नौगढ़ में 25 साल बाद फिर गूंजेगा 'जय श्रीराम': चैत्र नवरात्रि में बाघी में 19 मार्च से सजेगा रामलीला का भव्य मंच
चन्दौली के नौगढ़ में ढाई दशक बाद रामलीला की गौरवशाली परंपरा लौटने वाली है। ग्राम प्रधान नीलम ओहरी के प्रयासों से चैत्र नवरात्रि के दौरान 19 से 27 मार्च तक प्रभु श्रीराम के आदर्शों का जीवंत मंचन होगा।
25 वर्षों बाद रामलीला की वापसी
प्रधान नीलम ओहरी की विशेष पहल
19 से 27 मार्च तक मंचन
दुर्गा पूजा पंडाल में भव्य आयोजन
पुरानी यादों को संजोने की तैयारी
चंदौली जनपद के तहसील नौगढ़ स्थित ग्राम पंचायत बाघी एक बार फिर ऐतिहासिक और धार्मिक बदलाव की साक्षी बनने जा रही है। लगभग 25 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद इस क्षेत्र में रामलीला के मंचन की परंपरा पुनर्जीवित होने वाली है। आगामी चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर, 19 मार्च से 27 मार्च तक कस्बा स्थित दुर्गा पूजा पंडाल में नौ दिवसीय भव्य रामलीला का आयोजन किया जाएगा। ग्राम प्रधान नीलम ओहरी की इस सराहनीय पहल ने पूरे इलाके के श्रद्धालुओं और पुरानी पीढ़ी के लोगों में जबरदस्त उत्साह भर दिया है।
ढाई दशक बाद लौटेगी पुरानी यादों की मिठास
पंचायत बाघी और आसपास के गांवों के लिए रामलीला महज एक नाटक नहीं, बल्कि साझा सांस्कृतिक विरासत का केंद्र रही है। बुजुर्ग ग्रामीण बिंदेश्वरी और राम जी बताते हैं कि दशकों पहले किला रोड स्थित पुराने अस्पताल के पास बने चबूतरे पर रामलीला का मंचन हुआ करता था। उस दौर में तकनीक कम और श्रद्धा अधिक थी; लोग रात-रात भर दरी पर बैठकर भगवान राम, लक्ष्मण, माता सीता और हनुमान के पात्रों को निहारते थे। अब 25 साल बाद फिर से वही भक्तिमय माहौल और "जय श्रीराम" के जयकारे गूंजने की उम्मीद ने क्षेत्र की पुरानी यादों को ताजा कर दिया है।
तैयारियों का दौर शुरू: सजाया जा रहा है मंच
रामलीला के इस नौ दिवसीय उत्सव को यादगार बनाने के लिए दुर्गा पूजा पंडाल परिसर में साफ-सफाई और मंच सज्जा का कार्य तेजी से चल रहा है। स्थानीय कलाकारों में भी इस बार खासा उत्साह है। सनराइज पब्लिक स्कूल के प्रिंसिपल राजू पांडेय के अनुसार, रामायण के विभिन्न प्रसंगों को सजीव और प्रभावशाली बनाने के लिए कलाकारों द्वारा रिहर्सल की जा रही है, ताकि नई पीढ़ी को एक श्रेष्ठ अनुभव प्रदान किया जा सके।
नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने का संकल्प
ग्राम प्रधान नीलम ओहरी ने 'चन्दौली समाचार' से बातचीत में कहा कि आधुनिकता के दौर में हम अपनी जड़ों को भूलते जा रहे हैं। रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के मर्यादा पुरुषोत्तम स्वरूप और उनके आदर्शों को समाज तक पहुँचाना ही हमारा मुख्य लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य युवाओं को भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जोड़ना है। पंचायत प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा और आयोजन की सफलता के लिए सभी आवश्यक प्रबंध किए जा रहे हैं।
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