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कागजी रिपोर्ट नहीं... मौके पर हकीकत देखने राजदरी के दुर्गम रास्तों पर उतरे डीएफओ बी. शिवशंकर, वन महकमे में हड़कंप

काशी वन्य जीव प्रभाग के डीएफओ बी. शिवशंकर ने बिना किसी आधिकारिक सूचना के राजदरी जलप्रपात और तलरा रोपावनी का औचक निरीक्षण किया। दुर्गम रास्तों से ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर उन्होंने सुरक्षा और वृक्षारोपण की वास्तविक स्थिति परखी।
 

डीएफओ का औचक फील्ड निरीक्षण

राजदरी जलप्रपात पर ग्राउंड जीरो चेकिंग

बिना प्रोटोकॉल दुर्गम रास्तों का सफर

20 हेक्टेयर रोपावनी की समीक्षा

फाइलों के बजाय फील्ड पर जोर

काशी वन्य जीव प्रभाग, रामनगर के डीएफओ बी. शिवशंकर (IFS) ने ऐसा फील्ड निरीक्षण किया, जिसकी न तो पहले कोई आधिकारिक सूचना जारी हुई और न ही कोई औपचारिक प्रचार हुआ। सुबह-सुबह सीमित टीम के साथ वह जंगल के दुर्गम रास्तों से होते हुए राजदरी जलप्रपात के ग्राउंड जीरो तक पहुंचे और चट्टानों, जलधारा, पर्यटक मार्ग तथा वन क्षेत्र की वास्तविक स्थिति का बारीकी से निरीक्षण किया। इस अचानक हुए दौरे ने यह साफ कर दिया कि अब केवल फाइलों की रिपोर्ट नहीं, बल्कि मौके की हकीकत के आधार पर काम की समीक्षा होगी। 

प्रोटोकॉल नहीं, ग्राउंड जीरो की सच्चाई देखी 
डीएफओ बी. शिवशंकर ने वाहन से उतरकर पैदल ही कठिन रास्ता तय किया। वनकर्मियों के साथ जलप्रपात के निचले हिस्से तक पहुंचे, जहां सामान्यतः अधिकारी कम ही जाते हैं। चट्टानों के बीच रुककर उन्होंने प्राकृतिक स्थिति, सुरक्षा व्यवस्था और फील्ड की वास्तविक परिस्थितियों का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान कई बिंदुओं पर अधिकारियों से चर्चा भी की। 

'ऑफिस नहीं, जंगल बोलेगा' का संदेश 
वन विभाग पर अक्सर यह आरोप लगता रहा है कि निरीक्षण केवल कागजों तक सीमित रहते हैं। ऐसे समय में बिना तामझाम और बिना प्रेस नोट के डीएफओ का सीधे ग्राउंड जीरो तक पहुंचना यह संकेत माना जा रहा है कि विभाग अब फाइलों की बजाय फील्ड की रिपोर्ट पर ज्यादा भरोसा करना चाहता है। इससे अधीनस्थ अधिकारियों की जवाबदेही भी बढ़ने की उम्मीद है। 

पर्यटन, सुरक्षा और संरक्षण तीनों पर नजर 
राजदरी जलप्रपात जिले का ही नहीं प्रदेशका प्रमुख पर्यटन स्थल है। हर साल हजारों पर्यटक यहां पहुंचते हैं। ऐसे में वन क्षेत्र की सुरक्षा, पर्यटकों की सुविधा और प्राकृतिक धरोहर का संरक्षण एक-दूसरे से जुड़ा विषय है। माना जा रहा है कि निरीक्षण के दौरान इन्हीं पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया गया। 

20 हेक्टेयर रोपावनी भी पहुंचा निरीक्षण 
राजदरी पहुंचने से पहले डीएफओ ने तलरा रोपावनी प्रथम के 20 हेक्टेयर पौधरोपण क्षेत्र को भी देखा। पौधों की स्थिति, संरक्षण और रखरखाव की समीक्षा करते हुए उन्होंने आवश्यक सुधार के निर्देश दिए। उनका जोर इस बात पर रहा कि वृक्षारोपण अभियान की सफलता केवल पौधे लगाने से नहीं, बल्कि उन्हें जीवित रखकर जंगल का हिस्सा बनाने से तय होगी।

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