घर में सो रही दो मासूम बच्चियों पर बिल्लियों का खूनी हमला, चेहरे पर किए गहरे जख्म
नौगढ़ के रिठिया गांव में सो रही दो मासूम बच्चियों पर बिल्लियों ने हमला कर लहूलुहान कर दिया। अस्पताल जाने के बजाय परिजन घंटों झाड़-फूंक के चक्कर में फंसे रहे, जिससे बच्चियों की स्थिति गंभीर हो गई। अंततः उन्हें सीएचसी नौगढ़ में भर्ती कराया गया।
सो रही मासूम बच्चियों पर बिल्लियों का हमला
अंधविश्वास के कारण झाड़-फूंक में समय बर्बाद
चेहरे और नाक पर बिल्लियों ने किए गहरे घाव
सीएचसी नौगढ़ में बच्चियों का उपचार शुरू
एंटी-रेबीज इंजेक्शन न लगवाना हो सकता है जानलेवा
चंदौली जनपद के तहसील नौगढ़ अंतर्गत रिठिया गांव में गुरुवार सुबह एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। यहाँ घर में सो रही दो मासूम बच्चियों पर आवारा बिल्लियों ने अचानक हमला कर उन्हें बुरी तरह लहूलुहान कर दिया। हालांकि, इस दर्दनाक हादसे के बाद परिजनों की एक बड़ी लापरवाही भी सामने आई। वे बच्चियों को तत्काल डॉक्टर के पास ले जाने के बजाय घंटों झाड़-फूंक के चक्कर में पड़े रहे, जिससे बच्चों की स्थिति और अधिक नाजुक हो गई।
दूध पीकर सो रही थीं मासूम, तभी हुआ हमला
जानकारी के अनुसार, रिठिया गांव निवासी सगे भाई संदीप और दीपक की बेटियां—4 माह की श्रेया और 3 माह की प्रिया—घर के अंदर सो रही थीं। सुबह उनकी मां ने उन्हें दूध पिलाकर सुलाया था और खुद घरेलू कामों में व्यस्त हो गई थी। इसी बीच घर में घुसी हिंसक बिल्लियों ने दोनों बच्चियों के चेहरों पर हमला बोल दिया। बच्चियों के चीखने की आवाज सुनकर जब परिजन कमरे में पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर दंग रह गए। मासूमों के गाल, नाक और चेहरे से खून बह रहा था और बिल्लियों के दांतों के गहरे निशान थे।
अंधविश्वास की भेंट चढ़ा कीमती समय
हादसे के तुरंत बाद परिजनों को अस्पताल जाना चाहिए था, लेकिन वे अंधविश्वास के जाल में फंस गए। गांव की एक बुजुर्ग महिला की सलाह पर परिजन बच्चियों को लेकर पड़ोसी जिले सोनभद्र के पकरहट गांव पहुंच गए। वहां घंटों तक एक तांत्रिक के पास झाड़-फूंक का खेल चलता रहा। इस दौरान न तो बच्चियों का दर्द कम हुआ और न ही खून का बहना रुका। धीरे-धीरे मासूमों के चेहरे पर सूजन बढ़ने लगी और संक्रमण का खतरा गहराने लगा।
सीएचसी नौगढ़ में इलाज शुरू, डॉक्टरों ने दी चेतावनी
जब स्थिति पूरी तरह बिगड़ने लगी, तब परिजनों की नींद खुली और वे आनन-फानन में बच्चियों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) नौगढ़ लेकर पहुंचे। अस्पताल में तैनात चिकित्सक डॉ. नीरज कुमार ने तत्काल स्थिति को संभाला। उन्होंने बच्चियों के घावों की सफाई कराई और उन्हें एंटी-रेबीज का पहला डोज लगाया।
डॉ. नीरज कुमार ने इस मामले पर सख्त लहजे में कहा कि कुत्ते या बिल्ली के काटने पर झाड़-फूंक कराना जानलेवा साबित हो सकता है। समय पर एंटी-रेबीज इंजेक्शन न लगने से 'रेबीज' जैसा घातक संक्रमण फैल सकता है, जिसका कोई इलाज नहीं है। उन्होंने बताया कि बच्चियों को अब नियमानुसार तीन-तीन दिन के अंतराल पर अगले डोज दिए जाएंगे ताकि उनकी जान पूरी तरह सुरक्षित रहे। फिलहाल दोनों बच्चियों का उपचार जारी है।
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