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समाधान दिवस बनता जा रहा है आश्वासन दिवस: नौगढ़ में 160 में से सिर्फ 3 शिकायतों का हुआ निपटारा, 157 लोग खाली हाथ लौटे

चंदौली के नौगढ़ तहसील समाधान दिवस में आए 160 मामलों में से सिर्फ 3 का निस्तारण होने पर जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। परेशान ग्रामीणों का कहना है कि अब सिस्टम की बड़ी सर्जरी की जरूरत है।

 
 

नौगढ़ तहसील में 160 शिकायतें आईं

केवल 3 मामलों का हुआ निस्तारण

157 फरियादी लौटे खाली हाथ

सांसद और डीएम के सामने घटी घटना

वनवासी इलाकों के लोग बेहद परेशान

"मैनपॉवर बढ़ाने से अब काम नहीं चलेगा... सिस्टम की सर्जरी करिए डीएम साहब।" यह तीखी आवाज अब चंदौली के नौगढ़ तहसील में आयोजित समाधान दिवस से उठने लगी है। यहाँ आये कुल 160 प्रार्थना पत्रों में से सिर्फ 3 मामलों का ही मौके पर निस्तारण किया गया। बाकी बचे 157 फरियादी एक बार फिर अधिकारियों से वही पुराना घिसा-पिटा डायलॉग "देख लिया जाएगा और जांच कराई जाएगी" सुनकर मायूस होकर अपने घर लौट गए। अब लोग सीधा सवाल उठा रहे हैं कि क्या अधिकारी सिर्फ निर्देश सुनने के लिए बैठे हैं?

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समाधान की जगह मिल रही है नई समस्या
समाधान दिवस का हाल देखकर जनता अब सीधे तौर पर प्रशासनिक अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगा रही है। दूर-दराज से आए फरियादियों का कहना है कि हर समाधान दिवस में एक ही जैसा ढर्रा देखने को मिलता है। पहले शिकायत दर्ज होती है, फिर उसकी औपचारिक सुनवाई की जाती है और आखिर में आश्वासन का झुनझुना थमा दिया जाता है। इस व्यवस्था से न तो समय पर किसी समस्या का निपटारा हो रहा है और न ही जमीन पर कोई बदलाव दिख रहा है।

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सांसद और डीएम की मौजूदगी में भी निराशा
मामले की गंभीरता को देखते हुए पंचायत लौवारी कला के प्रधान यशवंत सिंह यादव कहते हैं कि अधिकारी समस्याओं का समाधान करने की बजाय उन्हें और लंबा खींचते जा रहे हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जब खुद क्षेत्रीय सांसद छोटेलाल खरवार और जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग वहां उपस्थित थे, तब जाकर इतनी कम संख्या में शिकायतों का निपटारा हुआ। यह केवल एक सरकारी आंकड़ा नहीं है, बल्कि व्यवस्था की बेहद कमजोर और गंभीर खामी को उजागर करता है।

वनवासी क्षेत्र के लोगों को लगी दोहरी चोट
विकास खंड नौगढ़ और उसके आसपास के वनवासी इलाकों के लोग पहले ही बहुत ही कठिन परिस्थितियों में अपना जीवन गुजारते हैं। ये गरीब ग्रामीण कई किलोमीटर का लंबा सफर तय करके, अपना पैसा और समय खर्च कर इस उम्मीद में समाधान दिवस आते हैं कि सरकार उनकी सुनेगी। लेकिन जब उन्हें यहाँ से भी केवल निराशा हाथ लगती है, तो सरकारी व्यवस्था पर से उनका भरोसा धीरे-धीरे खत्म होने लगता है।

अधिकारी अब सुनकर नहीं, बदलकर दिखाएं
नौगढ़ की जनता का जिलाधिकारी महोदय से अब बिल्कुल साफ और सीधा सवाल है। लोग पूछ रहे हैं कि जब बार-बार कड़े निर्देश दिए जाने के बाद भी नीचे का सिस्टम टस से मस नहीं हो रहा, तो केवल मैनपॉवर बढ़ाने से क्या फायदा होगा? अब तो इस पूरे जंग लगे सिस्टम की सख्त प्रशासनिक सर्जरी करने की जरूरत है। लोग साफ-साफ कह रहे हैं कि डीएम साहब! ऐसे काम नहीं चलेगा, अब अधिकारियों को सिर्फ कागजों पर सुनना नहीं, बल्कि जमीन पर बदलाव करके दिखाना होगा। वरना इस आयोजन का नाम बदलकर 'समस्या दिवस' रख देना चाहिए।

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