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अपमान और पत्थरों के बीच जलाई थी शिक्षा की लौ, राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

चंदौली के नौगढ़ स्थित पिपराही गांव में राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले की जयंती वैचारिक चेतना के साथ मनाई गई। भीम आर्मी जिलाध्यक्ष ने युवाओं से शिक्षा को हथियार बनाने का आह्वान किया, वहीं वक्ताओं ने उनके ऐतिहासिक संघर्षों को याद किया।

 
 

पिपराही में मनाई गई फुले जयंती

शिक्षा को हथियार बनाने का आह्वान

नारी शिक्षा की जननी को नमन

सामाजिक क्रांति और वैचारिक चेतना

बहुजन समाज की एकजुटता पर जोर

भारत की प्रथम महिला शिक्षिका और सामाजिक क्रांति की अग्रदूत राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले की जयंती चंदौली जनपद के तहसील नौगढ़ अंतर्गत पिपराही गांव में बड़े ही उत्साह के साथ मनाई गई। शनिवार को आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक श्रद्धांजलि सभा नहीं थी, बल्कि यह शिक्षा के अधिकार, नारी स्वाभिमान और सामाजिक समानता के लिए एक मजबूत वैचारिक आवाज बनकर उभरी। आयोजन स्थल पर आसपास के क्षेत्रों से आए युवाओं, छात्रों और महिलाओं की भारी भीड़ ने सामाजिक एकजुटता का परिचय दिया।

भीम आर्मी जिलाध्यक्ष ने कहा- 'शिक्षा ही असली हथियार'
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष (चंदौली) मास्टर रामचंद्र राम ने सावित्रीबाई फुले के चित्र पर पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। उन्होंने अपने संबोधन में युवाओं और छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि सावित्रीबाई फुले ने उस अंधकारमय दौर में शिक्षा की अलख जगाई थी, जब वंचितों और महिलाओं के लिए अक्षर ज्ञान प्राप्त करना भी अपराध माना जाता था। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के समय में समाज की अज्ञानता को केवल शिक्षा रूपी हथियार से ही तोड़ा जा सकता है। उन्होंने संगठन के माध्यम से अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने की अपील की।

अपमान और कीचड़ के बीच जलाई शिक्षा की मशाल
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने सावित्रीबाई फुले के संघर्षमय जीवन के उन पहलुओं पर प्रकाश डाला, जो आज भी रोंगटे खड़े कर देते हैं। बताया गया कि जब वे बालिकाओं को पढ़ाने के लिए विद्यालय जाती थीं, तो कट्टरपंथी लोग उन पर पत्थर, कीचड़ और मैला फेंकते थे। अपमान के उस दौर में भी वे विचलित नहीं हुईं और अपने साथ एक अतिरिक्त साड़ी रखती थीं। उनका यह साहस केवल एक व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए नारी मुक्ति और सम्मान का द्वार खोलने वाली एक जीवंत क्रांति थी।

बहुजन समाज को एकजुट होने का आह्वान
3 जनवरी 1831 को जन्मी सावित्रीबाई फुले ने समाज में व्याप्त कुरीतियों और भेदभाव को जड़ से उखाड़ने के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक समाज की नींव उन्हीं के बलिदान पर टिकी है। इस अवसर पर वक्ताओं ने बहुजन समाज को 'शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो' के मंत्र पर चलने का आह्वान किया।

हजारों की संख्या में उमड़ी भीड़
मास्टर अवधेश कुमार भारती के प्रभावशाली संचालन में संपन्न हुए इस कार्यक्रम में ग्राम प्रधान ईशू मियां, पन्नालाल भारती, अशोक कुमार और विजय भास्कर जैसे वक्ताओं ने अपने विचार रखे। इस अवसर पर सैकड़ों की संख्या में मौजूद पुरुष, महिलाओं और बच्चों ने महापुरुषों के बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया। आयोजन में पन्नालाल, रामधनी, अमरनाथ, निर्दोष, सुभाष और सर्वेश सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

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