एक बार फिर चकरघट्टा थाने की लापरवाही, SP की आंखों की किरकिरी बन सकते हैं थाना प्रभारी
SP के आदेश पर दर्ज हुआ है मुकदमा
पंचायत सहायक समेत 4 लोगों के विरुद्ध दर्ज हुआ मुकदमा
8 सितंबर को पड़हवा गांव के राजनाथ यादव के साथ मारपीट
चंदौली जिले के तहसील नौगढ़ में चकरघट्टा थाना पुलिस की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। मारपीट और मोबाइल छिनने के मामले में फरियादी तीन बार थाने और सीओ दफ्तर तक पहुंचा, लेकिन न तो मुकदमा दर्ज हुआ और न ही मेडिकल कराया गया। थाने की इस लापरवाही से तंग आकर फरियादी को एसपी चंदौली का दरवाजा खटखटाना पड़ा। इसके बाद मामला दर्ज हुआ है।
आपको बता दें कि चकरघटृटा थाना क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय बजरडीहा पर 8 सितंबर को पंचायत की प्रशासनिक बैठक खत्म होने के बाद, पड़हवा गांव निवासी राजनाथ यादव अपना गुम हुआ मोबाइल खोज रहा था। तहरीर के अनुसार वहां पहले से मौजूद रामबहाल, राजीव रतन, रमेश और पंचायत सहायक बच्चा लाल ने अचानक गाली-गलौज शुरू कर दी। राजनाथ यादव ने विरोध किया तो विवाद और बढ़ गया। पंचायत बैठक के तुरंत बाद इस तरह का बवाल होना गांव के माहौल पर भी गहरा असर डाल गया।
पंचायत सहायक ने डंडे से मारकर तोड़ दिया था अंगूठा, साथी ले भागे मोबाइल
एसपी साहब को दिए प्रार्थना पत्र में पीड़ित राजनाथ यादव ने आरोप लगाया है कि सभी विपक्षीगण ने एक राय होकर उस पर हमला बोल दिया। बच्चा लाल ने डंडा चलाया तो उसके बाएं हाथ का अंगूठा टूट गया और खून बहने लगा। दर्द से कराहते हुए जब वह बचाव की गुहार करने लगा तो हमलावर उसकी जेब से मोबाइल निकाल ले गए और जान से मारने की धमकी देकर फरार हो गए। घटना के बाद पीड़ित को न सिर्फ शारीरिक चोट लगी बल्कि मानसिक रूप से भी गहरा आघात पहुंचा है।
थाना और सीओ दोनों रहे खामोश, फरियादी दौड़ता रहा
हमले के बाद राजनाथ यादव सीधे चकरघट्टा थाने पहुंचा और तहरीर दी। लेकिन पुलिस ने न तो मुकदमा दर्ज किया और न ही उसका मेडिकल कराया। इसके बाद उसने नौगढ़ सीओ को भी सूचना दी, पर वहां से भी कार्रवाई टलती रही। पीड़ित का कहना है कि उसने तीन बार थाने और सीओ दफ्तर जाकर गुहार लगाई। लेकिन हर बार उसे टाल दिया गया। लोगों का कहना है कि जब थाने से ही शिकायतकर्ता को न्याय नहीं मिलेगा तो आम जनता कहां जाएगी।
एसपी की दखल से टूटी चुप्पी, अब दर्ज हुआ है मुकदमा
आखिरकार पीड़ित राजनाथ ने एसपी चंदौली से मिलकर पूरी घटना की जानकारी दी। एसपी आदित्य लांग्हे ने मामले की गंभीरता देखते हुए तत्काल मुकदमा दर्ज करने और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई के आदेश दिए। इसके बाद ही चकरघट्टा पुलिस हरकत में आई और मुकदमा दर्ज किया। ग्रामीणों ने सवाल खड़ा किया है कि अगर एसपी का आदेश न आता तो क्या यह मामला दबा ही रह जाता।
यदि थानों पर ही सुनवाई हो तो किसी को एसपी के पास जाने की जरूरत नहीं पड़ती। यह मामला प्रशासन की जमीनी कार्यप्रणाली की पोल खोल रहा है।
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