नौगढ़ में पिकअप की टक्कर से बुझ गया घर का चिराग, सोनभद्र की सीमा पर देर रात हुआ सड़क हादसा
बहन की शादी के सपने अधूरे छोड़ गया 14 साल का करन
हादसे ने घर की खुशियां छीन ली
घर में अकेली हो गयी है बहन
चंदौली जिले के तहसील नौगढ़ में सोनभद्र की सीमा पर देर रात एक सड़क हादसे ने पूरे परिवार का सहारा छीन लिया। पंचायत चमेर बांध के नई बस्ती निवासी 14 वर्षीय करन की पिकअप की टक्कर से दर्दनाक मौत हो गई। करन घर का इकलौता कमाने वाला सदस्य था, उसकी असमय मौत ने परिवार और गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है।
करन की जिंदगी उसके हमउम्र बच्चों की तरह खेलकूद और पढ़ाई की नहीं थी। उसने कम उम्र में ही बड़े सपने अपने कंधों पर उठा लिए थे। वह अक्सर बहन वंदना से कहा करता था – "तू बस अपना जोड़ा और गहना देख लेना, बाकी पैसे का इंतज़ाम मैं कर लूंगा।" लेकिन किस्मत ने उसके अरमानों को अधूरा छोड़ दिया।

मां का साया पहले ही उठ चुका, पिता ने छोड़ा साथ
पांच साल पहले ही मां राजकुमारी का निधन हो गया था। पिता सोनू ने दूसरी शादी कर ली और दूसरी पत्नी के साथ अलग रहने लगा। ऐसे में दादा राम प्यारे और दादी मुराही ही बच्चों का सहारा बने। बहन जब शादी की उम्र में पहुंची तो करन ने खुद मजदूरी करके घर का बोझ उठाया। हिंदवारी के रेस्टोरेंट में दिन-रात पसीना बहाकर वह पैसे जमा कर रहा था।
हादसे ने घर की खुशियां छीन ली
मंगलवार की रात जब करन अपने साथी संग साइकिल से कूड़ा फेंककर लौट रहा था तभी बेलन नदी के पास अनियंत्रित पिकअप ने उन्हें कुचल दिया। अस्पताल पहुंचने से पहले ही दोनों की मौत हो चुकी थी। यह खबर गांव पहुंचते ही पूरे माहौल को गमगीन कर गई।
बहन और दादा-दादी का फूट-फूटकर रोना, आंखें नम हो गई
बुधवार की सुबह दादा-दादी गांव वालों के साथ चंदा इकट्ठा कर शव लेने सोनभद्र पहुंचे। मोर्चरी के बाहर बहन वंदना का विलाप सुनकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। वह बार-बार यही कह रही थी- "भैया… तूने कहा था मेरी शादी तू धूमधाम से करेगा… अब मैं किसका सहारा लूंगी?"
गांव के लोग बोले – मेहनती और मृदुभाषी था करन
बुजुर्ग बताते हैं कि करन बेहद शांत स्वभाव का था। कई बार बच्चों को बचे हुए खाने में से हिस्सा देता और बुजुर्गों की सेवा करता। उसकी ईमानदारी और मेहनत देखकर हर कोई उसे सराहता था। लोग कहते हैं कि करन के जाने से केवल एक परिवार ही नहीं, पूरा गांव उजड़ गया है।
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