डीसी मनरेगा की मेहरबानी से चल रहा है मनरेगा योजना में घोटाला , लूट-पाट की जांच के लिए सीएम को भेजी गई चिट्ठी
जिला पंचायत के ठेकेदारों ने बिना काम कराए ही लेबरों के खाते में भेजा पैसा
नौगढ़ में सड़क की पटरी मरम्मत के नाम पर हुआ फर्जीवाड़ा
चंदौली जिले में मनरेगा योजना के तहत हो रहे कार्यों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और अनियमितता का मामला सामने आया है। दावा है कि डीसी मनरेगा की मेहरबानी से कई विकास कार्य केवल कागजों पर ही पूरे किए गए हैं, जबकि वास्तविकता में जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हुआ। इस पूरे मामले में भारी वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताई जा रही है।
विकास खंड नौगढ़ में जिला पंचायत के द्वारा मनरेगा योजना के तहत पीडब्ल्यूडी विभाग के सड़कों की पटरी पर मिट्टीकरण और झाड़ी सफाई जैसे कार्यों के लिए फर्जी मास्टर रोल बनाए गए हैं, जिनमें मजदूरों को बिना काम कराए भुगतान किया गया। इन कार्यों में फर्जीवाड़ा करने के मामले को जिलाधिकारी के साथ ही मुख्यमंत्री को भी चिट्ठी भेजी गई है।
चिट्ठी में मनरेगा योजना में घोटाले का आरोप नौगढ़ विकास खंड के कई गांवों में लगाए गए हैं। इनमें बैरगाढ़ चौराहा से कुबराडीह मार्ग के पटरी पर मिट्टी और झाड़ी सफाई का कार्य, औरवाटाड़ से नौगढ़ बाजार तक पटरी मरम्मत का कार्य, गंगापुर, नर्वदापुर, लौवारी, कोईलरवा हनुमान मंदिर मार्ग की झाड़ी सफाई के बाद मिट्टी डालकर पटरी मरम्मत कार्य के नाम पर खानापूर्ति की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि इन कार्यों में सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है और इसका फायदा जरूरतमंद मजदूरों को नहीं मिल पा रहा है। इस प्रकार की अनियमितताओं से गांवों में विकास कार्यों की गति भी प्रभावित हो रही है।
आईपीएफ राज्य कार्य समिति सदस्य अजय राय ने बिना रोक चल रही धांधली के मामले में कहा कि सरकार द्वारा चलाए जा रहे रोजगार गारंटी योजनाओं में इस प्रकार की अनियमितताएं एक गंभीर मामला है और इससे योजना के वास्तविक उद्देश्य को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने मांग की है कि इन कार्यों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो सके।
गौरतलब है कि मनरेगा योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा करना और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देना है। लेकिन नौगढ़ विकास खंड में सामने आई इन शिकायतों से स्पष्ट होता है कि सरकारी तंत्र में कुछ लोग इस योजना का गलत फायदा उठा रहे हैं। ग्रामीणों ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों से इस मामले की शीघ्र जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की गड़बड़ियां रोकी जा सकें।
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