नौगढ़ में शिलापट्ट तोड़ने के मामले में सांसद प्रतिनिधि पहुंचे थाने, दे दी है कार्रवाई करने के लिए तहरीर

अराजक तत्वों ने तोड़ा है सपा सांसद का शिलापट्ट
आंदोलन करने की सपा नेताओं ने दे दी है चेतावनी
नौगढ़ में दुर्गा मंदिर पोखरे पर लगा शिलापट्ट तोड़ने का है मामला
चंदौली जिले के तहसील नौगढ़ में दुर्गा मंदिर पोखरे पर लगाए गए सोनभद्र से समाजवादी पार्टी के सांसद कुंवर छोटेलाल खवार के नाम का शिलापट अराजक तत्वों ने गुरुवार की रात में तोड़ डाला, लेकिन प्रशासन तमाशबीन बना बैठा है। इस कृत्य से समाजवादी कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश है। सांसद प्रतिनिधि जिलाजीत सिंह यादव ने देर रात थाने पहुंचकर दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की और चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ने अपनी कानूनी जिम्मेदारी नहीं निभाई, तो पार्टी सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेगी।

सांसद प्रतिनिधि ने सवाल किया कि आखिर नौगढ़ में अराजक तत्वों को किसका संरक्षण मिल रहा है..? उन्होंने प्रशासन पर भाजपा के दबाव में काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर यह बोर्ड किसी भाजपा नेता का होता, तो अब तक पुलिस दोषियों को सलाखों के पीछे डाल चुकी होती। लेकिन किसी और दल के सांसद विधायक के अपमान से पुलिस व प्रशासन का कोई लेना देना नहीं है। विरोध जताने वालों में साधो शरण जायसवाल, गुरु प्रसाद यादव, नरसिंह यादव, रामवृक्ष यादव उर्फ बल्लू, विजई समेत कई समाजवादी कार्यकर्ता शामिल रहे।

बोले- लोकतंत्र पर हमला है, अब चुप नहीं बैठेंगे सपा के लोग
सपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह केवल एक शिलापट्ट नहीं, बल्कि लोकतंत्र और विपक्ष की आवाज को कुचलने की साजिश है। कार्यकर्ताओं ने सीधे तौर पर प्रशासन को चेतावनी दी कि अगर दोषियों को गिरफ्तार नहीं किया गया तो सपा कार्यकर्ता सड़कों पर उतरेंगे और सरकार की तानाशाही के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे।
पुलिस का ढुलमुल रवैया, विपक्षी नेताओं की उपेक्षा
थाने में शिकायत देने के बावजूद पुलिस का ढुलमुल रवैया यह साबित करता है कि या तो प्रशासन इस मामले को हल्के में ले रहा है या फिर उसे सत्ता का दबाव झेलना पड़ रहा है। नौगढ़ के सीओ ने कहा कि "किसी भी जनप्रतिनिधि का शिलापट्ट तोड़ना अपराध है, जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।"
लेकिन सवाल यह है कि क्या प्रशासन वाकई दोषियों को पकड़ने के लिए गंभीर है या फिर मामला सत्ता के दबाव में दफना दिया जाएगा ? अब नजरें पुलिस और प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या वे निष्पक्ष कार्रवाई करेंगे या सत्ता के आगे घुटने टेक देंगे।
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