गांवों में बदहाली और कागजों में सफाई! एडीओ पंचायत को शिकायत का इंतजार; वनांचल विकास परिषद ने दी आंदोलन की चेतावनी
नौगढ़ विकासखंड की 43 ग्राम पंचायतों में पहली ही बारिश ने सफाई व्यवस्था की पोल खोल दी है। जाम नालियां, कीचड़ से पटी सड़कें और एडीओ पंचायत के गैर-जिम्मेदाराना रवैये से नाराज ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
नौगढ़ की 43 पंचायतों में फैला कचरा
बरबसपुर व गोलाबाद सड़कें बनीं दलदल
एंबुलेंस व स्कूली बच्चों की राह बाधित
एडीओ पंचायत का गैर-जिम्मेदाराना बयान
वनांचल विकास परिषद की आंदोलन चेतावनी
उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के दुर्गम वनांचल विकासखंड नौगढ़ की 43 ग्राम पंचायतों में सफाई व्यवस्था अब केवल सरकारी कागजों और फाइलों तक ही सीमित होकर रह गई है। मानसून की पहली ही बारिश ने पंचायत राज विभाग द्वारा किए जा रहे स्वच्छता के तमाम बड़े-बड़े दावों की हवा निकाल दी है। क्षेत्र के गांवों में नालियां पूरी तरह से जाम हैं, सड़कें घुटने भर कीचड़ में डूबी हुई हैं और गलियों में सड़ते कचरे के ढेर लगे हुए हैं। सफाई के नाम पर हर महीने लाखों रुपये का सरकारी धन खर्च होने के बावजूद गांवों की यह बदहाली विभागीय निगरानी और अधिकारियों की कार्यशैली पर बेहद गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

दलदल में तब्दील हुई सड़कें, एंबुलेंस का पहुंचना हुआ मुश्किल और नौगढ़ बांध मार्ग धंसा
विकासखंड की स्थिति दिन-ब-दिन और विकराल होती जा रही है। ग्राम पंचायत बरबसपुर में कंपोजिट विद्यालय से नदी की ओर जाने वाला मुख्य मार्ग कचरे और फिसलन भरे कीचड़ से पट चुका है, जिससे मासूम स्कूली बच्चे हादसों के साये में जाने को मजबूर हैं। वहीं देवखत, कर्माबांध संपर्क मार्ग और गोलाबाद गांव की सड़कें पूरी तरह दलदल में तब्दील हो चुकी हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि आपात स्थिति में मरीजों को लेने आने वाली एंबुलेंस भी कीचड़ में फंस रही है। इसके अलावा, नौगढ़ बांध का मुख्य मार्ग कई स्थानों पर धंसकर जानलेवा गहरे गड्ढों में तब्दील हो गया है, जिससे आधा दर्जनों गांवों का आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है।
"शिकायत मिलेगी तो करेंगे कार्रवाई": एडीओ पंचायत के बयान से भड़के ग्रामीण
जब सफाई कर्मियों की अनुपस्थिति और बदहाल स्थिति को लेकर सहायक विकास अधिकारी (एडीओ पंचायत) उपेंद्र साहनी से सवाल किया गया, तो उनका गैर-जिम्मेदाराना जवाब सामने आया। उन्होंने कहा, "शिकायत मिलने पर कार्रवाई करेंगे, रोस्टर के हिसाब से सफाई हो रही है।" इस बयान के बाद ग्रामीणों का गुस्सा और ज्यादा भड़क गया है। ग्रामीणों का तीखा सवाल है कि जब जमीनी हकीकत और गंदगी खुलेआम सामने दिख रही है, तो विभाग को कार्रवाई के लिए लिखित शिकायत का इंतजार क्यों है? क्या अधिकारियों का काम सिर्फ दफ्तरों में बैठकर रोस्टर और रजिस्टर में उपस्थिति दर्ज करना ही रह गया है?
बीमारियों के फैलने का बढ़ा खतरा, वनांचल विकास परिषद ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी
बारिश के मौसम में सड़ता कचरा और रुका हुआ बदबूदार पानी डेंगू, मलेरिया, डायरिया और जलजनित संक्रामक बीमारियों को सीधा न्योता दे रहा है। इसे लेकर वनांचल विकास परिषद ने सख्त रुख अख्तियार किया है। संगठन ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों पर तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की है। परिषद ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही 43 पंचायतों में सफाई अभियान चलाकर स्थिति नहीं सुधारी गई, तो वे जनता को एकजुट कर उग्र आंदोलन शुरू करेंगे। अब देखना यह है कि डीपीआरओ (DPRO) और जिला प्रशासन इस बदहाली पर क्या कड़ा संज्ञान लेते हैं।
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