मुगलसराय में हो सकता है इंदौर जैसा हादसा : जर्जर पाइपलाइनों और खुले नालों के बीच सीवर का खतरा
पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर में जर्जर पाइपलाइनों और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के अभाव में पेयजल व्यवस्था संकट में है। इंदौर की दुखद घटना के बाद जनपद की पोल खुली है, जहाँ खुले नालों के पास से गुजर रही पाइपलाइनें बीमारी का न्योता दे रही हैं।
वर्षों पुरानी जर्जर पेयजल पाइपलाइनें
25 वाडों की दो लाख आबादी संकट में
अब तक एसटीपी का निर्माण नहीं
गंगा में सीधे गिर रहा सीवर का पानी
300 करोड़ का प्रोजेक्ट फाइलों में कैद
मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पेयजल से हुई हालिया घटना के बाद अब उत्तर प्रदेश के चंदौली जनपद की स्वास्थ्य और स्वच्छता व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। मुगलसराय (पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर) सहित जिले की कई नगर पंचायतों में पेयजल आपूर्ति का ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है। वर्षों पुरानी और जर्जर हो चुकी पाइपलाइनों के सहारे दो लाख की आबादी को पानी पिलाया जा रहा है, जिससे कभी भी बड़ी जनहानि हो सकती है।

जर्जर पाइपलाइन और दूषित पानी का खतरा
पीडीडीयू नगर पालिका क्षेत्र के 25 वार्डों में लगभग दो लाख लोग निवास करते हैं। यहाँ पेयजल आपूर्ति के लिए करीब दो दर्जन ओवरहेड टैंक और ट्यूबवेल बनाए गए हैं, लेकिन घरों तक पानी पहुँचाने वाली भूमिगत पाइपलाइनें दशकों पुरानी हैं। इन जर्जर पाइपों में जब पानी का दबाव बढ़ता है, तो वे क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। सकलडीहा और शिकारगंज जैसे क्षेत्रों में हाल ही में पाइप टूटने से गंदा पानी घरों तक पहुँचा था, जिसने प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है।

बिना एसटीपी के गंगा में गिर रहा सीवर
नगर की सबसे बड़ी समस्या सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) का न होना है। बीते पांच वर्षों से एसटीपी निर्माण की बात कागजों में चल रही है, लेकिन धरातल पर अब तक एक ईंट भी नहीं लगी है। शहर से रोजाना लगभग 20-25 एमएलडी (MLD) सीवेज निकलता है, जो बिना किसी ट्रीटमेंट के खुले नालों के माध्यम से सीधे गंगा और अन्य सहायक नदियों में गिर रहा है। यह न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि भूजल को भी प्रदूषित कर रहा है।
300 करोड़ का प्रोजेक्ट टेंडर में अटका
पड़ाव क्षेत्र के रौना में 35 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी निर्माण के लिए करीब 300 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। बावजूद इसके, जमीन अधिग्रहण और टेंडर की जटिल प्रक्रियाओं के कारण यह महत्वपूर्ण योजना अधर में लटकी है। जब तक यह प्लांट नहीं बनता, तब तक नगर का सीवेज खुले नालों और रिहायशी कॉलोनियों की नालियों के भरोसे ही रहेगा।
नगर पालिका का पक्ष और भविष्य की योजना
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी राजीव सक्सेना का दावा है कि जलकल विभाग द्वारा लगातार पाइपलाइनों की निगरानी की जा रही है। जहाँ भी रिसाव की सूचना मिलती है, तत्काल मरम्मत कराई जाती है। उन्होंने बताया कि 'जल जीवन मिशन' के तहत नगरीय इलाकों में नए ओवरहेड टैंक और आधुनिक पाइपलाइन बिछाने का काम तेजी से चल रहा है, जिससे भविष्य में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।
हालांकि, धरातल पर स्थिति चुनौतीपूर्ण है। कॉलोनियों में सीवर और पेयजल की पाइपलाइनें पास-पास होने के कारण संक्रमण का खतरा हमेशा बना रहता है। यदि समय रहते एसटीपी और पाइपलाइनों के आधुनिकीकरण पर ध्यान नहीं दिया गया, तो पीडीडीयू नगर में भी इंदौर जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है।
Tags
चंदौली जिले की खबरों को सबसे पहले पढ़ने और जानने के लिए चंदौली समाचार के टेलीग्राम से जुड़े।*







