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नौगढ़ में कंबल के लिए तहसील गई वृद्धा की मौत, पति बोला- 'कंबल के चक्कर में पत्नी चली गई'

चंदौली के नौगढ़ में सरकारी संवेदनहीनता की पराकाष्ठा देखने को मिली। कर्माबांध गांव की एक बुजुर्ग महिला कंबल की आस में तहसील गई, लेकिन खाली हाथ लौटी और रास्ते में ठंड की चपेट में आने से उसकी मौत हो गई।

 
 

कंबल लेने गई वृद्धा की रास्ते में मौत

तहसील से खाली हाथ लौटी थी सुदेसरा

सड़क किनारे अचेत मिली थी बुजुर्ग महिला

अस्पताल से रात में ही मिली छुट्टी

पति रामसागर ने व्यवस्था पर उठाए सवाल

चंदौली जिला प्रशासन के उन दावों की बुधवार को नौगढ़ में पोल खुल गई, जिनमें गरीबों को ठंड से बचाने के लिए कंबल वितरण की बात कही जाती है। नौगढ़ थाना क्षेत्र के कर्माबांध गांव की एक वृद्ध महिला सुदेसरा (पत्नी रामसागर) की मौत ने यह साबित कर दिया है कि सरकारी योजनाएं अक्सर जरूरतमंदों तक पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देती हैं।

तहसील से खाली हाथ लौटना पड़ा भारी
घटना मंगलवार की है, जब हाड़ कंपा देने वाली ठंड से राहत पाने के लिए सुदेसरा कंबल की उम्मीद में नौगढ़ तहसील मुख्यालय पहुंची थी। घंटों इंतजार के बाद भी उसे कंबल नहीं मिल सका और वह खाली हाथ वापस अपने गांव के लिए पैदल ही निकल पड़ी। रास्ते में ठंड और कमजोरी के कारण वह बेदम हो गई और घर पहुंचने से पहले ही सड़क किनारे अचेत होकर गिर पड़ी।

रात में पुलिस ने बचाया, अस्पताल ने लौटाया
देर रात गश्त कर रही पैंथर पुलिस की नजर जब सड़क किनारे सिकुड़ी हुई अवस्था में पड़ी सुदेसरा पर पड़ी, तो उन्होंने तत्काल मानवता दिखाते हुए उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) नौगढ़ में भर्ती कराया। ड्यूटी पर तैनात डॉ. चंद्र कुमार और डॉ. सुनील सिंह ने उसका उपचार किया। लेकिन संवेदनहीनता का आलम देखिए, अस्पताल प्रशासन ने उसकी स्थिति में आंशिक सुधार बताकर उसे रात में ही घर भेज दिया। बुधवार सुबह घर पर अचानक दोबारा तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया।

पति की बेबसी: 'कंबल के चक्कर में चली गई जान'
मृतका के पति रामसागर का विलाप देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं। रामसागर ने रोते हुए बताया, "मैंने उसे बहुत मना किया था कि मत जाओ, लेकिन वह बोली कि ठंड बहुत लग रही है, कंबल मिल जाएगा तो चैन से सो सकूंगी। उसी एक कंबल की आस ने उसकी जान ले ली।" पति के ये शब्द सीधे तौर पर तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली और वितरण व्यवस्था पर तमाचा हैं।

सवालों के घेरे में तहसील प्रशासन
सुदेसरा की मौत के बाद नौगढ़ में आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय नागरिकों का सवाल है कि जब करोड़ों का बजट कंबल वितरण के लिए आता है, तो कर्माबांध जैसे सुदूर गांव की इस गरीब वृद्धा को कंबल क्यों नहीं दिया गया? क्या प्रशासन की सूचियां केवल रसूखदारों के लिए हैं? कर्माबांध की यह घटना केवल एक मृत्यु नहीं, बल्कि उस सिस्टम की विफलता है जो कागजों पर तो गरीबों का हमदर्द बनता है, लेकिन हकीकत में उन्हें कड़ाके की ठंड में मरने के लिए छोड़ देता है।

अब देखना यह है कि क्या जिला प्रशासन इस मामले में दोषी अधिकारियों पर कोई कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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