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चिकित्सकों को कई चुनौतियों का करना पड़ता है सामना, विधायक व सांसद ने किया संबोधित

चिकित्सकों को मरीजों की देखभाल के साथ-साथ उनके परिवारों से निपटना, दबाव महसूस करना, आधुनिक तकनीक के साथ तालमेल बिठाना, वित्तीय और व्यावसायिक जोखिमों का सामना करना पड़ता है।
 

नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन की पहल

वर्धन हॉस्पिटल में चिकित्सकों की चुनौतियों पर सेमिनार

ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. सुबोध कुमार सिंह ने ऑर्थोप्लास्टी पर दी जानकारी

चंदौली जिले में नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा) के बैनर तले वर्धन हॉस्पिटल में चिकित्सकों के सामने आने वाली चुनौतियों पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। इस सेमिनार का उद्घाटन सांसद विनोद बिंद और विधायक रमेश जायसवाल ने किया। अतिथियों का स्वागत डॉ. विवेक राज सिंह और नीमा सदस्य डॉ. तनु सिंह ने किया।

विधायक ने अपने संबोधन में कहा कि चिकित्सा का पेशा निश्चित रूप से चुनौतियों से भरा है। चिकित्सकों को मरीजों की देखभाल के साथ-साथ उनके परिवारों से निपटना, दबाव महसूस करना, आधुनिक तकनीक के साथ तालमेल बिठाना, वित्तीय और व्यावसायिक जोखिमों का सामना करना पड़ता है।

National Integrated Medical Association

सेमिनार में डॉ. पवन कुमार सिंह (डीएम गैस्ट्रो) ने फैटी लीवर पर बात करते हुए बताया कि जब लीवर में सामान्य से ज्यादा वसा जमा हो जाती है, जो लीवर के कुल वजन के पांच प्रतिशत से ज्यादा होता है, तब फैटी लीवर की समस्या उत्पन्न होती है।

ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. सुबोध कुमार सिंह ने ऑर्थोप्लास्टी के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह एक जोड़ या उसके कुछ हिस्सों को बदलने की सर्जरी है, जिसमें क्षतिग्रस्त हड्डी या उपास्थि को कृत्रिम प्रत्यारोपण से बदला जाता है।

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इस सेमिनार में आरपी सिंह, विकास सिंह, डॉ. एके सिंह, डॉ. मनोज सिंह और डॉ. सत्यपाल यादव भी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. ओपी सिंह ने किया।

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