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सांसद छोटेलाल खरवार बोले- ये अंग्रेजों का शासन है क्या?, बिना नोटिस रोटावेटर चलाना दमनकारी

नौगढ़ तहसील के भरदुआ में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई पर सोनभद्र सांसद कुंवर छोटेलाल खरवार ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने बिना नोटिस फसल रौंदने का आरोप लगाते हुए दोषियों पर कार्रवाई और पीड़ितों के लिए मुआवजे की मांग की है।

 
 

भरदुआ में फसल रौंदने पर सांसद का हमला

'अंग्रेजों का शासन है क्या' बोले सांसद छोटेलाल

बिना नोटिस और बातचीत चला रोटावेटर

घायल ग्रामीणों के इलाज और मुआवजे की मांग

मामला संसद तक ले जाने की सांसद की चेतावनी

चंदौली जिले में जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग के निर्देश पर तहसील नौगढ़ के भरदुवा में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अब सिर्फ प्रशासन और ग्रामीणों के बीच का जमीनी विवाद नहीं रह गई है, बल्कि इसने पूरी तरह सियासी रंग ले लिया है। वन विभाग और पुलिस-प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद सोनभद्र के सांसद कुंवर छोटेलाल खरवार मैदान में उतर आए हैं और उन्होंने जिला प्रशासन की कार्यशैली पर सीधा व तीखा हमला बोला है।

‘बिना नोटिस और बातचीत के चला दिया रोटावेटर’

प्रशासनिक कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताते हुए सांसद कुंवर छोटेलाल ने सवाल दागा कि “क्या अब देश में अंग्रेजों का शासन आ गया है?” उन्होंने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गरीब आदिवासियों और किसानों की महीनों की मेहनत से तैयार खड़ी फसल पर बिना कोई पूर्व सूचना या नोटिस दिए और बिना कोई बातचीत किए सीधे रोटावेटर चलाकर उसे पूरी तरह नष्ट कर दिया गया। सांसद ने साफ शब्दों में कहा कि प्रशासन ने गांव में जाकर तांडव मचाया है।


‘गरीबों को कुचलकर नहीं बचाई जा सकती वन भूमि’

सांसद ने स्पष्ट किया कि वह वन भूमि की रक्षा करने के फैसले के खिलाफ नहीं हैं और जंगलों को बचाना बेहद जरूरी है, लेकिन गरीबों व किसानों की फसल को रौंदकर और दमनकारी नीतियां अपनाकर इस समस्या का सही समाधान नहीं निकाला जा सकता। उन्होंने कहा कि सरकार और स्थानीय प्रशासन को कार्रवाई करने से पहले प्रभावित होने वाले गरीब परिवारों के रहने और उनकी वैकल्पिक व्यवस्था पर गंभीरता से विचार करना चाहिए था।


लाठीचार्ज का आरोप और अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

सांसद ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान महिलाओं और बुजुर्गों पर लाठियां चलाई गईं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस दौरान वन विभाग के गार्ड और लेखपाल भी घायल हुए हैं, जिसका उन्हें बेहद दुख है। उन्होंने कहा कि विवाद का हल बातचीत से होना चाहिए था। सांसद ने मांग की है कि घटना में घायल सभी लोगों का सही इलाज हो, फसल नुकसान का मुआवजा मिले और दोषी अधिकारियों पर जांच बैठाकर सख्त कार्रवाई की जाए।

संसद में गूंजेगा भरदुआ का मुद्दा

सांसद कुंवर छोटेलाल ने चेतावनी दी है कि यह मामला सिर्फ भरदुआ तक सीमित नहीं रहेगा और वे इस दमनकारी कार्रवाई की आवाज को संसद के पटल तक ले जाएंगे। उनके इस कड़े रुख के बाद अब यह पूरा घटनाक्रम एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन सांसद की इन मांगों का कोई लिखित जवाब देता है या इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच शुरू की जाती है।

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