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चंदौली-वाराणसी समेत 3 जिलों को बड़ा तोहफा : ₹190 करोड़ की रेल परियोजना से जलमार्ग और रेलमार्ग का होगा महासंगम

पूर्वांचल के व्यापार को वैश्विक स्तर पर चमकाने के लिए जीवनाथपुर से रामनगर बंदरगाह तक नई रेलवे लाइन बिछाई जा रही है। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से जुड़ने के बाद यहाँ जल और रेल परिवहन का अनोखा समन्वय देखने को मिलेगा।

 
 

रामनगर बंदरगाह तक बनेगी रेल लाइन

कुल ₹190 करोड़ का भारी-भरकम बजट

तीन जिलों के 11 गांवों से गुजरेगी

100 एकड़ में बनेगा 'फ्रेट विलेज'

वर्ष 2029 तक पूरा होगा काम

चंदौली जिले को एक और रेल लाइन मिलने वाली है। सरकार के द्वारा उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में जलमार्ग और रेलमार्ग को आपस में एकीकृत (इंटीग्रेट) कर माल परिवहन को एक वैश्विक और आधुनिक गति देने की बड़ी कवायद शुरू हो चुकी है। इस महत्वाकांक्षी रणनीतिक योजना के अंतर्गत चंदौली जनपद के जीवनाथपुर जंक्शन से लेकर वाराणसी के रामनगर (राल्हूपुर) स्थित मल्टीमोडल टर्मिनल (बंदरगाह) तक 5 किलोमीटर से अधिक लंबा एक एकल (सिंगल) रेलवे ट्रैक बिछाया जाएगा।

यह नया रेलवे ट्रैक सीधे तौर पर डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) के मुख्य नेटवर्क से जुड़ेगा। इस बड़े बुनियादी ढांचे के तैयार हो जाने से मालगाड़ियों के जरिए आने वाले बड़े औद्योगिक कंटेनरों को बिना किसी बाधा के सीधे बंदरगाह तक पहुंचाया जा सकेगा। इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य बेहद कम लागत में सुरक्षित, तेज और सुगम माल ढुलाई की व्यवस्था सुनिश्चित करना है, ताकि पूर्वांचल के स्थानीय व्यापारियों और उद्यमियों को देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों तक अपने कारोबार का विस्तार करने में एक बड़ी और ऐतिहासिक सहूलियत मिल सके।

190 करोड़ रुपये का बजट जारी करके 2029 तक काम पूरा करने का लक्ष्य
इंडियन पोर्ट रेल एंड रोप-वे कॉरपोरेशन लिमिटेड (IPRCL) की देखरेख में संचालित की जा रही इस बेहद महत्वपूर्ण परियोजना को आगामी तीन वर्षों के भीतर पूरी तरह से धरातल पर उतारने का लक्ष्य रखा गया है। रेलवे अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस 5.11 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन के निर्माण के लिए आवश्यक भूमि के अधिग्रहण और उसकी रजिस्ट्री का काम प्रशासनिक स्तर पर काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

इस पूरी ढांचागत परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए कुल 190 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया है, जिसका पूरा वित्तीय विवरण इस प्रकार है:--

1- रेलवे ट्रैक और इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण: परियोजना के तहत लगभग 130 करोड़ रुपये केवल रेलवे ट्रैक बिछाने, सिग्नलिंग और आवश्यक आधारभूत संरचना के तकनीकी विकास पर खर्च किए जाएंगे।

2- भूमि खरीद और रजिस्ट्री: करीब 60 करोड़ रुपये की बड़ी राशि किसानों से जमीन खरीदने, रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी करने और प्रभावित भू-स्वामियों को उचित मुआवजा वितरित करने के लिए सुरक्षित रखी गई है।

भूमि अधिग्रहण की स्थिति और किसानों को मुआवजा वितरण
परियोजना के रूट मैप के अनुसार तय की गई कुल 35 हेक्टेयर आवश्यक भूमि में से अब तक लगभग 20 हेक्टेयर भूमि की रजिस्ट्री की कानूनी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। इसके समानांतर, परियोजना से प्रभावित होने वाले स्थानीय किसानों को मुआवजा राशि के वितरण का कार्य भी युद्धस्तर पर जारी है, जिसके अंतर्गत कुल तय मुआवजे का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा किसानों के बैंक खातों में भेजा जा चुका है। प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि प्रभावित होने वाले सभी परिवारों को नियमानुसार उचित वित्तीय मुआवजा और अन्य जरूरी सुविधाएं पारदर्शिता के साथ प्रदान की जा रही हैं।

वाराणसी, चंदौली और मीरजापुर के 11 गांवों से होकर गुजरेगी ट्रेन
यह नई और आधुनिक रेलवे लाइन पूर्वांचल के तीन आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण जिलों क्रमशः वाराणसी, चंदौली और मिर्जापुर के कुल 11 ग्रामीण क्षेत्रों से होकर अपनी दूरी तय करेगी। इस रेल मार्ग के दायरे में आने वाले मुख्य गांव इस प्रकार निर्धारित किए गए हैं:---

1- वाराणसी जिला: इसके अंतर्गत मुख्य रूप से राल्हूपुर और टेंगरा गांव शामिल हैं।

2- चंदौली जिला: यहाँ से ताहिरपुर, हमीरपुर और पटनवा गांव को शामिल किया गया है।

3- मिर्जापुर जिला: इस क्षेत्र से बरईपुर और गोरखपुर सहित कुछ अन्य गांवों की भूमि ली जा रही है।

आधिकारिक कार्ययोजना के अनुसार, वर्ष 2029 के अंत तक इस बंदरगाह को पूरी तरह क्रियाशील करते हुए भारतीय रेलवे के मुख्य नेटवर्क से जोड़ दिया जाएगा।

100 एकड़ के दायरे में विकसित होगा हाईटेक 'फ्रेट विलेज'
इस व्यापक रेल कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट के साथ ही रामनगर बंदरगाह के ठीक समीप लगभग 100 एकड़ की विस्तृत और सुरक्षित भूमि पर एक अत्याधुनिक 'फ्रेट विलेज' (Freight Village) को बसाने की भी एक समानांतर योजना है। इस विशेष परिसर की सबसे बड़ी खूबी यह होगी कि यहाँ माल की लोडिंग-अनलोडिंग, वेयरहाउसिंग (भंडारण), उन्नत परिवहन प्रबंधन और वैश्विक स्तर की लॉजिस्टिक्स सेवाएं व्यापारियों को एक ही परिसर के भीतर उपलब्ध हो सकेंगी। इससे परिवहन के अलग-अलग साधनों (सड़क, रेल और जल) के बीच एक आदर्श समन्वय स्थापित होगा और मुख्य राजमार्गों पर लगने वाले हैवी ट्रैफिक जाम की समस्या से भी हमेशा के लिए निजात मिल सकेगी।

मुख्य महाप्रबंधक का ऐसा है दावा
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) डीडीयू यूनिट के मुख्य महाप्रबंधक अतुल कुमार ने इस ऐतिहासिक कदम के महत्व को रेखांकित करते हुए स्पष्ट कहा है कि डीएफसी वर्तमान समय में देश के भीतर माल ढुलाई का सबसे सुगम, किफायती और तीव्र माध्यम बनकर उभर रहा है, जिसका सीधा और बड़ा लाभ बड़ी औद्योगिक इकाइयों को मिल रहा है। अब डीएफसी के मजबूत नेटवर्क को सीधे जलमार्ग के रामनगर बंदरगाह से जोड़ने की दिशा में तेजी से काम शुरू कर दिया गया है। हमारा मुख्य उद्देश्य जल और रेल परिवहन के बीच एक ऐसा अभेद्य और मजबूत समन्वय स्थापित करना है जिससे व्यापारिक लागत में बड़ी कटौती की जा सके।

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