जमीन अधिग्रहण के खिलाफ चंदौली में गरजा जनाक्रोश, समाजवादी नेता रीबू श्रीवास्तव ने ग्रामीणों को दिया समर्थन
फ्रेट विलेज और बंदरगाह परियोजना के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध तेज
रीबू श्रीवास्तव ने आंदोलनरत ग्रामीणों से की मुलाकात
समाजवादी महिला सभा की प्रदेश अध्यक्ष ने जताई हरसंभव मदद की प्रतिबद्धता
चंदौली जिले में फ्रेट विलेज और बंदरगाह परियोजना के नाम पर ग्रामीणों की जमीन जबरन अधिग्रहण करने के विरोध में चल रहे आंदोलन ने मंगलवार को एक नया मोड़ ले लिया। समाजवादी महिला सभा की प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री रीबू श्रीवास्तव ने मिल्कीपुर, ताहीरपुर, रसूलागंज और छोटा मिर्जापुर गांवों का दौरा कर आंदोलनरत ग्रामीणों से मुलाकात की और उनके संघर्ष को पूर्ण समर्थन देने की बात कही।
रीबू श्रीवास्तव ने कहा कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पहले ही साफ कर चुके हैं कि पार्टी इस जनसंघर्ष में पूरी तरह ग्रामीणों के साथ है। उन्होंने 28 जून को प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह ऐलान किया था और उसी क्रम में वह आज ग्रामीणों के बीच पहुंचीं हैं।

“जान देंगे पर जमीन नहीं देंगे” – महिलाओं का ऐलान
इस मौके पर बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हुईं और उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे अपनी पुश्तैनी जमीन किसी भी कीमत पर नहीं देंगी। उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाया कि उनकी सहमति के बिना जबरन अधिग्रहण किया जा रहा है, जो पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। ग्रामीणों ने कहा कि वे अंतिम सांस तक अपनी जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष करते रहेंगे।
ईशान मिल्की ने जताया आभार
कार्यक्रम का संचालन कर रहे ईशान मिल्की ने गांव की ओर से समाजवादी पार्टी, अखिलेश यादव और रीबू श्रीवास्तव का आभार जताया। उन्होंने कहा कि पार्टी की ओर से मिले समर्थन ने गांववालों को नई ऊर्जा और भरोसा दिया है।

सैकड़ों ग्रामीणों की रही उपस्थिति
कार्यक्रम में डब्लू साहनी, वीरेंद्र साहनी, मास्टर विद्याधर, विनय मौर्य, चंद्रप्रकाश मौर्य, आस मोहम्मद, आफताब अहमद, परवेज अहमद, प्रोफेसर फखरुद्दीन, इस्माइल, शंकर साहनी, नफीस मिल्की, शीतल साहनी, सुरेश कुमार, पोत्तन साहनी, गुड्डू साहनी, मुन्नी देवी, धन मनी देवी, सरस्वती देवी, छाया देवी, रीता देवी, मुन्ना सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।

रीबू श्रीवास्तव ने दिया संघर्ष का भरोसा
ग्रामीणों को संबोधित करते हुए रीबू श्रीवास्तव ने कहा कि जमीन हमारे अस्तित्व, जीवन और संस्कृति की पहचान है। जब तक ग्रामीणों को न्याय नहीं मिलेगा, समाजवादी पार्टी एक-एक कदम उनके साथ चलेगी। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ जमीन की नहीं, बल्कि हक और सम्मान की है।
ग्रामीणों का यह आंदोलन अब सिर्फ एक क्षेत्रीय विरोध नहीं रह गया, बल्कि यह किसानों और आम नागरिकों के भूमि अधिकार की व्यापक आवाज बनता जा रहा है। समाजवादी पार्टी का सक्रिय समर्थन मिलने के बाद आंदोलन को नई ताकत मिली है और ग्रामीण अब और अधिक संगठित होकर अपने अधिकारों के लिए लड़ने को तैयार हैं।
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