नौगढ़ की बेटियों ने रचा इतिहास: शिक्षा और खेल में कमाल करने वाली 70 बालिकाएं हुईं सम्मानित, देखें तस्वीरें
चंदौली के सुदूर नौगढ़ इलाके में बेटियों की किस्मत और हौसले बदल रहे हैं। ग्राम्या संस्थान के स्वावलंबन कार्यक्रम में क्षेत्र की 70 होनहार बालिकाओं को उनकी बड़ी सफलताओं के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया है।
70 बेटियों को मिला विशेष सम्मान
नौगढ़ में ग्राम्या संस्थान की पहल
बेटियों को सिखाए सुरक्षा के गुर
सरकारी योजनाओं की दी गई जानकारी
चंदौली जिले के पिछड़े और दुर्गम माने जाने वाले तहसील नौगढ़ क्षेत्र से एक बेहद खूबसूरत और गर्व करने वाली तस्वीर सामने आई है। इस सुदूर इलाके की बेटियां अब किसी से पीछे नहीं हैं और हर क्षेत्र में अपनी नई पहचान बना रही हैं। चकरघट्टा थाना क्षेत्र के लालतापुर में स्थित ग्राम्या संस्थान के चिराग केंद्र में 'महिला एवं बालिका स्वावलंबन कार्यक्रम' का आयोजन बड़े ही धूमधाम से किया गया।
इस खास कार्यक्रम में शिक्षा, खेलकूद और समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में बेहतरीन काम करने वाली 70 होनहार बालिकाओं को मोमेंटो और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस समारोह ने साफ संदेश दे दिया कि अगर ग्रामीण और आदिवासी इलाकों की बेटियों को सही मौका मिले, तो वे आसमान छू सकती हैं।

सालों से वनवासी और ग्रामीण परिवारों की ताकत बना ग्राम्या संस्थान
नौगढ़ के दूर-दराज और वनवासी इलाकों में ग्राम्या संस्थान सालों से एक मददगार बनकर काम कर रहा है। यह संस्था सिर्फ कागजी दावों या छोटे-मोटे प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण महिलाओं और किशोरियों को शिक्षा, उनके हक, स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता से जोड़ने का काम लगातार कर रही है।
संस्था की इस मेहनत का असर अब जमीन पर साफ-साफ दिखने लगा है। पहले जिन गांवों में लोग बेटियों को स्कूल भेजने से कतराते थे, आज उन्हीं गांवों की लड़कियां पढ़ाई, खेल और सामाजिक कामों में सबसे आगे खड़ी नजर आ रही हैं। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि इस प्रयास ने समाज में एक मजबूत और सकारात्मक बदलाव की शुरुआत की है।
आत्मनिर्भर बेटी से ही मजबूत होगा समाज: बिंदु सिंह
कार्यक्रम के दौरान ग्राम्या संस्थान की निदेशक बिंदु सिंह ने बहुत ही प्यारी बात कही। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की असली तरक्की तब तक नहीं हो सकती, जब तक कि वहां की बेटियां पढ़ी-लिखी, जागरूक और आत्मनिर्भर न बन जाएं। नौगढ़ की मिट्टी और यहां की बेटियों में टैलेंट की कोई कमी नहीं है, बस उन्हें सही मार्गदर्शन और अवसरों की तलाश है।
संस्था का सबसे बड़ा लक्ष्य हर एक लड़की के भीतर उस आत्मविश्वास को जगाना है, जिससे वह अपने हक की लड़ाई खुद लड़ सके। जब बेटियां अपनी पढ़ाई पूरी कर आगे बढ़ेंगी, तभी वे अपने परिवार के साथ-साथ पूरे समाज को एक नई दिशा दे पाएंगी।

'चुप बैठना छोड़ें, अपनी सुरक्षा के लिए आवाज उठाना सीखें बेटियां'
कार्यक्रम में मौजूद महिला कल्याण विभाग के सदस्य धर्मेंद्र सिंह ने सरकार की तमाम लाभकारी योजनाओं के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने अभिभावकों से खास अपील की कि वे अपनी बेटियों की पढ़ाई को सबसे ऊपर रखें और उन्हें आगे बढ़ने के पूरे मौके दें, क्योंकि सरकारी योजनाओं की सही जानकारी ही महिलाओं की सबसे बड़ी ताकत है।
वहीं, महिला स्वास्थ्य अधिकार मंच की कोऑर्डिनेटर नीतू सिंह ने लड़कियों को सुरक्षा का पाठ पढ़ाया। उन्होंने महिला सुरक्षा से जुड़े जरूरी हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी और कहा कि किसी भी तरह की हिंसा या उत्पीड़न होने पर बेटियां डरें नहीं, बल्कि बिना झिझक सरकारी मदद लें। उन्होंने जोर देकर कहा कि जागरूक बेटी ही सबसे सुरक्षित बेटी होती है। इस मौके पर कई गणमान्य लोग, समाज सेवी और भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
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