मौसम बदलते ही, कुत्ते हुए खूंखार : 13 गांवों में 26 लोगों को बना चुके हैं शिकार

नौगढ़ में पागल कुत्तों का आतंक जारी
13 गांवों में अब तक 26 लोगों को काटने की मिली शिकायत
आने जाने वालों पर सीधे कर देते हैं हमला
डॉक्टरों ने दी कुत्तों से सावधना रहने की चेतावनी
चंदौली जिले में सोमवार की सुबह नौगढ़ के 13 गांवों में जो हुआ, उसने हर किसी के रोंगटे खड़े कर दिए। खूंखार कुत्तों के झुंड ने 26 लोगों पर हमला कर दिया। चीख पुकार पुकार मच गई, लोग इधर-उधर, भागने लगे, लेकिन बच नहीं सके। अस्पताल में भर्ती घायलों की हालत देखकर डॉक्टर भी हैरान हैं। आखिर ये कुत्ते इतने आक्रामक क्यों हो रहे हैं?

चंदौली जिले के तहसील नौगढ़ में 13 गांवों में पागल कुत्तों ने आतंक मचा दिया है। सोमवार को दिनदहाड़े 26 ग्रामीणों को काटकर बुरी तरह घायल कर दिया। अचानक हुए इन हमलों से पूरे इलाके में दहशत फैल गई। घबराए ग्रामीण लाठी-डंडे लेकर सड़कों पर उतर आए, लेकिन खूंखार कुत्तों का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा।
घायल ग्रामीणों को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) नौगढ़ ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनका इलाज किया।

बताया जा रहा है कि सिर्फ दो घंटे में 26 घायलों को एंटी रेबीज और टिटनेस (टीटी) का इंजेक्शन लगाया गया। डॉक्टरों ने भी इतनी बड़ी संख्या में एक साथ कुत्ते के काटने के मामलों को चौंकाने वाला बताया।
घायलों की लंबी लिस्ट, गांवों में दहशत
✅ जनकपुर: त्रिलोकी
✅ बाघी: योगेंद्र, सूरज
✅ अमदहां चरनपुर: विमल, राजनाथ
✅ मंगरही: चंद्रप्रकाश
✅ जयमोहनी: सुगंधा, आयुष, अमृत
✅ मझगांवा: रंभा
✅ बजरडीहा: अरविंद, चमेली, सुरेंद्र
✅ बसौली: सुशीला, प्रियवंती
✅ मलेवर: अनीता, फुलवंती
✅ मझगाई: आदर्श
✅ सोनवार: शिवशरण
✅ मरवटिया: अशोक
✅ डुमरिया: पंकज, आकाश
✅ नर्वदापुर: आर्यन
✅ खटखरी (गंगापुर): सावित्री
मौसम का बदलाव कुत्ते हो रहे हैं आक्रामक
सीएचसी अधीक्षक डॉक्टर अवधेश पटेल ने चंदौली समाचार को बताया कि मौसम में बदलाव की वजह से कुत्ते अधिक आक्रामक हो गए हैं। उन्होंने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी और कहा कि कुत्ते के भौंकने पर भागने की गलती न करें, क्योंकि इससे वे और आक्रामक होकर हमला कर सकते हैं।
समय पर इलाज नहीं तो बढ़ सकता है संक्रमण
चिकित्सकों ने घायलों को समझाया है कि अगर पागल कुत्ते का इलाज समय पर न किया जाए, तो रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी हो सकती है। इसके लिए तीन डोज लगते हैं:
-पहला इंजेक्शन तुरंत
-दूसरा तीसरे दिन
-तीसरा सातवें दिन
कहा जाता है कि रेबीज के मामले में अगर समय पर इलाज नहीं मिला, तो संक्रमण जानलेवा भी हो सकता है।
लगातार हो रहे हमलों से गांवों में दहशत का माहौल है। ग्रामीण अपने बच्चों को बाहर भेजने से भी डर रहे हैं। लोग प्रशासन से आवारा और पागल कुत्तों को पकड़ने की मांग कर रहे हैं।
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