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बाजार के बीच लगा मौत का ट्रांसफार्मर, केबिल जलने की शिकायतों के बाद भी नहीं जागा विभाग, व्यापारियों का फूटा गुस्सा

चंदौली के नौगढ़ कस्बे में जर्जर ट्रांसफार्मर की केबिल की चपेट में आने से हार्डवेयर व्यवसायी मंगल केशरी की मौत हो गई। बार-बार केबिल जलने और ट्रांसफार्मर हटाने की शिकायतों को नजरअंदाज करने पर आक्रोशित व्यापारियों ने सड़क पर उतरकर धरना-प्रदर्शन किया।
 
कस्बा नौगढ़ के बीच बाजार में बड़ा बिजली हादसा

400 केवीए ट्रांसफार्मर की केबिल से लगा करंट

हार्डवेयर व्यवसायी मंगल केशरी की मौके पर मौत

बार-बार केबिल जलने पर मिट्टी डालकर बुझाते थे लोग

सांसद छोटेलाल खरवार ने ट्रांसफार्मर शिफ्ट करने का दिया निर्देश

केबिल जलती रही, लोग मिट्टी डालकर बुझाते रहे... फिर चली गई मंगल केशरी की जान! 

अब पूछ रहा नौगढ़ - जिम्मेदार कौन?


नौगढ़ कस्बे में हार्डवेयर व्यवसायी मंगल केशरी की करंट लगने से हुई मौत अब एक साधारण दुर्घटना नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर खड़े हुए बड़े सवाल में बदल चुकी है। जिस ट्रांसफार्मर को लेकर वर्षों से खतरे की घंटी बजाई जा रही थी, जिस ट्रांसफार्मर के केबिल आए दिन जलते थे और जिसकी आग को स्थानीय लोग खुद धूल-मिट्टी डालकर बुझाते थे, वह आज भी बाजार के बीच खड़ा है। अब एक मौत के बाद पूरा नौगढ़ पूछ रहा है—क्या कार्रवाई के लिए एक जान जाना जरूरी था? 


मौत से पहले भी मिल रहे थे खतरे के संकेत 
कस्बा नौगढ़ के बीच बाजार में विद्युत आपूर्ति के लिए स्थापित 400 केवीए ट्रांसफार्मर लंबे समय से लोगों की चिंता का विषय बना हुआ था। स्थानीय व्यापारियों का आरोप है कि ट्रांसफार्मर से जुड़े केबिल बार-बार जलते थे। मंगलवार की रात भी केबिल में आग लगी थी, जिसे आसपास के दुकानदारों और स्थानीय लोगों ने धूल-मिट्टी डालकर बुझाया। लोगों का कहना है कि यह कोई नई घटना नहीं थी। बाजार में अक्सर ऐसी स्थिति बनती थी, लेकिन विभागीय स्तर पर स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। 

शिकायतें फाइलों में दबी रहीं, बाजार खतरे में जीता रहा
व्यापारियों का आरोप है कि ट्रांसफार्मर को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने के लिए कई बार विद्युत विभाग के अधिकारियों, अवर अभियंता और संबंधित जिम्मेदारों से शिकायत की गई। लोगों ने बार-बार चेतावनी दी कि बाजार के बीच लगा यह ट्रांसफार्मर कभी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है। इसके बावजूद न तो ट्रांसफार्मर हटाया गया और न ही सुरक्षा के अतिरिक्त इंतजाम किए गए। परिणाम यह हुआ कि एक परिवार ने अपना कमाने वाला सदस्य खो दिया। 

 

मौत के बाद खुलीं फाइलें, सक्रिय हुए लोग
मंगल केशरी की मौत के बाद  कस्बे के व्यापारियों और नागरिकों का गुस्सा फूट पड़ा। ट्रांसफार्मर के पास धरना-प्रदर्शन शुरू हुआ और बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।
इस बीच ट्रांसफार्मर को अन्यत्र स्थानांतरित करने की मांग फिर तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब सांसद छोटेलाल खरवार ने भी ट्रांसफार्मर शिफ्ट कराने के लिए विभागीय अधिकारियों से प्रस्ताव तैयार करने को कहा है और सांसद निधि से सहयोग देने की बात कही है।
लेकिन यहीं सबसे बड़ा सवाल भी खड़ा हो रहा है, जब खतरा पहले से मौजूद था तो यह पहल किसी की मौत से पहले क्यों नहीं हुई? 


नौगढ़ में अब यह चर्चा केवल एक ट्रांसफार्मर की नहीं है। लोगों का मानना है कि यह मामला उस व्यवस्था की कहानी है, जहां शिकायतें सुन ली जाती हैं, लेकिन समाधान अक्सर किसी बड़ी घटना के बाद ही निकलता है।
व्यापारियों का कहना है कि यदि पहले ही जनप्रतिनिधि, विभाग और प्रशासन मिलकर इस मुद्दे का समाधान निकाल लेते, तो शायद आज मंगल केशरी अपने परिवार के बीच होते। 

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चक्का जाम की चेतावनी, बढ़ सकता है आंदोलन 
अब लोगों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि ट्रांसफार्मर को जल्द सुरक्षित स्थान पर नहीं हटाया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। व्यापारियों ने कहा कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर कार्रवाई चाहिए।
प्रदर्शन में महेंद्र केशरी, दीपक गुप्ता, मंगल जायसवाल, अवधेश, विकास सोनी, आकाश कुमार, बृजेश कुमार, भानचंद, राजकुमार, सूरज, लक्ष्मी नारायण, राकेश कुमार, दीपक, गिरिजा प्रसाद, शिव प्रकाश चौरसिया, राधेश्याम, कन्हैया केशरी सहित बड़ी संख्या में कस्बावासी मौजूद रहे।


चंदौली समाचार का सवाल..????
जब केबिल जलने की घटनाएं लगातार हो रही थीं, शिकायतें भी दर्ज थीं और खतरे की जानकारी भी थी, तो फिर नौगढ़ बाजार को सुरक्षित बनाने की पहल एक मौत के बाद ही क्यों शुरू हुई? आखिर जिम्मेदारी किसकी तय होगी—विभाग की, व्यवस्था की या फिर उस चुप्पी की, जिसने खतरे को हादसे में बदल दिया?

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