नौगढ़ में प्रज्ञा पुराण कथा का भव्य आयोजन, 14 वरिष्ठ दंपतियों ने यज्ञ वेदी पर दोहराया अपना दांपत्य संकल्प
चंदौली के नौगढ़ में शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में आयोजित नौ कुंडीय गायत्री यज्ञ ने भक्ति और संस्कारों की नई इबारत लिख दी। वृंदावन की राधा शर्मा की अमृतवाणी और वरिष्ठ दंपतियों के दांपत्य संकल्प ने पूरे वातावरण को भावुक और आध्यात्मिक बना दिया।
नौगढ़ में गायत्री यज्ञ का भव्य आयोजन
वृंदावन की राधा शर्मा की अमृतवाणी
14 दंपतियों का भावुक दांपत्य संकल्प
प्रदीप जायसवाल का तपस्वी आयोजन संकल्प
संगीत और मंत्रों का अद्भुत आध्यात्मिक संगम
चंदौली जिले के अंतर्गत तहसील नौगढ़ के ऐतिहासिक दुर्गा मंदिर पोखरे पर आध्यात्मिक ऊर्जा का एक ऐसा स्रोत फूटा, जिसने क्षेत्र के हज़ारों श्रद्धालुओं को आत्मिक शांति का अनुभव कराया। शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में आयोजित नौ कुंडीय गायत्री यज्ञ एवं प्रज्ञा पुराण कथा केवल एक धार्मिक कर्मकांड तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह श्रद्धा, भक्ति और संस्कारों का एक जीवंत संगम बन गई। वर्षों बाद नौगढ़ की धरती पर ऐसा अलौकिक दृश्य देखने को मिला, जहाँ शब्द मौन थे और केवल भक्ति की अनुभूति बोल रही थी।

वृंदावन की राधा शर्मा की अमृतवाणी से सराबोर हुए श्रद्धालु
वृंदावन धाम से पधारीं प्रख्यात कथा वाचिका श्रीमती राधा शर्मा जी ने अपनी मधुर और ओजस्वी वाणी से प्रज्ञा पुराण की कथा का रसपान कराया। उनके प्रवचनों में कुछ ऐसा आकर्षण था कि श्रोता समय और स्थान का भान भूलकर भाव-विभोर हो गए। कथा के दौरान कई क्षण ऐसे आए जब श्रद्धालुओं की आंखें बंद थीं और वे ध्यानमग्न होकर ईश्वर की सत्ता का अनुभव कर रहे थे। उनके शब्दों ने सीधे जनमानस के हृदय में दस्तक दी और उन्हें सात्विक जीवन की प्रेरणा दी।
मधुर संगीत और भजनों ने भिगोए भक्तों के हृदय
यज्ञशाला में जब मंत्रों के साथ भजनों की स्वर लहरियाँ गूंजीं, तो पूरा वातावरण भावनात्मक हो उठा। संगीत, वेदमंत्रों और आहुति के समन्वय ने एक ऐसी ऊर्जा निर्मित की जिससे वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। भजनों के माध्यम से लोगों के भीतर छिपी संवेदनाएं जाग उठीं और लोग अनायास ही हाथ जोड़कर प्रभु की भक्ति में लीन हो गए। यह केवल गायन नहीं था, बल्कि आत्मा का परमात्मा से मिलन का एक संगीतमय मार्ग था।
प्रदीप जायसवाल का तपस्वी संकल्प और सफल संचालन
इस विशाल आयोजन की सफलता के पीछे प्रदीप जायसवाल एवं उनकी धर्मपत्नी का कठिन परिश्रम और तपस्वी संकल्प रहा। उन्होंने इस आयोजन को केवल एक कार्यक्रम के रूप में नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों के प्रसार के मिशन के रूप में लिया। व्यवस्था से लेकर अनुष्ठान तक, उनकी निष्ठा साफ झलक रही थी। वहीं, सनराइज पब्लिक स्कूल के राजू पांडेय ने अपने भावपूर्ण संचालन से कार्यक्रम में अनुशासन और गरिमा बनाए रखी, जिससे पूरा आयोजन एक लय में संचालित हुआ।
दांपत्य साधना: यज्ञ वेदी पर फिर जीवित हुए जीवनभर के रिश्ते
कार्यक्रम का सबसे हृदयस्पर्शी और ऐतिहासिक क्षण वह था, जब 14 वरिष्ठ दंपतियों ने यज्ञ वेदी के सम्मुख एक-दूसरे को माला पहनाई। उन्होंने अग्नि को साक्षी मानकर अपने दांपत्य संकल्प को पुनः दोहराया। वर्षों की जीवन यात्रा के संघर्ष और परस्पर सहयोग की चमक उनके चेहरों पर साफ देखी जा सकती थी। युवाओं के लिए यह एक गहरा संदेश था कि रिश्तों की असली नींव त्याग और समर्पण पर टिकी होती है।
जब चौपाई बनी सत्य: "सिया राम मय सब जग जानी"
आयोजन के अंत तक रामचरितमानस की अमर पंक्ति “सिया राम मय सब जग जानी” केवल एक उच्चारण न रहकर एक जीवंत सत्य बन गई। यज्ञ के धुएं और वातावरण की पवित्रता में श्रद्धालुओं को कण-कण में ईश्वर का वास महसूस होने लगा। नौगढ़ के इतिहास में इस गायत्री यज्ञ को वर्षों तक उसकी दिव्यता और सकारात्मक ऊर्जा के लिए याद रखा जाएगा।
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