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चंदौली में दर्दनाक हादसा: बहन से मिलकर लौट रहे किसान की सड़क पर 5 घंटे तड़पने के बाद मौत

चंदौली के नौगढ़-मधुपुर मार्ग पर एक भीषण सड़क हादसे ने किसान परिवार की खुशियां छीन लीं। रात भर सड़क किनारे तड़पने के बाद मोहन यादव ने दम तोड़ दिया। क्या समय पर इलाज मिलता तो बच सकती थी जान? पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
 


नौगढ़-मधुपुर मार्ग पर भीषण सड़क हादसा

5 घंटे सड़क किनारे तड़पता रहा घायल किसान

चकरघट्टा के चिकनी गांव के मोहन यादव की मौत

गश्त कर रही पुलिस ने पहुंचाया अस्पताल

BHU ट्रामा सेंटर में डॉक्टरों ने मृत घोषित किया

 चंदौली जिले के नौगढ़ इलाके में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहां के नौगढ़–मधुपुर मार्ग पर सोमवार की रात हुए एक सड़क हादसे ने न सिर्फ एक मेहनतकश किसान की जान ले ली, बल्कि एक हंसते-खेलते परिवार को कभी न भूलने वाला जख्म दे दिया। मृतक की पहचान चकरघट्टा थाना क्षेत्र के चिकनी गांव निवासी मोहन यादव के रूप में हुई है।

गश्त पर निकली पुलिस की नजर से खुला मामला
जानकारी के अनुसार, सोमवार की रात करीब एक बजे जब नौगढ़ पुलिस की टीम रूटीन गश्त पर थी, तब डुमरिया मोड़ के पास उन्हें सड़क पर एक बाइक गिरी हुई दिखाई दी। अनहोनी की आशंका में पुलिसकर्मियों ने गाड़ी रोकी और आसपास तलाश की। सड़क किनारे झाड़ियों के पास मोहन यादव गंभीर हालत में पड़े दर्द से कराह रहे थे। बताया जा रहा है कि हादसा इतना भीषण था कि मोहन हिलने-डुलने की स्थिति में भी नहीं थे।

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घायल को अस्पताल ले जाने की कोशिस

अस्पताल पहुंचने से पहले ही जवाब दे गया शरीर
पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए घायल को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) नौगढ़ पहुंचाया। वहां ड्यूटी पर तैनात डॉ. चंद्र ने प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत को नाजुक देखते हुए तुरंत बीएचयू (BHU) ट्रामा सेंटर के लिए रेफर कर दिया। पुलिस ने मोहन के पास मिले मोबाइल फोन से उनके परिजनों को सूचना दी। बदहवास परिजन अस्पताल पहुंचे और उन्हें वाराणसी ले गए, लेकिन दुर्भाग्यवश बीएचयू पहुंचने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

बहन से विदा लेकर निकले थे, घर नहीं पहुंचे
परिजनों ने रुंधे गले से बताया कि मोहन यादव सोमवार सुबह अपनी बहन से मिलने मधुपुर गए थे। शाम करीब सात बजे उनकी घर पर बात हुई थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह जल्द ही घर पहुंच जाएंगे। लेकिन रास्ते में काल ने उन्हें घेर लिया। आशंका जताई जा रही है कि हादसा रात करीब 8-9 बजे के आसपास हुआ होगा और वह करीब 5 घंटे तक सड़क किनारे तड़पते रहे। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि कोई राहगीर पहले देख लेता या समय पर एम्बुलेंस मिल जाती, तो शायद मोहन के तीन बच्चों के सिर से पिता का साया नहीं उठता।

परिवार का एकमात्र सहारा थे मोहन
मोहन यादव पेशे से किसान थे और कड़ी मेहनत कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे। उनकी मृत्यु से पत्नी बिंदा पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। वह अपने पीछे तीन बच्चे—बड़ा बेटा डब्लू (22), बेटी सरिता (20) और छोटा बेटा राकेश (18) छोड़ गए हैं। घर के एकमात्र कमाऊ सदस्य के चले जाने से अब इस परिवार के सामने भविष्य का संकट खड़ा हो गया है।

पुलिस की कार्रवाई
थानाध्यक्ष सुरेंद्र कुमार यादव ने बताया कि मृतक के शव का पंचनामा भरकर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि यह किसी अज्ञात वाहन की टक्कर थी या बाइक अनियंत्रित होकर फिसली थी।

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