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गुजरात में बीमारी से निधन, 5 दिन बाद तेंदुआ गांव पहुँचा हिमांशु का शव

मनीष गुजरात की एक फैक्टरी में काम करता था, बीते शनिवार को बीमार पड़ गया। इलाज के बाद वह ट्रेन से घर लौटने की कोशिश कर रहा था।
 

परदेश में काम करते हुए मनीष का निधन

एम्बुलेंस से गाँव पहुँचते ही मातम छाया

परिवार ने बेटे की अचानक मौत पर रो-रोकर बेहाल

गांव में बच्चों और बुज़ुर्गों के चेहरे पर शोक

चंदौली जिले के तेंदुआ गांव में गुरुवार की सुबह ग़म का पहाड़ टूट पड़ा, जब गांव के युवा मनीष उर्फ़ हिमांशु (20 वर्ष) का शव घर पहुँचा। परदेश में रोज़ी-रोटी कमाने गए हिमांशु की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी और वह गुजरात के एक अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। पांच दिन बाद जब उसका शव पैतृक गाँव पहुंचा, तो पूरे गांव में मातम छा गया।

आपको बता दें कि मनीष गुजरात की एक फैक्टरी में काम करता था, बीते शनिवार को बीमार पड़ गया। इलाज के बाद वह ट्रेन से घर लौटने की कोशिश कर रहा था। रास्ते में हालत बिगड़ने पर उसने 108 नंबर पर मदद मांगी, लेकिन अस्पताल पहुँचने से पहले ही उसकी मौत हो गई।

Himanshu Died

बताते चलें कि शव के आने पर परिवार का रो-रोकर बुरा हाल था। पिता मुन्नालाल कंधों से लड़खड़ा गए, मां रामावती बेसुध होकर गिर पड़ीं, और बहन मीरा फफक-फफक कर रो पड़ी। गांव के बच्चे और बुज़ुर्ग भी दुःख में डूबे हुए दिखाई दिए। एम्बुलेंस से उतरते ही मातमी सन्नाटा और चीख-पुकार के बीच पूरा गांव शोक में डूब गया।

गांव के बुज़ुर्गों ने कहा, “जिस बेटे पर परिवार का मुख्य सहारा था, वही आज चिता की लकड़ी बनने जा रहा है।” पड़ोसियों ने भी आँसू बहाते हुए परिवार को ढाढ़स बंधाया।

घटना ने न केवल परिवार बल्कि पूरे तेंदुआ गांव में शोक की लहर दौड़ा दी है। मृतक के अंतिम संस्कार में पूरे गांव ने भाग लिया और परिवार के साथ अपनी संवेदनाएँ साझा कीं।

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