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विश्व आदिवासी दिवस पर चंदौली का नाम बदलने की मांग, महारानी दुर्गावती के नाम पर रखने की उठी मांग

विश्व आदिवासी दिवस पर चंदौली के चकिया और मुगलसराय में पारंपरिक वेशभूषा व तीर-धनुष के साथ भव्य जागरूकता जुलूस निकाला गया। सभा में वनाधिकार देने और चंदौली का नाम बदलकर महारानी दुर्गावती रखने समेत 9 सूत्रीय मांगें उठीं।

 
 

विश्व आदिवासी दिवस पर निकला भव्य जुलूस

चकिया त्रिमुहानी से शुरू हुई यात्रा

तीर-धनुष और पारंपरिक वेशभूषा में दिखे लोग

जल-जंगल-जमीन और वनाधिकार का उठा मुद्दा

चंदौली का नाम महारानी दुर्गावती रखने मांग

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर चंदौली जिले में बेहद उत्साह और सांस्कृतिक रंगों के साथ भव्य जागरूकता जुलूस निकाला गया। चकिया तहसील स्थित त्रिमुहानी से जुलूस का शुभारंभ किया गया, जिसे सांसद प्रतिनिधि बबलू सिंह और विधायक प्रभु नारायण सिंह यादव ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस जुलूस में सैकड़ों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए।


पारंपरिक वेशभूषा और तीर-धनुष के साथ दिखाई सांस्कृतिक झलक
जुलूस के दौरान आदिवासी समाज के लोग अपनी पारंपरिक वेशभूषा, ढोल-नगाड़ों और हाथ में तीर-धनुष लेकर शामिल हुए, जिससे पूरी सड़क पर आदिवासी संस्कृति की जीवंत झलक देखने को मिली। इसी तरह मुगलसराय में भी विश्व आदिवासी दिवस पर भव्य जागरूकता जुलूस निकाला गया। मुगलसराय विधानसभा के पूर्व सपा प्रत्याशी चंद्रशेखर यादव भी इस जुलूस में शामिल हुए और समाज का उत्साह बढ़ाया।

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सुभाष पार्क में सभा, जल-जंगल-जमीन और वनाधिकार की गूंज
जुलूस चकिया के सुभाष पार्क पहुंचकर एक बड़ी सभा में तब्दील हो गया। सभा के दौरान वक्ता संतोष समेत अन्य वक्ताओं ने जल, जंगल और जमीन के अधिकारों को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने गोंड, खरवार, चेरो, पनिका और बैगा समेत अन्य जनजातीय समाजों को उनके वनाधिकार देने पर जोर दिया। इस दौरान समाज के महापुरुषों के बलिदान को याद करते हुए अधिकारों की लड़ाई को आगे जारी रखने का संकल्प लिया गया।

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चंदौली का नाम महारानी दुर्गावती के नाम पर रखने समेत 9 सूत्रीय मांगें
सभा में आदिवासी समाज ने सरकार के सामने अपनी 9 सूत्रीय मांगों का पत्र रखा। इसमें सबसे प्रमुख मांग चंदौली जिले का नाम बदलकर वीरांगना 'महारानी दुर्गावती' के नाम पर रखने की रही। इसके अलावा वन भूमि पर काबिज आदिवासियों को पट्टा देने, मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने और संवैधानिक अधिकारों को पूर्ण रूप से लागू करने की मांग उठाई गई।

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