चंदौली को जल्द मिलेगी डायलिसिस की बड़ी सौगात, नौगढ़ CHC ने पेश की सबसे मजबूत दावेदारी
चंदौली जिले की इकलौती डायलिसिस मशीन के लिए नौगढ़ सीएचसी ने बाजी मार ली है। सभी जरूरी मानकों को पूरा करते हुए शासन को प्रस्ताव भेज दिया गया है। मंजूरी मिलते ही मरीजों की वाराणसी-लखनऊ की महंगी दौड़ खत्म हो जाएगी।
नौगढ़ सीएचसी में डायलिसिस मशीन
वाराणसी-लखनऊ की दौड़ होगी खत्म
वनांचल के मरीजों को जीवनदान
स्वास्थ्य विभाग का नया प्रस्ताव
शासन की अंतिम मुहर का इंतजार
चंदौली जिले के नौगढ़ जैसे इलाके के किडनी मरीजों के लिए एक बहुत ही राहत भरी खबर सामने आई है। जिले की इकलौती डायलिसिस मशीन को स्थापित करने की दौड़ में नौगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) सबसे आगे निकल गया है। यदि शासन से अंतिम मंजूरी मिल जाती है, तो वनांचल क्षेत्र के हजारों गरीब मरीजों को अपने घर के पास ही इलाज की सुविधा मिल जाएगी, जिससे उनका वाराणसी और लखनऊ तक होने वाला थकाऊ और महंगा सफर खत्म हो जाएगा।
नौगढ़ सीएचसी ने दिखाई तत्परता
स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार, जनपद में एक डायलिसिस मशीन लगनी है। इस सुविधा को हासिल करने के लिए नौगढ़ सीएचसी ने बेहद तत्परता दिखाई है। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अवधेश पटेल ने बताया कि विभाग ने 24 घंटे बिजली, साफ पानी की उपलब्धता, मशीन के लिए सुरक्षित स्थान और मरीजों के बैठने की जगह जैसी सभी शर्तें पूरी कर ली हैं। इसका विस्तृत प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है।
तीन जिलों के मरीजों को होगा फायदा
यह मशीन सिर्फ चंदौली के लिए ही नहीं, बल्कि सोनभद्र और मिर्जापुर की सीमा से लगे इलाकों के मरीजों के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं होगी। नौगढ़ भौगोलिक रूप से पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्र का केंद्र है। यहाँ आसपास के कई गाँवों के लोग इलाज के लिए आते हैं। डायलिसिस यूनिट लगने से उन गरीब परिवारों को सबसे बड़ी राहत मिलेगी, जो आर्थिक तंगी के कारण अक्सर बीच में ही इलाज छोड़ देते हैं।
इलाज से ज्यादा दर्दनाक है सफर
मौजूदा समय में किडनी के मरीजों को डायलिसिस के लिए हर हफ्ते दो से तीन बार वाराणसी या लखनऊ जाना पड़ता है। सैकड़ों किलोमीटर का सफर, हजारों रुपये का किराया और मजदूरी का नुकसान—ये सब मरीजों की कमर तोड़ देता है। कई बार तो लोग सफर की इसी पीड़ा के कारण नियमित डायलिसिस नहीं करवा पाते।
शासन की अंतिम मुहर का इंतजार
डॉ. अवधेश पटेल के अनुसार, प्रस्ताव पूरी तरह से तैयार है और अब गेंद शासन के पाले में है। अस्पताल प्रशासन पूरी तरह से तैयार है और जैसे ही हरी झंडी मिलेगी, मशीन लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। अब देखना यह है कि वनांचल की स्वास्थ्य सेवाओं को यह नई पहचान कब तक मिलती है। अगर मंजूरी मिलती है, तो यह चंदौली के स्वास्थ्य इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि होगी।
Tags
चंदौली जिले की खबरों को सबसे पहले पढ़ने और जानने के लिए चंदौली समाचार के टेलीग्राम से जुड़े।*








