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नौगढ़ छठ पूजा विवाद में नोटिस मिलते ही नेतागिरी का जोश हुआ ठंडा

दोनों पक्षों ने वरिष्ठ अधिवक्ता विजय बहादुर सिंह एडवोकेट के माध्यम से लिखित सुलहनामा दाखिल किया है। इसमें स्पष्ट लिखा गया है कि भविष्य में किसी तरह का विवाद या तनाव नहीं चाहते हैं...
 

नौगढ़ में  छठ पूजा पर गेट निर्माण को लेकर हुआ था विवाद


एसडीएम ने 38 लोगों को न्यायालय में किया है तलब 


वकील के माध्यम से दिया गया सुलहनामा


किसी भी कीमत पर अब नहीं चाहते विवाद 

चंदौली जिले के तहसील नौगढ़ में  छठ पूजा पर गेट निर्माण को लेकर शुरू हुआ तनाव अब पूरी तरह से नया मोड़ ले चुका है। कुछ दिन पहले तक गलियों में "हम पीछे नहीं हटेंगे" का रौब दिखा रहे कुछ नेता और समर्थक जैसे ही शांति भंग के मुकदमे की कानूनी धाराओं के घेरे में आए, तुरंत बैकफुट पर आ गए। अब वही लोग अदालत में शांति और सौहार्द की वकालत करते दिखाई दे रहे हैं।

Politicians enthusiasm cooled after receiving SDM notice dispute in Naugarh over Chhath Puja gate construction  The SDM has summoned 38 people to court.  settlement through a lawyer
सुलहनामे से विवाद खत्म करने की पहल

बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों ने वरिष्ठ अधिवक्ता विजय बहादुर सिंह एडवोकेट के माध्यम से लिखित सुलहनामा दाखिल किया है। इसमें स्पष्ट लिखा गया है कि भविष्य में किसी तरह का विवाद या तनाव नहीं चाहते और प्रशासन मामले को खत्म कर दे। समाज और क्षेत्रहित का हवाला देते हुए कार्रवाई को समाप्त करने का अनुरोध किया गया है।

इस मामले में सबसे दिलचस्प बात यह है कि जिन लोगों ने पहले मोर्चा संभालते हुए जिंदाबाद-मुर्दाबाद  और किसी भी कीमत पर झुकेंगे नहीं जैसे नारे लगाए थे, वही लोग प्रशासन की कड़ी कार्यवाही का संकेत मिलते ही सुलह की राह थामने को मजबूर हो गए। गांव में लोग इसे “नेतागिरी ठंडी पड़ गई अभियान” के रूप में देख रहे हैं।

Politicians enthusiasm cooled after receiving SDM notice dispute in Naugarh over Chhath Puja gate construction  The SDM has summoned 38 people to court.  settlement through a lawyer
सुलहनामे से विवाद खत्म करने की पहल

सूत्र बताते हैं कि 3 दिसंबर को एसडीएम विकास मित्तल द्वारा तलब नोटिस ने पूरे खेल को बदल दिया। कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी की स्थिति ने माहौल को पल भर में ठंडा कर दिया। तनाव की आग बुझी और अचानक से “शांति सर्वोपरि है” का सुर सबसे ऊंचा हो गया।  लोगों का कहना है कि विवाद के दौरान  मंच और माइक पर सबसे तेज़ दिखने वाले चेहरे अब पूरी तरह ओझल हैं। सोशल मीडिया तक पर सक्रिय रहने वाले वही लोग, जैसे ही एसडीएम ने कड़ा रूख अपनाया, सार्वजनिक बयानबाज़ी से पूरी तरह गायब हो गए। उनकी जगह अब ‘जिम्मेदार नागरिक’ वाला स्वर अदालत में सुना जा रहा है।

ग्रामीणों का मानना है कि अगर प्रशासन की कड़ी प्रतिबद्धता न होती तो यह विवाद लंबे समय तक चलता और माहौल खराब होता। अब अदालत में प्रस्तुत कागज़ से गांव में चर्चा छिड़ी है - जब तक पेंच ढीला था नेतागिरी गरम थी, जैसे ही पेंच कसा, सब ठंडे पड़ गए।

कानूनी दबाव से नेतागिरी का जोश जिस तरह ठंडा पड़ा है, वह गांव में मिसाल बन चुका है। एसडीएम के कठोर रुख ने साफ संदेश दे दिया है कि कानून के सामने नारेबाज़ी, भीड़ और उत्तेजना नहीं चलेगी समाधान ही चलेगा। एक बात साफ है, त्योहार पर विवाद भड़काने वाले भले ही पीछे हट गए हों, लेकिन प्रशासन की निर्णायक कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि कानून वहां असर दिखाता है जहां लोग समझदारी छोड़कर टकराव का रास्ता चुन लेते हैं।

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