकॉर्ड प्राप्त कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करें।
25 मई को अगली सुनवाई, चंदौली डीएम को सख्त चेतावनी
माननीय न्यायालय ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 25 मई 2026 की तारीख निर्धारित की है। इसके साथ ही कोर्ट ने बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि अगली नियत तारीख तक जिला प्रशासन की ओर से आवश्यक निर्देश और संबंधित अभिलेख कोर्ट में पेश नहीं किए गए, तो चंदौली के जिलाधिकारी (डीएम) को स्वयं व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होना पड़ेगा।
सड़क चौड़ीकरण से जुड़ा है पूरा मामला
उल्लेखनीय है कि मुगलसराय नगर का यह पूरा विवाद सड़क चौड़ीकरण और उसके तहत की जाने वाली सरकारी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से जुड़ा हुआ है। प्रशासन के इस कदम से प्रभावित होकर पीड़ित पक्ष ने न्याय के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अदालत के इस नए आदेश के बाद जहां एक तरफ प्रभावित व्यापारियों ने चैन की सांस ली है, वहीं प्रशासनिक बुलडोजर की कार्रवाई पर पूरी तरह ब्रेक लग गया है।
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