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सेंट मैरी स्कूल हिनौली में 'चंदा वसूली' का खेल! बच्चों को थमाई गई ₹20 की पर्ची, अभिभावकों ने SDM से की शिकायत

चंदौली जिले के मुगलसराय इलाके के सेंट मैरी स्कूल हिनौली पर बच्चों से ₹20 की पर्ची थमाकर 'बाल मेला' के नाम पर चंदा वसूली का आरोप लगा है। आक्रोशित अभिभावकों ने इसे मानसिक दबाव बताते हुए शिकायती पत्र सौंपा है।
 

सेंट मैरी स्कूल हिनौली में चंदा वसूली

बच्चों से 20 रुपये की पर्ची थमाकर हो रही वसूली
 

अभिभावकों ने एसडीएम को शिकायत सौंपी
 

उच्च फीस वसूली और नया चार्ज
 

शिक्षा के व्यवसाय की जगह पैसे की वसूली का आरोप

चंदौली जिले के पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर (पूर्व में मुगलसराय) के हिनौली स्थित सेंट मैरी स्कूल एक बार फिर गंभीर विवादों के घेरे में है। इस बार मामला स्कूल प्रशासन द्वारा बच्चों को ₹20 की 'पर्ची' थमा कर उनसे 'चंदा' इकट्ठा करवाने का है। स्कूल प्रशासन इसे "बाल मेला" के नाम पर बताकर यह दावा कर रहा है कि इससे जमा होने वाली राशि का उपयोग गरीब बच्चों की शिक्षा में मदद के लिए किया जाएगा। हालांकि, अभिभावक इस पर गहरा आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं और उनका कहना है कि यह बच्चों पर अनावश्यक मानसिक दबाव बनाने और शिक्षा को व्यवसाय बनाने का एक तरीका है।

अत्यधिक फीस के बावजूद चंदा वसूली का आरोप
अभिभावकों का कहना है कि यह चंदा वसूली उन छात्रों से करवाई जा रही है, जिनके माता-पिता पहले से ही स्कूल की उच्च फीस और आए दिन लगाए जाने वाले नए-नए शुल्कों से परेशान हैं। अभिभावकों का तर्क है कि यदि स्कूल वास्तव में गरीब बच्चों की शिक्षा में सहायता करना चाहता है, तो उसे अपनी फीस कम करनी चाहिए या गरीब बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देनी चाहिए। ऐसा करने के बजाय छोटे बच्चों के हाथों में पर्ची पकड़ा कर उनसे पैसे जमा करवाना कितना उचित है, इस बात पर अभिभावकों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

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मुगलसराय का वसूली करने वाला स्कूल

अभिभावकों ने आरोप लगाया कि जब भी वे किसी शिकायत या फीस संबंधी मुद्दे पर स्कूल प्रशासन से बात करते हैं, तो उन्हें तुरंत "स्कूल की नीति" का हवाला देकर चुप करा दिया जाता है। उनकी मांग है कि गरीब बच्चों की शिक्षा की नैतिक जिम्मेदारी सबसे पहले स्कूल की होनी चाहिए, न कि छोटे बच्चों के माध्यम से समाज से चंदा इकट्ठा करने की।

बच्चों पर मानसिक दबाव और गलत शिक्षा का माहौल
इस 'चंदा वसूली' के तरीके से बच्चों पर पड़ रहे मनोवैज्ञानिक दबाव पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। कई बच्चे जो अभी 'समझ' की उम्र में हैं, उन्हें माता-पिता या बाहर के लोगों से पैसे मांगने में असहजता महसूस हो रही है। कुछ छात्र तो माता-पिता की नाराजगी के डर से पर्ची घर ले जाने से भी कतरा रहे हैं।

अभिभावकों का मानना है कि शिक्षा का असली उद्देश्य बच्चों को ज्ञान, समझ और संस्कार देना है, न कि उन्हें चंदा वसूलना सिखाना। यह तरीका बच्चों को सही दिशा देने के बजाय उनमें गलत शिक्षा का माहौल पैदा कर रहा है।

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मुगलसराय के स्कूल द्वारा ड्रॉ के नाम पर वसूली करने के लिए दी गयी रसीद

लगातार विवादों में घिरा रहता है स्कूल
सेंट मैरी स्कूल हिनौली पहले भी कई मौकों पर चर्चा में रहा है। उच्च फीस वसूली, अभिभावकों की शिकायतों की पूर्ण अनदेखी, और बच्चों पर अनावश्यक नियम-कानूनों का दबाव जैसे मुद्दों को लेकर स्कूल हमेशा विवादों में रहा है। अभिभावकों का कहना है कि यह नया मामला उनके धैर्य की अंतिम सीमा है।

अभिभावकों ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि:--

  • बच्चों को चंदा वसूली जैसे कामों में शामिल न किया जाए।
  • स्कूल की फीस संरचना को पारदर्शी और उचित बनाया जाए।
  • गरीब बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी स्कूल खुद अपने संसाधनों से ले।
  • बच्चों की मनोवैज्ञानिक स्थिति का ध्यान रखा जाए।

एसडीएम को सौंपा गया शिकायती पत्र
इस पूरे मामले को लेकर अभिभावकों में अत्यधिक आक्रोश है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि यदि स्कूल प्रशासन इस अनुचित प्रथा को तुरंत नहीं रोकता है, तो वे मजबूरन आगे आंदोलन और कानूनी कदम उठाने के लिए बाध्य होंगे। इस विवाद को प्रशासन के संज्ञान में लाने के लिए मुगलसराय (पीडीडीयू नगर) के लोगों ने उपजिलाधिकारी (एसडीएम) को एक लिखित शिकायती पत्र भी सौंपा है, जिसमें स्कूल पर तत्काल एक्शन लेने की अपील की गई है।

यदि कोई शिक्षण संस्थान अपनी उच्च फीस और कठोर नीतियों को बनाए रखता है, और साथ ही बच्चों के हाथों से चंदा भी इकट्ठा करवाता है, तो यह कृत्य शिक्षा की परिभाषा में नहीं, बल्कि सीधे तौर पर "व्यवसाय" की परिभाषा में आता है। ऐसे में स्कूलों पर निगरानी व कार्रवाई की जरुरत है।

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