चंदौली समाचार की खबर से हड़कंप: वन विभाग पहुंचा थाना, रमाशंकर सिंह यादव को व्हाट्सएप पर थमाया नोटिस
चंदौली वन विभाग में कथित अवैध वसूली की खबर के बाद हड़कंप मच गया है। डीएफओ ने आरोप लगाने वाले संघ के अध्यक्ष को व्हाट्सएप पर नोटिस भेजकर 3 दिन में सबूत मांगे हैं, वहीं थाने में शिकायत भी दर्ज कराई है।
चंदौली वन विभाग में वसूली आरोपों पर डीएफओ का कड़ा पलटवार
दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष को सबूत देने का अंतिम अल्टीमेटम
प्रशासनिक अधिकारी पर लगे आरोपों को विभाग ने बताया तथ्यहीन और मनगढ़ंत
रामनगर थाने में संघ के तथाकथित पदाधिकारी के खिलाफ कानूनी तहरीर
3 दिनों के भीतर साक्ष्य न देने पर शिकायतकर्ताओं की साख पर संकट
क्या वन विभाग में चल रहे वसूली के खेल के आरोप सच हैं या फिर अब सच को साबित करने की असली परीक्षा शुरू हो चुकी है? 'चंदौली समाचार' पर वन विभाग के भीतर चल रही कथित अवैध वसूली की खबर जैसे ही सामने आई, पूरे महकमे में खलबली मच गई। खबर का असर यह हुआ कि विभाग ने अब बेहद आक्रामक रुख अपना लिया है। काशी वन्य जीव प्रभाग, रामनगर के प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) ने सीधा मोर्चा खोलते हुए आरोप लगाने वाले संघ को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
डीएफओ ने इस मामले में दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष को सीधे व्हाट्सएप पर एक कड़ा नोटिस थमा दिया है। इस नोटिस के जरिए साफ कह दिया गया है कि या तो तीन दिनों के भीतर आरोपों के पक्के सबूत दो, या फिर झूठे आरोप लगाने के अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहो। इतना ही नहीं, यह पूरा मामला अब सिर्फ विभागीय नोटिस तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि रामनगर थाने तक पहुंच चुका है, जिससे हड़कंप और बढ़ गया है।

डीएफओ का कड़ा रुख: सीधे पूछा, आखिर कहां हैं सबूत?
बीती 22 जून को 'चंदौली समाचार' में खबर छपने के महज एक घंटे के भीतर ही वन विभाग ने अपना पलटवार पत्र तैयार कर लिया। व्हाट्सएप के जरिए भेजे गए इस आधिकारिक पत्र में डीएफओ बी. शिवशंकर ने दो टूक शब्दों में कहा है कि प्रधान सहायक और प्रशासनिक अधिकारी रामानंद सिंह यादव पर जो भी अवैध वसूली के आरोप लगाए गए हैं, वे पूरी तरह से झूठे, मनगढ़ंत और बिना किसी आधार के लगते हैं।
डीएफओ के इस कड़े पत्र में साफ लिखा है कि शिकायत करने वाले पक्ष को पहले भी कई बार दफ्तर बुलाकर बातचीत करने और साक्ष्य पेश करने का मौका दिया गया था। इसके बावजूद, अब तक विभाग को कोई भी ऐसा दस्तावेज, ऑडियो रिकॉर्डिंग, वीडियो या दूसरा ठोस सबूत नहीं दिया गया जिससे आरोपों की पुष्टि हो सके। अब विभाग ने इसे आखिरी मौका मानते हुए तीन दिन की मोहलत दी है। इसे सीधे तौर पर 'सबूत पेश करो या अपनी गलती मानो' की चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
थाने पहुंची शिकायत, कर्मचारी संघ के अध्यक्ष पर कसता शिकंजा
डीएफओ दफ्तर से जारी हुए इस पत्र से एक और बड़ी बात सामने निकलकर आ रही है, जिसने मामले को और गरमा दिया है। वन विभाग का सीधा आरोप है कि दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी संघ के नाम का इस्तेमाल करके कुछ लोग जानबूझकर अधिकारियों की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके साथ ही सरकारी और विभागीय कामों में भी लगातार रुकावटें पैदा की जा रही हैं।
इसी गंभीर बात को आधार बनाते हुए विभाग ने संघ के तथाकथित अध्यक्ष के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के लिए रामनगर थाने को एक पत्र भेज दिया है। वन विभाग के इस बड़े कदम ने अब इस पूरी लड़ाई को दफ्तर की चारदीवारी से बाहर निकालकर सीधे कानूनी मोड़ पर ला खड़ा किया है। अब बात केवल दफ्तर के आरोपों की नहीं रह गई है, बल्कि आरोप लगाने वालों की खुद की जवाबदेही और कानूनी फंदे की भी बन चुकी है।
अब साख की लड़ाई: दोनों पक्षों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी
इस पूरे वसूली कांड ने वन विभाग के कामकाज और उसकी पारदर्शिता पर आम जनता के बीच बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। अब इस मामले में दोनों ही पक्षों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। अगर आरोप लगाने वाले कर्मचारी संघ के पास वाकई कोई ठोस और पक्का सबूत है, तो आने वाले दिनों में वन विभाग के बड़े अफसरों की मुश्किलें बहुत ज्यादा बढ़ सकती हैं और उन्हें जवाब देना भारी पड़ेगा।
लेकिन, इसके उलट यदि तीन दिन की समयसीमा बीतने के बाद भी शिकायतकर्ता कोई मजबूत साक्ष्य या सबूत पेश नहीं कर पाते हैं, तो खुद उनकी अपनी साख और दावों पर हमेशा के लिए पानी फिर जाएगा। फिलहाल वन विभाग ने कार्रवाई की गेंद पूरी तरह से आरोप लगाने वालों के पाले में डाल दी है। अब जिले के तमाम अधिकारियों और आम लोगों की नजरें इसी बात पर टिकी हैं कि क्या तीन दिन में कोई बड़ा सबूत सामने आएगा या फिर यह पूरा मामला सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप की एक आम सरकारी लड़ाई बनकर रह जाएगा।
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