दिल्ली में सांसद ही सुरक्षित नहीं तो आम आदमी का क्या होगा? सांसद छोटेलाल खरवार का मोदी सरकार पर बड़ा हमला
दिल्ली में पप्पू यादव पर हुए हमले के बाद सोनभद्र सांसद छोटेलाल खरवार ने मोदी सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बीजेपी पर दोहरे रवैये का आरोप लगाते हुए कहा कि दिल्ली में जब सांसद ही सुरक्षित नहीं, तो आम आदमी का क्या होगा?
दिल्ली में जन अधिकार पार्टी नेता पप्पू यादव पर हमला निंदनीय
सांसद का आवास सुरक्षित नहीं तो यूपी-बिहार में आम जनता का क्या होगा
अखिलेश यादव की तरह संविधान और कानून से मिलनी चाहिए सजा
सिर्फ गेरुआ वस्त्र पहनने से कोई सनातनी नहीं बन जाता
हनुमान जी के अपमान पर चुप रहने वाले अब मचा रहे बवाल
दिल्ली में जन अधिकार पार्टी के नेता और सांसद पप्पू यादव पर हुए जानलेवा हमले के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इस घटना को लेकर सोनभद्र के सांसद कुंवर छोटेलाल खरवार ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है।
उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सरकार की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सांसद के इस बयान के बाद सोनभद्र से लेकर दिल्ली तक का सियासी पारा चढ़ गया है।

सांसद का घर सुरक्षित नहीं तो आम जनता का क्या?
छोटेलाल खरवार ने दिल्ली में सांसदों की सुरक्षा व्यवस्था को कठघरे में खड़ा करते हुए पूछा कि जब देश की राजधानी में मीडिया के सामने एक सांसद का आवास ही सुरक्षित नहीं है, तो देश का क्या हाल होगा?
उन्होंने कहा कि अगर दिल्ली में भाजपा सरकार के दौरान सांसद ही महफूज नहीं हैं, तो उत्तर प्रदेश और बिहार में आम गरीब, किसान और लाचार लोग खुद को कैसे सुरक्षित महसूस करेंगे? उन्होंने इसे मोदी सरकार के सुशासन का असली चेहरा बताया।
धर्म और दोहरे चरित्र पर सांसद का करारा जवाब
भाजपा और उसके समर्थकों पर निशाना साधते हुए सांसद ने उनके दोहरे रवैये पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि जब भाजपा की रैली में राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने हनुमान जी का रूप बनाकर नचाया गया, तब ये विरोध करने वाले कहां थे?
जब श्रीराम जी का अपमान किया गया, तब ये धर्म के ठेकेदार चुप क्यों रहे? उन्होंने कहा कि विपक्षी नेताओं पर हमले करने वाले लोग उस समय पूरी तरह मौन साधे हुए थे, जिसे जनता अब अच्छी तरह समझ चुकी है।
संविधान से चले देश, कपड़े से नहीं बनता कोई सनातनी
सांसद खरवार ने सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की तारीफ करते हुए कहा कि वे हमेशा कानून और संविधान की बात करते हैं। किसी भी गलती की सजा कानून से तय होनी चाहिए, न कि गुंडागर्दी के जरिए।
गेरुआ वस्त्र को लेकर जारी विवाद पर उन्होंने कहा कि कोई भी वेद-पुराण यह नहीं कहता कि इंसान की पहचान उसके कपड़ों से होती है। इंसान की असली पहचान उसके आचरण और व्यवहार से होती है, सिर्फ गेरुआ पहन लेने भर से कोई सनातनी नहीं बन जाता।
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