नौगढ़ में मिशन शक्ति फेल : 3 बार तहरीर के बाद भी FIR नहीं, न्याय के लिए CO दफ्तर पहुंची विधवा महिला
चकरघट्टा थाना क्षेत्र में विधवा महिला की बहुओं से घर में घुसकर छेड़खानी का मामला सामने आया है। तीन बार तहरीर के बावजूद एफआईआर दर्ज न होने पर पीड़िता ने CO से गुहार लगाई और न्याय न मिलने पर आत्मदाह की चेतावनी दी।
नौगढ़ के परसहवा गांव में छेड़खानी
तीन बार तहरीर फिर भी FIR नहीं
न्याय न मिलने पर आत्मदाह चेतावनी
चकरघट्टा पुलिस की कार्यशैली पर सवाल
क्षेत्राधिकारी देवेंद्र कुमार ने दिए जांच आदेश
प्रदेश में मुख्यमंत्री से लेकर पुलिस मुख्यालय तक महिला सुरक्षा, सम्मान और 'मिशन शक्ति' के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। हालांकि, चन्दौली जनपद के नौगढ़ सर्किल अंतर्गत चकरघट्टा थाना क्षेत्र से सामने आई घटना इन दावों की पोल खोल रही है।
परसहवा गांव की एक विधवा महिला का गंभीर आरोप है कि दबंग रात में घर में घुसकर उनकी बहुओं के साथ छेड़खानी और मारपीट करते हैं। पीड़िता ने चकरघट्टा थाने में तीन बार लिखित तहरीर दी, लेकिन पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया।

घर में घुसकर बदसलूकी और धमकी देने का आरोप
पीड़ित महिला फरमीना के अनुसार, बरवाडीह गांव का एक युवक वेल्डिंग का काम करने के बहाने उनके घर आता-जाता है। आरोप है कि वह रात के अंधेरे में जबरन घर में घुसकर बहुओं के साथ अश्लील हरकतें और छेड़खानी करता है। जब परिवार के लोग इसका विरोध करते हैं, तो आरोपी गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकी देता है। पीड़िता लगातार न्याय के लिए थाने का चक्कर काटती रही, लेकिन थाने स्तर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
न्याय न मिलने पर पीड़िता ने दी आत्मदाह की चेतावनी
थाने से निराश होकर मंगलवार को पीड़िता क्षेत्राधिकारी (CO) कार्यालय पहुंची और अपना दुखड़ा सुनाया। पीड़िता ने सौंपे गए प्रार्थना पत्र में स्पष्ट लिखा है कि यदि उसे और उसके परिवार को न्याय नहीं मिला, तो वह आत्मदाह करने को मजबूर होगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्राधिकारी देवेंद्र कुमार ने निष्पक्ष जांच कराने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

महिला हेल्पलाइन और मिशन शक्ति के दावों की परीक्षा
यह मामला स्थानीय पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जब शासन की ओर से महिला अपराधों पर तत्काल कार्रवाई के सख्त निर्देश हैं, तब तीन बार तहरीर मिलने के बाद भी एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई?
क्या महिला सुरक्षा के अभियान केवल विज्ञापनों तक सीमित हैं? अब देखना यह होगा कि जिला पुलिस अधीक्षक इस मामले का संज्ञान लेकर लापरवाह पुलिसकर्मियों पर गाज गिराते हैं या पीड़िता को फिर आश्वासन से ही संतोष करना पड़ेगा।
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