नौगढ़ में बंदरों का आतंक: चंद्रप्रभा चौकी इंचार्ज पर झुंड ने किया हमला, अस्पताल में भर्ती
चंदौली के नौगढ़ में बंदरों ने चंद्रप्रभा चौकी इंचार्ज तरुण पांडे पर अचानक हमला कर दिया। बंदरों के झुंड ने उन्हें काटकर घायल कर दिया, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
चंद्रप्रभा चौकी इंचार्ज पर बंदरों का हमला
नौगढ़ क्षेत्र में बंदरों का आतंक
संकट मोचन मंदिर से बंदर छोड़ने की चर्चा
चंदौली में बंदरों के बढ़ते हमले
बंदर के काटने पर प्राथमिक उपचार गाइडलाइन
चंदौली जिले के नौगढ़ क्षेत्र में बंदरों का आतंक अब चरम पर पहुँच गया है। शुक्रवार को नौगढ़-चकिया मुख्य मार्ग पर स्थित चंद्रप्रभा पुलिस चौकी के पास उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब गश्त पर निकले चौकी इंचार्ज तरुण पांडे पर बंदरों के एक बड़े झुंड ने अचानक धावा बोल दिया। बंदरों की संख्या इतनी अधिक थी कि वहां मौजूद अन्य सिपाहियों के पसीने छूट गए। बड़ी मशक्कत के बाद सिपाहियों ने किसी तरह बंदरों को खदेड़कर अपने प्रभारी को बचाया।

अस्पताल में भर्ती कराए गए चौकी इंचार्ज
हमले में गंभीर रूप से घायल चौकी इंचार्ज तरुण पांडे को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौगढ़ ले जाया गया। वहां मौजूद चिकित्सक डॉ. नागेंद्र पटेल ने उनका प्राथमिक उपचार किया। उन्हें टीटी और एंटी-रेबीज के इंजेक्शन लगाए गए हैं। डॉक्टर ने बताया कि घायल को आगामी दिनों में चार और डोज लगवाने होंगे। उन्होंने घाव पर किसी भी प्रकार की घरेलू दवा न लगाने की सख्त सलाह दी है।
संकट मोचन मंदिर से बंदर छोड़ने की चर्चा
स्थानीय ग्रामीणों के बीच इस बात को लेकर भारी चर्चा और आक्रोश है कि रात के अंधेरे में वाराणसी के संकट मोचन मंदिर क्षेत्र के बंदरों को पकड़कर नौगढ़ के जंगलों में छोड़ा जा रहा है। इसी कारण अचानक इनकी संख्या में बेतहाशा वृद्धि हुई है। हालांकि प्रशासन की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन ग्रामीणों का मानना है कि यह प्रशासनिक अनदेखी का ही नतीजा है।
आमजन के साथ पुलिस भी असुरक्षित
नौगढ़ क्षेत्र में बंदरों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि लोग अपनी छतों पर कपड़े तक नहीं सुखा पा रहे हैं। आए दिन राहगीरों और वाहन चालकों पर भी बंदरों के हमले की खबरें आती रहती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब पुलिसकर्मी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता का क्या होगा? बंदर अब झुंड में सक्रिय हैं और लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं।
प्रशासन से ठोस कदम की मांग
बंदरों के बढ़ते हमलों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि वन विभाग और स्थानीय प्रशासन मिलकर बंदरों के आतंक से निपटने के लिए कोई ठोस योजना बनाए। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो किसी बड़ी अनहोनी से इंकार नहीं किया जा सकता।
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