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नौगढ़ में पागल कुत्तों का तांडव: 10 स्कूली बच्चों समेत 20 लोगों को काटकर किया लहुलुहान, इलाके में दहशत।

चंदौली के नौगढ़ में पागल कुत्तों ने कहर बरपाते हुए मासूम बच्चों सहित 20 लोगों को अपना शिकार बनाया है। तहसील प्रशासन की चुप्पी के बीच ग्रामीण अब खुद लाठियां उठाकर अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए सड़कों पर उतर आए हैं।

 
 

नौगढ़ के 11 गांवों में कुत्तों का हमला

10 छात्र-छात्राओं समेत 20 लोग घायल

सीएचसी नौगढ़ में एंटी-रेबीज के लिए कतारें

ग्रामीणों ने लाठी-डंडा लेकर संभाली सुरक्षा

चंदौली जिले के तहसील नौगढ़ में हालात अब नियंत्रण से बाहर हो चुके हैं। गुरुवार की सुबह नौगढ़ कस्बा बाजार से शुरू हुआ पागल कुत्तों का आतंक देखते ही देखते आसपास के 11 गांवों में फैल गया। ट्यूशन जा रहे बच्चे, अपने घर के बाहर खेल रहे मासूम और दैनिक कार्यों के लिए निकले ग्रामीण अचानक इन खूंखार कुत्तों के हमलों का शिकार हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुत्ता किसी पागलपन की स्थिति में लगातार दौड़ रहा था और जो भी उसके रास्ते में आया, उसे बुरी तरह काटकर लहुलुहान कर दिया। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और स्थानीय प्रशासन की मुस्तैदी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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11 गांवों में दहशत का माहौल: 10 बच्चे भी हुए शिकार
कुत्तों के इस जानलेवा हमले की जद में थाना चकरघट्टा और नौगढ़ के अंतर्गत आने वाले हरियाबांध, बजरडीहा, बाघी, चिकनी, अमृतपुर, देउरी कला, अमदहां, पिपराही, ठटवां, चकरघट्टा और तेंदुआ गांव शामिल हैं। घायलों में सबसे बड़ी संख्या छोटे बच्चों की है, जिनकी उम्र मात्र 3 से 13 वर्ष के बीच है। ट्यूशन और स्कूल जाने वाले छात्र-छात्राओं पर हुए इन हमलों ने अभिभावकों के मन में गहरा डर पैदा कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि कुत्ते इतने आक्रामक थे कि उन्होंने सीधे गले और चेहरों पर हमला करने का प्रयास किया।

सीएचसी नौगढ़ पर उमड़ी भीड़, इलाज के लिए मची अफरा-तफरी
कुत्तों के हमलों के बाद घायलों को आनन-फानन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) नौगढ़ ले जाया गया। एक साथ 20 घायलों के अस्पताल पहुंचने से वहां हड़कंप मच गया। स्वास्थ्य कर्मियों ने स्थिति को संभालते हुए तत्काल प्राथमिक उपचार शुरू किया। अस्पताल के चिकित्सक डॉ. अजीत सिंह ने बताया कि सभी घायलों को एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) और टीटी के इंजेक्शन लगाए गए हैं। उन्होंने मरीजों को चेतावनी दी है कि वे रेबीज के अगले डोज समय पर लेना न भूलें, क्योंकि पागल कुत्ते का काटना जानलेवा साबित हो सकता है।

प्रशासन की निष्क्रियता और ग्रामीणों का आक्रोश
सुप्रीम कोर्ट और शासन स्तर पर आवारा व पागल कुत्तों के नियंत्रण के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश होने के बावजूद नौगढ़ तहसील प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है। जब सरकारी तंत्र ने कोई कदम नहीं उठाया, तो ग्रामीणों का सब्र टूट गया। अपने बच्चों की जान बचाने के लिए विभिन्न गांवों में लोग खुद लाठी-डंडे लेकर कुत्तों की तलाश में निकल पड़े हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार शिकायत के बाद भी नगर पंचायत और तहसील प्रशासन ने आवारा कुत्तों को पकड़ने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की, जिसका खामियाजा आज मासूम बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।

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