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नौगढ़ में मुख्यमंत्री क्लस्टर आवास योजना पर लटकी फाइलों की तलवार, घर का इंतजार कर रहे गरीब, भुगतान के 'जुगाड़' में जुटे अफसर

चंदौली के नौगढ़ में मुख्यमंत्री क्लस्टर आवास योजना भूमि पूजन के बाद ही विवादों में घिर गई है। बिना मंजूरी के 1700 ट्रॉली मिट्टी गिराने के बाद अब अफसर भुगतान का 'जुगाड़' ढूंढ रहे हैं, जबकि गरीब घर को तरस रहे हैं।

 
 

मझगावां में हुआ था भूमि पूजन

1700 ट्रॉली मिट्टी गिराने पर विवाद

तत्कालीन एसडीएम ने रुकवाया था काम

अब भुगतान का रास्ता खोज रहे अफसर

पक्के घर को तरस रहे लाभार्थी

 चंदौली जिले के विकास खंड नौगढ़ से एक ऐसी खबर सामने आई है जो सरकारी दावों की पोल खोलती है। यहाँ पंचायत मझगावां में बीते 27 मई को बड़े ही धूमधाम और उत्साह के साथ 'मुख्यमंत्री क्लस्टर आवास परियोजना' का भूमि पूजन किया गया था। बड़े-बड़े दावे किए गए थे कि इस योजना से गरीबों के पक्के मकान का सपना सच होगा। लेकिन आज एक महीने से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी गरीब परिवारों का यह सपना सिर्फ फाइलों और बयानों में ही सिमटकर रह गया है।

इस ड्रीम प्रोजेक्ट में विकास का काम तो आगे नहीं बढ़ा, लेकिन भ्रष्टाचार और लापरवाही के सवालों की नींव जरूर मजबूत हो गई है। दरअसल, बिना किसी लिखित और स्पष्ट सरकारी मंजूरी के ही मौके पर लगभग 1700 ट्रॉली काली मिट्टी, दो ट्रॉली ईंट और बालू गिरा दिए गए। अब सबसे बड़ा तमाशा इस बात को लेकर हो रहा है कि बिना मंजूरी के कराए गए इस काम का सरकारी खजाने से भुगतान कैसे कराया जाए।

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तत्कालीन एसडीएम ने पूछा सवाल तो रुक गया काम
मामला तब गरमाया जब मौके पर जेसीबी मशीनों से मिट्टी की खुदाई और भराई का काम धड़ल्ले से चल रहा था। उस समय तैनात रहे एसडीएम विकास मित्तल (जिनका अब ट्रांसफर हो चुका है) ने मौके पर पहुंचकर इस काम की सरकारी फाइल और प्रशासनिक स्वीकृति के दस्तावेज मांग लिए। बताया जा रहा है कि उस वक्त के खंड विकास अधिकारी (BDO) विकास सिंह इस पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए, जिसके बाद एसडीएम ने काम रुकवा दिया था।

उस दौरान पूरे इलाके में यह चर्चा भी खूब जोरों पर थी कि तालाब की गहरीकरण के नाम पर इस पूरी मिट्टी का भुगतान कराने का खेल रचा जा रहा है। लेकिन प्रशासनिक जांच और सख्ती के बाद यह जुगाड़ बीच में ही अटक गया। तब से लेकर अब तक लाभार्थियों के मकान का काम ठप पड़ा हुआ है।

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नए बीडीओ का बयान और भुगतान की नई जुगत
अब इस मामले में एक नया मोड़ आ गया है। नौगढ़ के नए खंड विकास अधिकारी (BDO) राकेश सिंह का एक बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ रहा है। उनका कहना है कि "मिट्टी तो मौके पर गिर चुकी है, अब इसके भुगतान का कोई न कोई तरीका तो निकालेंगे ही।" उनके इस बयान के बाद लोग पूछ रहे हैं कि क्या बिना मंजूरी के किए गए काम को बाद में किसी प्राइवेट फर्म के जरिए वैध बनाकर भुगतान किया जा सकता है?

मुख्यमंत्री क्लस्टर आवास योजना का असली मकसद गरीब परिवारों को छत देना है। लाभार्थी हर दिन इस उम्मीद में बैठते हैं कि उनका घर कब बनेगा, लेकिन अफसरों का पूरा ध्यान निर्माण कार्य से ज्यादा भुगतान की सेटिंग पर लगा हुआ है। अब जिले के लोगों की निगाहें चंदौली के जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग पर टिकी हैं कि क्या वह इस मामले की निष्पक्ष जांच कराएंगे या गरीबों का हक ऐसे ही फाइलों में दबता रहेगा।

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