मानसून की बेरुखी पर चंदौली वन विभाग का 'ऑपरेशन लाइफलाइन': नए पौधों को सूखने से बचाने के लिए रेंजर खुद उतरे मैदान में
चंदौली की चंद्रप्रभा रेंज ने 12 जुलाई के वृक्षारोपण के बाद सूखे की आहट को देखते हुए 'ऑपरेशन लाइफलाइन' शुरू किया है। बारिश न होने पर वनकर्मी टैंकरों और बाल्टियों से नए पौधों को सींचने में जुटे हैं।
वन विभाग का 'ऑपरेशन लाइफलाइन'
टैंकरों से बचाई जा रही हरियाली
रेंजर अखिलेश दुबे खुद मोर्चे पर
चंद्रप्रभा रेंज की अनोखी मिसाल
एक भी पौधा नहीं मरने देंगे
चंदौली जिले में अमूमन सरकारी विभागों पर वृक्षारोपण के बाद पौधों को लावारिस छोड़ देने के आरोप लगते रहे हैं। हर साल करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जमीन पर हरियाली न दिखने पर सवाल उठते हैं। लेकिन इस बार काशी वन्य जीव प्रभाग (रामनगर) की चंद्रप्रभा रेंज ने एक नई और सकारात्मक मिसाल पेश की है। 12 जुलाई 2026 को आयोजित हुए व्यापक वृक्षारोपण अभियान के बाद जैसे ही मानसून की बेरुखी और सूखे की आहट दिखाई दी, वन विभाग ने हाथ पर हाथ धरे बैठने के बजाय 'ऑपरेशन लाइफलाइन' शुरू कर दिया है।

टैंकरों और बाल्टियों से हो रही आपातकालीन सिंचाई
विशेषज्ञों का हमेशा से मानना रहा है कि किसी भी पौधारोपण अभियान की असली सफलता इस बात से तय होती है कि कितने पौधे जीवित बचे। इसी बात को ध्यान में रखते हुए चंद्रप्रभा रेंज के वनकर्मी चिलचिलाती धूप में मैदान में उतर गए हैं। इस आपातकालीन अभियान के तहत जंगलों में नए रोपे गए पौधों तक ट्रैक्टर-टैंकरों और आसपास के प्राकृतिक जल स्रोतों के जरिए रोजाना पानी पहुंचाया जा रहा है। वनकर्मी सुबह से शाम तक एक-एक पौधे की जड़ में पानी डालकर नमी बनाए रखने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं।

खुद धूप में मोर्चा संभाले हुए हैं रेंजर अखिलेश दुबे
इस पूरे जीवनदायिनी अभियान की कमान खुद वन क्षेत्राधिकारी (रेंजर) अखिलेश दुबे ने संभाल रखी है। वे लगातार अलग-अलग प्लांटेशन साइट्स का औचक निरीक्षण कर रहे हैं और फील्ड पर तैनात कर्मचारियों का हौसला बढ़ा रहे हैं। रेंजर अखिलेश दुबे ने बेहद कड़े और दृढ़ शब्दों में कहा, "हमने इन पौधों को बहुत मेहनत से रोपा है। ये सिर्फ सरकारी लक्ष्य के आंकड़े नहीं हैं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों की सांसें हैं। हम बारिश का इंतजार करके इन्हें मरने नहीं दे सकते। जरूरत पड़ने पर टैंकर और बाल्टी से हर एक पौधे तक पानी पहुंचाया जाएगा।"
ग्रामीणों ने की वन विभाग की पहल की जमकर तारीफ
वन विभाग की इस मुस्तैदी को देखकर स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों में भी भारी उत्साह है। ग्रामीणों का कहना है कि जब बड़े अधिकारी खुद कड़कती धूप में खड़े होकर पौधों को बचाने के लिए पसीना बहा रहे हैं, तो इससे पूरे सरकारी अमले का मनोबल बढ़ता है। लोगों को पूरी उम्मीद है कि अगर इसी तरह नियमित रूप से पौधों की देखरेख और मॉनिटरिंग की जाती रही, तो आने वाले कुछ ही सालों में चंद्रप्रभा का यह ऐतिहासिक जंगल और अधिक घना, हरा-भरा और समृद्ध हो जाएगा। विभाग ने साफ किया है कि जब तक अच्छी बारिश नहीं होती, यह अभियान लगातार जारी रहेगा।
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