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चंदौली वन विभाग में बड़ा प्रशासनिक टकराव: डीएफओ ने कर्मचारी संगठन को बताया 'फर्जी', वार्ता से किया इनकार

काशी वन्य जीव प्रभाग रामनगर में एसडीओ के पत्र पर वार्ता के लिए पहुंचे दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी संघ के नेताओं से डीएफओ ने मिलने से मना कर दिया। संगठन को फर्जी बताते हुए डीएफओ ने मांगों को खारिज कर दिया, जिससे विवाद गहरा गया है।
 

एसडीओ वरुण प्रताप सिंह का पत्र बना आपसी विवाद की जड़

सरकारी पत्र के भरोसे आए कर्मचारी नेता खाली हाथ लौटे

डीएफओ बी. शिवशंकर ने संगठन को 'फर्जी' बताकर बनाई दूरी

विनियमितीकरण पूरा होने का हवाला देकर नई मांगें खारिज

विभागीय समन्वय की चूक पर खड़े हुए गंभीर प्रशासनिक सवाल

काशी वन्य जीव प्रभाग रामनगर चंदौली, वाराणसी के  प्रभागीय कार्यालय में  शनिवार को उस समय बड़ा प्रशासनिक टकराव सामने आया जब एसडीओ वरुण प्रताप सिंह द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के आधार पर वार्ता के लिए पहुंचे न्यूनतम दैनिक वेतन कर्मचारी संघ के प्रतिनिधिमंडल को प्रभागीय वनाधिकारी ने मिलने से साफ इनकार कर दिया। प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश अध्यक्ष भोरिक यादव, मंडल अध्यक्ष विश्वनाथ यादव और जिलाध्यक्ष महेंद्र यादव भी शामिल थे, लेकिन उन्होंने ने संगठन को ‘फर्जी’ बताते हुए स्पष्ट कहा कि वर्ष 2000 से 2016 के बीच कार्मिकों का विनियमितीकरण पहले ही पूरा हो चुका है और वरिष्ठता सूची भी जारी की जा चुकी है। ऐसे में अब किसी नई मांग या सूची का कोई औचित्य नहीं बनता।


सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो गया है कि जब 23 जून को एसडीओ वरुण प्रताप सिंह के पत्र में 27 जून को औपचारिक वार्ता तय थी, तो आखिर बैठक मौके पर क्यों नहीं हो सकी? क्या यह विभागीय समन्वय की चूक है या फिर अलग-अलग स्तर पर लिए गए निर्णयों का टकराव? 
सरकारी पत्र के भरोसे पहुंचे नेता बिना वार्ता लौटने को मजबूर हुए। पूरा मामला अब प्रशासनिक जवाबदेही, आदेश प्रक्रिया और विभागीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है।

 डीएफओ बी. शिवशंकर का सख्त रुख—
विनियमितीकरण पूरा, नई वरिष्ठता सूची का कोई आधार नहीं’ 

प्रभागीय वनाधिकारी बी. शिवशंकर ने स्पष्ट कहा कि  2016 तक सभी पात्र कर्मचारियों का विनियमितीकरण पहले ही पूरा किया जा चुका है। इसके बाद वरिष्ठता सूची भी विभागीय स्तर पर जारी कर दी गई है। ऐसे में अब किसी नई सूची या अतिरिक्त मांग का कोई औचित्य नहीं बनता।
डीएफओ ने संगठन को ‘फर्जी’ बताते हुए वार्ता से पूरी तरह किनारा कर लिया। उनका यह रुख विभागीय नीति और प्रशासनिक निर्णय के अनुसार बताया जा रहा है।


एसडीओ वरुण प्रताप सिंह का पत्र बना विवाद की जड़,
27 जून को तय थी वार्ता

आपको बता दें कि 23 जून को उप प्रभागीय वनाधिकारी वरुण प्रताप सिंह द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट उल्लेख था कि दैनिक वन कर्मचारी संघ की नौ सूत्रीय मांगों पर 27 जून को सुबह 11 बजे प्रभागीय वनाधिकारी कार्यालय रामनगर में औपचारिक वार्ता होगी। इसी पत्र के आधार पर आंदोलनरत कर्मचारियों ने धरना स्थगित कर वार्ता में शामिल होने का निर्णय लिया था। लेकिन मौके पर वार्ता नहीं हो सकी, जिससे पूरा मामला विवादों में आ गया।

 कर्मचारी नेताओं की हालत पतली,
बिना वार्ता खाली हाथ लौटे 

प्रभागीय कार्यालय रामनगर में डीएफओ से वार्ता के लिए पहुंचे प्रदेश अध्यक्ष भोरिक यादव, मंडल अध्यक्ष विश्वनाथ यादव और जिलाध्यक्ष महेंद्र यादव शनिवार को पहुंचे थे, प्रतिनिधिमंडल से डीएफओ बी. शिवशंकर ने मिलने से साफ मना कर दिया। इससे संगठन को बड़ा झटका लगा और पूरी टीम बिना समाधान वापस लौट गई। नेताओं का कहना है कि उन्हें सरकारी पत्र पर बुलाया गया था, लेकिन मौके पर वार्ता नहीं हुई। इससे संगठन के भीतर नाराजगी और भ्रम की स्थिति गहरा गई है।


❓ बड़ा सवाल—अगर डीएफओ असहमत थे तो एसडीओ वरुण प्रताप सिंह ने पत्र क्यों लिखा? 

अब सबसे अहम सवाल यही खड़ा हो गया है कि जब डीएफओ बी. शिवशंकर पहले से संगठन को लेकर सख्त रुख अपना चुके थे और 22 जून के बाद स्थिति स्पष्ट मानी जा रही थी, तो एसडीओ वरुण प्रताप सिंह ने 23 जून को वार्ता का पत्र किस आधार पर जारी किया? क्या यह पत्र विभागीय सहमति से जारी हुआ या फिर अलग-अलग स्तर पर अलग निर्णय लिए गए? और अगर संगठन को पहले ही ‘फर्जी’ माना जा चुका था, तो 27 जून की वार्ता तय कैसे हुई? इसी विरोधाभास ने कर्मचारियों में भारी नाराजगी और प्रशासनिक भ्रम दोनों बढ़ा दिए हैं। अब यह मामला सीधे तौर पर विभागीय समन्वय और आदेश प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल बन गया है।

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