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चंदप्रभा बांध में परिंदों का डेरा: साइबेरियाई मेहमानों से गुलजार हुआ नौगढ़, पर 8 साल बाद भी अधूरा 'पंछी विहार' का सपना

साइबेरिया और यूरोप से हजारों मील उड़कर विदेशी मेहमान चंदौली के नौगढ़ पहुंच गए हैं। प्रकृति की सुंदरता के बीच चंदप्रभा बांध को 'पंछी विहार' बनाने का सरकारी वादा 8 साल बाद भी अधूरा है, जिससे पर्यटन विकास ठप है।

 
 

8 साल से पंछी विहार का सपना अधूरा

साइबेरियाई पक्षियों से गुलजार चंदप्रभा बांध

पूर्वांचल का तीसरा बड़ा सुरक्षित प्रवास स्थल

जैव विविधता और पर्यटन विकास को झटका

डीएफओ ने योजना पुनः शुरू करने का दिया आश्वासन

नौगढ़ (चंदौली): जैसे ही उत्तर भारत में सर्दी का सितम शुरू होता है, चंदौली जिले के वनांचल तहसील नौगढ़ स्थित चंदप्रभा बांध का परिदृश्य बदल जाता है। हजारों किलोमीटर दूर साइबेरिया, यूरोप और मध्य एशिया के ठंडे इलाकों से उड़कर विदेशी मेहमान यहाँ सुरक्षित ठिकाने की तलाश में पहुंचते हैं। लेकिन विडंबना यह है कि इन बेजुबान परिंदों ने तो हर साल यहाँ आने का अपना वादा निभाया, पर प्रशासन अपना 8 साल पुराना 'पंछी विहार' बनाने का वादा भूल गया।

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2017 में जगी थी उम्मीद, अब तक अधूरा काम
चंदप्रभा बांध को एक सुव्यवस्थित पंछी विहार के रूप में विकसित करने की योजना वर्ष 2017 में तैयार की गई थी। वन विभाग का उद्देश्य इस क्षेत्र को जैव विविधता संरक्षण और ईको-टूरिज्म के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करना था। योजना के तहत जलाशय के बीच में पक्षियों के बैठने के लिए लकड़ी के बड़े फट्टे और विश्राम स्थल बनाए जाने थे ताकि मानवीय दखल कम हो और पक्षी सुरक्षित महसूस करें। शुरुआती हलचल के बाद यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया।

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पूर्वांचल का तीसरा सबसे बड़ा केंद्र बनने की क्षमता
भौगोलिक और प्राकृतिक दृष्टि से चंदप्रभा बांध में अपार संभावनाएं हैं। इसे बलिया के खुरहारी ताल और गोरखपुर के रामगढ़ ताल के बाद पूर्वांचल का तीसरा सबसे बड़ा पंछी विहार बनाने का प्रस्ताव था। यहाँ जलाशय की विशालता और चारों तरफ पहाड़ियों का घेरा पक्षियों के प्रजनन के लिए आदर्श वातावरण प्रदान करता है। अगर यह प्रोजेक्ट पूरा होता, तो यहाँ बर्ड वॉचिंग ज़ोन और पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित होतीं, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलता।

विदेशी मेहमानों की लम्बी फेहरिस्त
भले ही सरकारी सुविधाएं न मिली हों, लेकिन चंदप्रभा की प्राकृतिक सुंदरता परिंदों को खींच लाती है। इन दिनों जलाशय में फ्लेमिंगो, पेलिकन, शॉवलर, कॉमन टील, रेड क्रेस्टेड टील, और हेरॉन जैसे दुर्लभ प्रवासी पक्षी देखे जा रहे हैं। इनके साथ ही स्थानीय पक्षियों में कठफोड़वा, तीतर, बटेर और उल्लू भी बड़ी संख्या में मौजूद हैं। यह जलीय जैव विविधता पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

डीएफओ का आश्वासन: कब जागेगा प्रशासन?
इस मामले पर डीएफओ बी. शिवशंकर का कहना है कि विभाग जलीय जैव विविधता और पर्यटन को ध्यान में रखते हुए इस योजना को पुनर्जीवित करने के प्रयास में है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद काम में तेजी आने की उम्मीद है। सवाल यह है कि जब प्रकृति हर साल खुद को साबित कर रही है, तो सरकारी तंत्र को इसे 'पंछी विहार' के रूप में मान्यता देने में इतनी देरी क्यों हो रही है? क्या इस साल भी विदेशी मेहमान केवल सरकारी फाइलों के पूरा होने का इंतज़ार ही करेंगे?

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