गायब बेटे के लिए 4 महीने भटकती रही मां, IG के दखल के बाद नौगढ़ पुलिस ने दर्ज किया अपहरण का केस
चंदौली के नौगढ़ में बारात से गायब हुए 40 वर्षीय युवक के मामले में पुलिस 4 महीने तक परिजनों को टहलाती रही। मां ने उच्च अधिकारियों से गुहार लगाई, तब आईजी के कड़े निर्देश पर नौगढ़ पुलिस ने अपहरण का केस दर्ज किया।
बारात से गायब हुआ था 40 वर्षीय युवक
4 महीने तक भटकती रही लाचार मां
पुलिस ने युवक को बताया मानसिक विक्षिप्त
आईजी के दखल पर दर्ज हुआ मुकदमा
कॉल डिटेल और फोटो की जांच पर सवाल
चंदौली जिले के नौगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत गहिला गांव में एक दिल दहला देने वाली और पुलिस प्रशासन की संवेदनहीनता को उजागर करने वाली घटना सामने आई है। गांव की रहने वाली रमावती देवी का 40 वर्षीय बेटा 12 मई को सेमरा कुसही में एक बारात में शामिल होने गया था। अगले दिन पूरी बारात तो अपने घर वापस लौट आई, लेकिन उनका बेटा वापस नहीं पहुंचा। परिजनों ने अपने स्तर पर सभी नाते-रिश्तेदारों और संभावित जगहों पर काफी तलाश की, पर उसका कोई सुराग नहीं मिला।

40 किलोमीटर दूर ले जाने का आरोप
पीड़ित मां रमावती देवी का आरोप है कि खोजबीन के दौरान उन्हें जानकारी मिली कि अमदहां गांव का रहने वाला राकेश कोल उनके बेटे को बाइक पर बैठाकर ले गया था। इसके बाद राकेश ने उसे चकिया के सोनहुल निवासी मल्लू उर्फ प्रदीप कुमार को सौंप दिया। प्रदीप उसे अपनी चार पहिया गाड़ी से ले गया और दो दिनों तक अपने घर पर काम कराया। जब परिजनों ने पूछताछ की तो "दो दिन में घर पहुंचा दूंगा" कहकर टालता रहा, जिसके बाद से युवक का कुछ पता नहीं चला।
पुलिस फाइल में युवक को बता दिया 'मानसिक विक्षिप्त'
बेटे की खोज खबर न मिलने पर बेबस मां न्याय पाने के लिए अधिकारियों के दरवाजे खटखटाने लगी। रमावती देवी ने 21 मई को एसपी चंदौली, 28 मई को आईजी वाराणसी, मुख्यमंत्री पोर्टल, 6 जून को सम्पूर्ण समाधान दिवस और 16 जून को एसडीएम-सीओ नौगढ़ को पत्र दिया। मां का सीधा आरोप है कि केस दर्ज करने के बजाय पुलिस मामले को टालती रही और 26 जून को ऑनलाइन निस्तारण रिपोर्ट में उनके स्वस्थ व खेती-बारी करने वाले बेटे को "मानसिक विक्षिप्त" बताकर मामला रफा-दफा कर दिया।
संदिग्ध के मोबाइल में मिली थी फोटो, फिर भी नहीं खंगाली गई कॉल डिटेल
मां ने आरोप लगाया है कि जिस व्यक्ति पर बेटे को ले जाने का गंभीर संदेह है, उसके मोबाइल से उनके बेटे की तस्वीर भी मिली थी। इसके बावजूद स्थानीय पुलिस ने न तो कोई कॉल डिटेल खंगाली और न ही मोबाइल की लोकेशन ट्रेस करने की जहमत उठाई। इस मामले में गांव के प्रधान प्रतिनिधि अजय प्रताप और वरिष्ठ अधिवक्ता राम जियावन सिंह यादव ने भी तत्कालीन क्षेत्राधिकारी को पत्र सौंपकर युवक की सकुशल बरामदगी की मांग की थी।
आईजी वाराणसी के दखल के बाद हरकत में आई पुलिस
जब बात नहीं बनी तो थक-हारकर पीड़िता फिर से आईजी कार्यालय वाराणसी पहुंचीं। आईजी के कड़े निर्देश और हस्तक्षेप के बाद आखिरकार 4 महीने बाद नौगढ़ थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अपहरण की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि युवक की तलाश के लिए पुलिस टीमें गठित कर दी गई हैं। हालांकि, सवाल अब भी बरकरार है कि जिस कार्रवाई के लिए एक मां को चार महीने तक दर-दर भटकना पड़ा, उसके लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कब कार्रवाई होगी?
Tags
चंदौली जिले की खबरों को सबसे पहले पढ़ने और जानने के लिए चंदौली समाचार के टेलीग्राम से जुड़े।*








