भूख और पिछड़ेपन को मात देकर IPS-डॉक्टर बनने की राह पर नौगढ़ की बेटियां, DIG ने दिया सफलता का मंत्र
चंदौली के नौगढ़ में आयोजित महिला संवाद कार्यक्रम में डीआईजी वैभव कृष्ण ने बेटियों को बड़ी सफलता का मंत्र दिया। इस दौरान अधिकारियों ने अपने सम्मान में मिले अंगवस्त्रम छात्राओं को भेंट कर उनके ऊंचे हौसलों का मान बढ़ाया।
ग्राम्या संस्थान लालतापुर पहुंचे डीआईजी वैभव कृष्ण
नौगढ़ की बेटियों ने जताई आईपीएस-डॉक्टर बनने की इच्छा
डीआईजी ने अपना सम्मान सुहानी नाम की छात्रा को सौंपा
थाने में किशोरियों के लिए कंप्यूटर व ब्यूटीशियन ट्रेनिंग
1996 में कच्चे घर से शुरू हुआ था शिक्षा का अभियान
कभी भूख, गरीबी और अत्यधिक पिछड़ेपन की खबरों की वजह से राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रहने वाले चंदौली जिले के नौगढ़ क्षेत्र से अब बदलाव की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर सामने आई है। सोमवार को नौगढ़ के लालतापुर स्थित 'ग्राम्या संस्थान' में एक खास महिला संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे वाराणसी परिक्षेत्र के डीआईजी वैभव कृष्ण ने जब वहां मौजूद किशोरियों और बेटियों से उनके भविष्य और सपनों के बारे में पूछा, तो हर कोई हैरान रह गया। देश के इस सुदूर अंचल की बच्चियों ने किसी छोटे-मोटे रोजगार की बात नहीं की, बल्कि गर्व से कहा कि वे आगे चलकर आईपीएस और डॉक्टर बनना चाहती हैं।

डीआईजी ने दिया मंत्र: सपना बड़ा देखो और सकारात्मक रहो
कक्षा पांच की छात्रा अंशिका द्वारा रोली लगाकर किए गए भव्य स्वागत के बाद डीआईजी ने बच्चों से सीधा संवाद किया। छात्रा आकृति ने जब डॉक्टर बनने की इच्छा जताई, तो डीआईजी वैभव कृष्ण मुस्कुराए और उन्होंने बच्चों का हौसला बढ़ाते हुए सफलता का मूल मंत्र दिया। उन्होंने कहा, "सपना कभी छोटा मत देखो। कोई भी मंजिल असंभव नहीं होती। अगर आपके इरादे मजबूत हैं, सोच सकारात्मक है और आप पूरी ईमानदारी के साथ निरंतर मेहनत करते हैं, तो सफलता एक दिन आपके कदम जरूर चूमेगी।" उन्होंने बेटियों को पूरी आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास के साथ समाज का भविष्य बदलने के लिए प्रेरित किया।

जब अधिकारियों ने बेटियों के नाम कर दिया अपना सम्मान
इस भव्य कार्यक्रम के दौरान सबसे भावुक और यादगार पल तब आया, जब संस्थान की निदेशक बिंदु सिंह और उनकी टीम ने मुख्य अतिथि डीआईजी वैभव कृष्ण, पुलिस अधीक्षक (एसपी) आकाश पटेल, एसडीएम विकास मित्तल, सीओ नामेंद्र कुमार और वन क्षेत्राधिकारी अमित श्रीवास्तव को अंगवस्त्रम भेंट कर सम्मानित किया। लेकिन डीआईजी वैभव कृष्ण ने दरियादिली और संवेदनशीलता दिखाते हुए अपने सम्मान में मिला वह अंगवस्त्रम सुहानी नाम की एक मेधावी छात्रा को ओढ़ाकर उसे सम्मानित कर दिया। डीआईजी की इस अनूठी पहल को देख वहां मौजूद एसपी और एसडीएम समेत अन्य अधिकारियों ने भी अपने-अपने अंगवस्त्रम छात्राओं को सप्रेम भेंट कर दिए।

1996 में कच्चे मकान से शुरू हुई थी अलख, अब बेटियां रच रहीं इतिहास
संस्थान की निदेशक बिंदु सिंह ने बताया कि वर्ष 1992 में नौगढ़ में भूख से हुई मौतों ने उन्हें झकझोर दिया था, जिसके बाद उन्होंने यहां महिलाओं की शिक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए काम करने का संकल्प लिया। साल 1996 में ग्रामीणों के सहयोग से एक कच्चे घर से इस अभियान की शुरुआत हुई थी और आज इसी संस्था की फ्री कोचिंग से पढ़कर इस साल 10 बेटियों ने 86 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए हैं। कार्यक्रम में डीआईजी ने ग्रामीण महिलाओं को आश्वस्त किया कि वे अवैध शराब, तस्करी और जुए जैसी कुरीतियों की सूचना बिना डरे पुलिस को दें, उनका नाम पूरी तरह गुप्त रखा जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि नौगढ़ थाने में किशोरियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कंप्यूटर और ब्यूटीशियन का प्रशिक्षण भी शुरू किया गया है।
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