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नौगढ़ में जंगल कब्जा करने वाले लोगों पर होने जा रही है बड़ी कार्रवाई, जानिए किन पर लगेगा गैंगेस्टर एक्ट

रेंजर अमित श्रीवास्तव ने मातहतों को आदेश देकर वह सभी पुरानी फाइलें निकलवाई हैं, जिन्हें वर्षों से जानबूझकर ठंडे बस्ते में डाला गया था। कई ऐसे कई कब्जेदारों के नाम सामने आए हैं जो जंगल के किनारे बड़े पैमाने पर विस्तार, बाड़ और पथरीली जमीन पर कब्जा कर चुके थे। 
 

नए रेंजर अमित श्रीवास्तव ने  खोल दी 15 साल पुरानी फाइलें

 नए रेंजर का बड़ा फैसला अब इन लोगों पर लगेगा गैंगेस्टर एक्ट

नए रेंजर के बड़े फैसले  दबाई गई कई फाइलें फिर से खुलीं

नौगढ़ में जंगल की जमीन कब्जा करने वालों में बढ़ी बेचैनी  

चंदौली जिले के तहसील नौगढ़ में जयमोहनी रेंज में नवागत वन क्षेत्राधिकारी अमित श्रीवास्तव ने कार्यभार संभालते ही जंगल की जमीन पर कब्जा करने वाले संगठित गिरोह और अतिक्रमणकारियों की कमर तोड़ने का अभियान शुरू कर दिया है। रेंजर ने आदेश देकर वह सभी पुरानी फाइलें निकलवाई हैं, जिन्हें वर्षों से जानबूझकर ठंडे बस्ते में डाला गया था। कई ऐसे नाम सामने आए हैं जो जंगल के किनारे बड़े पैमाने पर विस्तार, बाड़ और पथरीली जमीन पर कब्जा कर चुके थे। वन विभाग अब इन मामलों की एक-एक कड़ियों को जोड़कर बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करने की तैयारी में है।

तीन–चार से अधिक केस वालों की हिस्ट्रीशीट तैयार 
आपको बता दें कि जयमोंहनी रेंज में पिछले 15 वर्षों के एच-2 केस, पुराने मुकदमे और संदिग्ध कब्जों की फ़ाइलें तेजी से स्कैन की जा रही हैं। जिन व्यक्तियों पर पहले से 3–4 या उससे ज्यादा केस दर्ज हैं, उनकी पूरी गतिविधि को अपराध श्रेणी में दर्ज कर हिस्ट्रीशीट बनाई जा रही है। विभाग का स्पष्ट संदेश है—अब जंगल को नुकसान पहुंचाने वालों को “फटकार” नहीं, बल्कि “फैसला” मिलेगा। रेंजर अमित श्रीवास्तव ने चंदौली समाचार से कहा कि ऐसे आरोपियों के खिलाफ गैंगेस्टर या गुंडा एक्ट लागू करने का प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेजा जाएगा ताकि उन्हें कानूनी रूप से पूरी तरह बांधा जा सके।

जमीन खाली नहीं की तो पुलिस-जेसीबी के साथ मौके पर पहुँचेगी टीम 
जंगल क्षेत्र में चल रहा सर्वे अब बड़े पैमाने पर पहुँचा दिया गया है, जहाँ तीन टीमों को अलग-अलग इलाकों में नाप-जोख, फोटो सर्वे और गाटा सत्यापन का जिम्मा दिया गया है। जिन जगहों पर बाड़, मकान, कुआँ, चारदीवारी या खेत बनाकर कब्जा किया गया है, उनकी सूची तैयार हो रही है। वन विभाग ने साफ बयान दिया है जो अतिक्रमण हटाने में बाधा बनेगा, उसके खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज होगा। जरूरत पड़ने पर पुलिस-फोर्स और जेसीबी के साथ मौके पर पहुंचकर कब्जा खाली कराया जाएगा। 

बाहरी जिलों से आए अतिक्रमणकारियों की होगी पहचान
जंगल के आस-पास के गांवों में वर्षों से बिचौलियों और बाहरी जिलों के बड़े पूंजीपति जमीन हड़पने का खेल खेल रहे थे। कई लोग वनवासियों के नाम पर फर्जी दिखावा कर रहे थे, जबकि असल कब्जा खुद कर रहे थे। रेंजर ने बताया कि ऐसे सभी संदिग्धों की सूची प्रशासन को सौंपी जाएगी और इनके खिलाफ बेदखली की प्रक्रिया शुरू होगी। विभाग ऐसी अवैध कब्जाधारियों की भूमि को सरकारी रजिस्टर में वापस दर्ज कराएगा ताकि आगे कोई भी उन क्षेत्रों में दावा न कर सके।

फर्जी कोर्ट ऑर्डर और दलालों के रैकेट का होगा पर्दाफाश-
पिछले सालों में मुख्यमंत्री के सीएम पोर्टल और जिलाधिकारी से कई लोगों ने शिकायत की थी कि कुछ दलाल नकली कोर्ट आदेश, झूठी रिहाई, तथा फर्जी नक्शे दिखाकर लोगों से लाखों रुपये वसूल रहे हैं। विभाग ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया तेज कर दी है। अब ऐसे फर्जीवाड़े में शामिल लोगों पर धोखाधड़ी, जालसाजी और संगठित अपराध की धाराएँ लगाई जाएँगी। रेंजर ने कहा—“फर्जी कागज दिखाकर जंगल बेचने का तमाशा अब खत्म होगा। जंगल की एक–एक इंच जमीन का रिकॉर्ड पुनः जांचा जाएगा।”

गांव–गांव चौपाल और जागरूकता अभियान शुरू
वन विभाग ने नई नीति लागू की है जिसमें असली वनवासियों के अधिकारों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। इसके लिए गांव–गांव चौपाल लगाकर लोगों को बताया जाएगा कि कौन सी जमीन वनभूमि है, कौन सी नहीं, और किस पर कब्जा करना दंडनीय अपराध है। अधिकारियों की टीम मौके पर जनसुनवाई कर ग्रामीणों की समस्याएँ सुनेगी और उन्हें दलालों, नकली कागजों और अवैध सौदों से बचने की सलाह देगी। विभाग ने कहा कि जागरूकता से ही जंगल बचेंगे और जंगल बचेंगे तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित होगा।

वन एवं भू-माफियाओं को समाप्त करने के इस अभियान में वन विभाग ने ग्रामीणों से सहयोग की अपील की है। कहा गया है कि कोई भी संदिग्ध निर्माण, लकड़ी कटान, बाहरी व्यक्ति द्वारा कब्जा, या नक्शा लेकर घूमने वालों की सूचना तुरंत वन विभाग या स्थानीय चौकी को दें। सूचना देने वाले नागरिक की पहचान गोपनीय रखी जाएगी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। विभाग का कहना है—“यह लड़ाई अकेले विभाग की नहीं, पूरे क्षेत्र की है… जंगल बचेंगे तो हमारा भविष्य बचेगा।”

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