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नौगढ़ में 'बुलडोजर राज' के खिलाफ गरजा भाकपा-माले, आदिवासियों और दलितों ने निकाला जबरदस्त लाठी मार्च

चंदौली के नौगढ़ में आदिवासियों और दलितों की जमीन से बेदखली के विरोध में भाकपा (माले) ने लाठी मार्च निकालकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने वन विभाग पर भू-माफियाओं को संरक्षण देने और गरीबों को प्रताड़ित करने का गंभीर आरोप लगाया है।

 
 

चंदौली  जनपद के तहसील नौगढ़ में शुक्रवार को आदिवासियों, बनवासियों और दलित गरीबों की पुश्तैनी जमीनों पर बुलडोजर चलाए जाने की कार्रवाई के खिलाफ भारी जन-आक्रोश देखने को मिला। भाकपा (माले) के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में महिला-पुरुषों ने 'लाठी मार्च' निकालकर प्रशासन और वन विभाग के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। प्रदर्शनकारियों ने जयमोहनी वन रेंज कार्यालय का घेराव कर डीएफओ को संबोधित ज्ञापन वन क्षेत्राधिकारी नौगढ़ संजय श्रीवास्तव को सौंपा।

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डीएफओ जवाब दो: माफियाओं को संरक्षण क्यों?
दुर्गा मंदिर पोखरा से शुरू हुआ यह लाठी मार्च जयमोहनी वन रेंज कार्यालय तक पहुँचा। प्रदर्शन के दौरान "डीएफओ जवाब दो", "आदिवासियों की जमीनों पर गड्ढे खोदना बंद करो", और "वन विभाग की मनमानी नहीं चलेगी" जैसे नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। प्रदर्शनकारियों ने सीधा आरोप लगाया कि वन विभाग के अधिकारी बड़े भू-माफियाओं को खुला संरक्षण दे रहे हैं, जबकि पीढ़ियों से जंगल में रह रहे गरीब परिवारों को उजाड़ने की साजिश रची जा रही है।

अधिकारियों के कब्जे पर उठाए सवाल
भाकपा (माले) के कार्यकर्ताओं ने कड़े शब्दों में कहा कि यदि गरीबों की जमीनों पर बुलडोजर चलाया गया तो उसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने मांग उठाई कि गरीबों पर कार्रवाई करने से पहले वन विभाग उन रेंजरों, पूर्व प्रधानों, वनरक्षकों और वाचरों के कब्जों को खाली कराए जिन्होंने जंगल की बेशकीमती जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। आरोप है कि कई कर्मचारी सरकारी वेतन भी ले रहे हैं और सरकारी जमीन पर भी काबिज हैं।

वनाधिकार कानून और फर्जी मुकदमों का विरोध
सभा को संबोधित करते हुए भाकपा (माले) के जिला सचिव कामरेड अनिल पासवान ने कहा, "नौगढ़ में प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद आदिवासियों को उनके पुश्तैनी हक से वंचित रखा जा रहा है। वनाधिकार कानून के तहत जितने भी पात्र दावेदार हैं, उन्हें तत्काल जमीन का मालिकाना हक दिया जाए।" उन्होंने आगे कहा कि जब भी कोई कार्यकर्ता माफियाओं के खिलाफ सवाल उठाता है, तो पुलिस और वन विभाग का गठजोड़ उन पर फर्जी मुकदमे लादकर आंदोलन को दबाने की कोशिश करता है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

ग्रामीणों की एकजुटता
इस प्रदर्शन में विजई राम, मुन्नी गोंड, सुरेश कोल, पतलू गोंड, रामेश्वर प्रसाद, और दिनेश कोल जैसे वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। सभा की अध्यक्षता कामरेड पांचू राम ने की और संचालन कामरेड रामकृत कोल ने किया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि आदिवासियों की बेदखली नहीं रुकी, तो यह आंदोलन और अधिक उग्र रूप लेगा।

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